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हाइपरटेंशन में DASH डायट मददगार

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हाइपरटेंशन में DASH डायट मददगार
रूपाली कुमारी
चीफ डायटीशियन
जगदीश मेमोरियल हॉस्पिटल, पटना
उच्च रक्तचाप में DASH काफी मददगार होता है. यह मुख्य रूप से हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए तैयार किया गया डायट प्लान है, जिसमें हेल्दी फूड को शामिल किया जाता है.
प्रत्येक व्यक्ति का रक्तचाप प्रतिदिन और प्रति घंटा बदलते रहता है. इसका कारण ज्यादा काम करना, भय, चिंता, शोक, क्रोध इत्यादि हो सकता है. किसी व्यक्ति का रक्तचाप सामान्य स्थिति में नियमित रूप से ज्यादा आता है, तो उसे उच्च रक्तचाप कहा जाता है.
इसका प्रमुख कारण आनुवंशिकता, मोटापा, तनाव, बढ़ती उम्र, शारीरिक निष्क्रियता, गलत आहार, धूम्रपान इत्यादि है. इसके कई दुष्प्रभाव हैं, जैसे- हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेल्योर आदि. उच्च रक्तचाप की समस्या गर्भवती महिलाओं में भी होती है. हमारे देश में 10 से 20 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं उच्च रक्तचाप की शिकार हैं. इसका मुख्य कारण उनके आहार में विटामिन ए और प्रोटीन की कमी है. इससे बचने के लिए खान-पान एवं दिनचर्या में सुधार की जरूरी है. उचित आहार रक्तचाप को नियंत्रित करता है. उच्च रक्तचाप में DASH डायट मददगार होता है. DASH का मतलब होता है- Dietary Approach to Stop Hypertension. इसमें जिन्हें भी हाइपरटेंशन हो या होने की संभावना हो, उन्हें डायट चार्ट में बदलाव कर रक्तचाप को नियंत्रित में मदद मिलती है.
नमक : नमक में अधिक मात्रा में सोडियम होता है और यह रक्तचाप को बढ़ाता है. इसलिए यह जरूरी है कि आहार में नमक की मात्रा कम हो. एक सामान्य स्वस्थ व्यक्ति की प्रतिदिन की नमक की आवश्यकता 5-6 gm है. परंतु उच्च रक्तचाप की स्थिति में नमक की मात्रा दो से तीन ग्राम ही होती है. ज्यादा नमकवाले खाद्य पदार्थों का प्रयोग न करें. जैसे- अचार, पापड़, चिप्स, सॉस, अजीनोमोटो, फ्रेंच फ्राइज, डिब्बा बंद प्रीजव्ड फूड, प्रोसेस्ड फूड, बेकरी उत्पाद आदि. नमक की कमी के कारण खाने में स्वाद की कमी महसूस होने पर नींबू का रस, काली मिर्च का प्रयोग कर सकते हैं.
पोटैशियम युक्त खाद्य पदार्थ : खाने में नियमित रूप से ताजे फल और हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए. इनमें पोटैशियम, फाइबर, मैग्नीशियम अधिक होने से यह रक्तचाप कम करने में सहायक होते हैं.
पालक, गोभी, बथुआ जैसे साग और लौकी, नीबू, पुदीना, टिंडा, करेला, टमाटर, ब्रोकली, मटर आदि का सेवन लाभदायक है. फलों में केला, बेल, मौसमी, अनार, सेब, अंगूर, संतरा, अन्ननास, अमरूद, पपीता आदि का सेवन करें. साबुत अनाज, सूखे मेवे, नेट्स, बीन्स में मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है, जो फायदेमंद है.
फाइबर : आहार में अधिक मात्रा में फाइबर शरीर के बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और इसे धमनियों में जमने से रोकता है. एक सामान्य मनुष्य को प्रतिदिन 25 से 30 ग्राम फाइबर लेना चाहिए. साबुत अनाज, चोकर वाला आटा, ओट्स, बीन्स,फल एवं सब्जियां डाइटरी फाइबर के अच्छे स्रोत हैं.
वजन : ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखने के लिए जरूरी है कि वजन भी नियंत्रित हो. अधिक वजन से उच्च रक्तचाप का खतरा भी बढ़ता है. संतुलित आहार से आप अपने वजन को नियंत्रित रख सकते हैं.
हमारे आहार में सही अनुपात में ऊर्जा, प्रोटीन, फैट, विटामिन और मिनरल होने चाहिए. दिन में दो बार भर पेट खाने की जगह दिन भर में 3 से 4 बार हल्का भोजन करें. सुबह का नाश्ता अवश्य करें. रात में खाना खाने के दो घंटे बाद ही सोएं. हो सके तो थोड़ा टहल लें.
वसा : वसा या फैट हमारे शरीर के लिए आवश्यक है, लेकिन अतिरिक्त फैट नुकसानदेह है. इसलिए अपने दैनिक आहार में फैट की मात्रा सीमित रखें. घी, मक्खन, मांस, अंडे की जर्दी, ऑर्गन मीट आदि में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होती है. इनका प्रयोग कम करें. वनस्पति तेल जिसमें आवश्यक वसीय अम्ल की अधिकता रहती है का प्रयोग करें जैसे- सरसों का तेल, मूंगफली का तेल, सूर्यमुखी का तेल, ऑलिव आयल आदि. ट्रांस फैट हमारे शरीर के लिए हानिकारक है. यह फास्ट फूड, बेकरी उत्पाद, प्रीजर्व्ड फूड में पाया जाता है.लहसुन व अदरक : रोज सुबह लहसुन की ताजी कालिया चबाने से हृदय को बहुत लाभ मिलता है.
इसमें प्रचुर मात्रा में एन्टिऑक्सिडेंट, सेलेनियम, विटामिन-सी, एलीसिन पाया जाता है, जो हृदय की धमनियों को सख्त होने से रोकता है और बुरे कोलेस्ट्रॉल को रक्त वाहिनी में जमने से रोकता है. इसके साथ ही अपने आहार में अदरक का इस्तेमाल करना चाहिए. इसमें मौजूद आवश्यक तत्व हृदय में रक्त के संचार को बढ़ाता है. रक्त के थक्का होने से रोकता है और हृदय की मांस पेशियों को आराम देता है.
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