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भैंसे के साथ चुनाव प्रचार कर रहे अजीत प्रसाद महतो, खींच रहे ध्यान

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भैंसे के साथ चुनाव प्रचार कर रहे अजीत प्रसाद महतो, खींच रहे ध्यान

पुरुलिया.आजकल सत्तापक्ष से लेकर विरोधी राजनीतिक दल के उम्मीदवार गाजे-बाजे के साथ चुनाव प्रचार कर रहे हैं. ऐसे में एक प्रत्याशी ऐसा भी है, जो भैंसे के साथ चुनाव प्रचार कर रहा है और उसकी ओर सबका ध्यान भी जा रहा है. पहली बार आम चुनाव में आदिवासी कुड़मी समाज उतरा है. पुरुलिया संसदीय सीट से इस समाज के मुखिया अजीत प्रसाद महतो ही उम्मीदवार हैं. वह एक भैंसे व अपने समाज के कुछ अन्य लोगों के साथ चुनाव प्रचार कर रहे हैं. उन पर बरबस ही लोगों का ध्यान चला जा रहा है. ध्यान रहे कि पुरुलिया में भैंसे को ‘काड़ा’ कहा जाता है. उसे लेकर अजीत प्रसाद महतो गांव-गांव में चुनाव प्रचार कर रहे हैं. अपने मुखिया के इस नायाब प्रचार को लोग हाथोहाथ ले रहे हैं. इससे उनकी क्षेत्र में अलग पहचान भी बन रही है. आदिवासी कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने और जातीय मान्यता के लिए लंबे समय से आंदोलन किया जा रहा है. इस समाज की शिकायत है कि उसे केंद्र व राज्य सरकार से बस दिलासा ही मिली है. कहीं से उनके हक में कुछ भी सकारात्मक नहीं किया गया है. इसलिए आदिवासी कुड़मी समाज ने आम चुनाव में एंट्री करते हुए अपने मुखिया को मैदान में उतारा है. आदिवासी कुड़मी समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे लोग महिषासुर की तरह प्रकृति की पूजा करते हैं. इसलिए आदिवासी मान्यता के अनुरूप अजीत प्रसाद महतो भैंसे के साथ चुनाव प्रचार कर रहे हैं. मालूम रहे कि पुरुलिया भैंसों की भिड़ंत के लिए भी जाना जाता है. भैंसों की भिड़ंत को देखने के लिए हजारों लोग उमड़ते हैं. पुरुलिया में सितंबर से विभिन्न इलाकों में भैंसों की भिड़ंत होती है. इसमें अतीत में कई लोग हताहत भी हुए हैं. पुलिस प्रशासन ने भैंसों की भिड़ंत पर रोक लगा रखी है. इसके खिलाफ अजीत प्रसाद महतो ने आवाज उठायी है. कुछ राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि वैसे तो पुरुलिया में फॉरवर्ड ब्लॉक का चुनाव चिह्न शेर है. लेकिन जिंदा शेर को लेकर चुनाव प्रचार करना किसी के वश की बात नहीं है. आदिवासी कुड़मी समाज अपना चुनाव चिह्न भैंसे को बना सकता है. इसलिए भैसे को लेकर उसके मुखिया व प्रत्याशी चुनाव प्रचार कर रहे हैं.

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