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निबंधन के बाद भी अब परिवन कार्यालय में भी चालान कार्य ठप, ई-स्टांप भी हुए बंद

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निबंधन के बाद भी अब परिवन कार्यालय में भी चालान कार्य ठप, ई-स्टांप भी हुए बंद

बेतिया. वित्त विभागीय स्तर पर सर्वर में आई गड़बड़ी का खामियाजा अब जिलेवासियों को भुगतना पड़ रहा है. निबंधन कार्यालय, जिला परिवहन कार्यालय से लेकर व्यवहार न्यायालय तक कामकाज लगभग ठप हो गया है. स्थिति यह है कि न तो चालान जनरेट हो पा रहा है और न ही ई-स्टांप की निकासी हो रही है. दूर-दराज से आए क्रेता-विक्रेता और वाहन मालिकों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है. पिछले 20 दिनों से जिला निबंधन कार्यालय में खरीदार और विक्रेता दस्तावेज निबंधन के लिए भटक रहे हैं. पहले भूमि निबंधन शुल्क का चालान सही तरीके से प्रदर्शित नहीं हो रहा था, अब स्टांप निर्गत होना भी बंद हो गया है. इसका असर दस्तावेज निबंधन, शपथ-पत्र निर्माण और परिवहन संबंधी कार्यों पर पड़ा है. सरकारी राजस्व से जुड़े लगभग सभी काम प्रभावित हो गए हैं. परिवहन कार्यालय की स्थिति भी नाजुक है. फिटनेस, परमिट, टैक्स, ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने या नवीनीकरण और वाहनों का ट्रांसफर कराने के लिए आने वाले लोग निराश लौट रहे हैं. ऑनलाइन ई-चालान जनरेट नहीं हो पा रहा है. हालांकि परिवहन विभाग काउंटर पर पैसा लेकर रसीद दे रहा है, लेकिन टैक्स अपडेट नहीं होने से काम अधूरा रह जाता है. आंकड़ों के मुताबिक, जहां रोजाना 100 से अधिक आवेदन आते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 10-15 तक पहुंच गई है. केवल उन्हीं लोगों का काम हो पा रहा है जिन्होंने पहले ही चालान जमा कर दिया था. अवर निबंधन पदाधिकारी गिरीश चंद्र ने बताया कि वित्त विभाग के ओ-ग्रोस सिस्टम में गड़बड़ी आई है. यह प्रणाली भारतीय रिजर्व बैंक के नियंत्रण में चलती है और चालान उसी के जरिए जमा होते हैं. गिरीश चंद्र के अनुसार, समस्या सिर्फ बेतिया तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के कई जिलों में काम प्रभावित हुआ है. विभाग को सूचना भेज दी गई है और सिस्टम ठीक होते ही कार्य शुरू हो जाएगा. व्यवहार न्यायालय परिसर और निबंधन कार्यालय में को-ऑपरेटिव बैंक के ई-स्टांप काउंटर भी बंद पड़े हैं. यहां काम कर रहे एक कर्मचारी ने बताया कि ई-स्टांप वॉलेट रिचार्ज कर निर्गत होता है, लेकिन सॉफ्टवेयर अपडेट के कारण वॉलेट रिचार्ज नहीं हो पा रहा है. जब तक बैलेंस था, तब तक स्टांप निर्गत हो रहे थे, अब पूरी तरह ठप हैं. इस गड़बड़ी का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है. जिन लोगों को जरूरी काम के लिए जमीन की बिक्री करनी थी, वे परेशान हो गए हैं. 18 से 24 सितंबर के बीच सिर्फ 82 निबंधन ही हो पाए. इससे साफ है कि राजस्व की वसूली भी बुरी तरह प्रभावित हुई है.

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