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ड्रिंक्स के चक्कर में क्या पी रहे हैं आप?

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ड्रिंक्स के चक्कर में क्या पी रहे हैं आप?

अपनी रोजाना की डाइट में यदि आप कोल्डड्रिंक्स या डाएट ड्रिंक्स को शामिल करते हैं तो यह लेख आप जरुर पढ़ें…

आप सोचते होंगे कि कम कैलोरी वाले ड्रिंक्स आपकी सेहत को फ़ायदा पंहुचाते हैं! लेकिन क्या आप जानते हैं? कि ये कोल्डड्रिंक्स या इसकी जगह ली जाने वाली डाएट ड्रिंक्स,जिसमें काफ़ी कम कैलोरी होती है, आपके स्वास्थ्य पर उसका क्या असर डालती है? आईये आपको बताते हैं…

अमरीकी पत्रिका अमेरिकन जर्नल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ ने पाया कि डाएट ड्रिंक्स पीने वालों में 11% लोगों का वज़न ठीक है, 19% लोगों का वज़न ज़्यादा है और 22% ऐसे लोग काफी मोटे हैं.

इसी अध्ययन में,ओबेसिटीपत्रिका ने पाया कि 3,700 लोगों ने आठ साल तक कम कैलोरी का कोल्ड ड्रिंक्स पिया और वे सारे लोग मोटे हैं.

कोल्ड ड्रिंक्स को मीठा करने के लिए इसमें मिलाए जाने वाली चीज़ें तीन तरह की होती हैं.

अस्पर्टेम: यह दो अमीनो एसिड से निकाला जाता है, गंधहीन होता है और पाउडर की शक्ल में होता है.

सैकेरीन: यह किसी चीज़ को मीठा बनाने वाला पहला पदार्थ है, जिसकी खोज 1879 में की गई थी.

तीसरी श्रेणी है दक्षिण अमरीका के स्टेविया पौधे से निकलने वाली चीज़.

इसे इस तरह समझते हैं. जब चीनी जीभ पर गिरती है तो मीठा लगता है. लेकिन शरीर को यह संकेत भी जाता है कि खाना अंदर जा रहा है. शून्य कैलोरी वाली चीज़ से शरीर को खाना आने का संकेत तो जाता है, पर वहां खाना नहीं जाता.

तर्क यह है कि मीठेपन और कैलोरी के बीच का रिश्ता टूट जाता है.

लेकिन यहीं दूसरी बात ये कि जब आप यह जानते रहते हैं कि आप शून्य कैलोरी ले रहे हैं तो आप जाने अनजाने ज़रूरत से ज़्यादा खाते हैं.

अस्पर्टेम चीनी से 200 गुना ज़्यादा मीठा होता है. इससे एलर्जी, समय पूर्व बच्चे का जन्म और कैंसर तक की शिकायतें मिली हैं. यही नहीं, इस तरह के शून्य कैलोरी ड्रिंक्स के अपने नुक़सान हैं.

इसराइल के वीज़मैन विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने पाया कि कम कैलोरी वाले स्वीटनर के इस्तेमाल से पेट के अंदर बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाता है.

हमारे शरीर में जितनी कोशिकाएं होती हैं, उनका दस गुना ज़्यादा बैक्टीरिया, वाइरस और माइक्रोब्स होते हैं. स्वास्थ्य पर इनका अपना सकारात्मक असर होता है.

कम कैलोरी वाले ड्रिंक्स से यह संतुलन बिगड़ता है और लंबे समय में सेहत पर इसका बुरा असर पड़ता है.

जानवरों पर किए गए प्रयोगों से पता चला है कि कम कैलोरी वाले इन ड्रिंक्स से मेटाबोलिज़्म गड़बड़ हो जाता है. इससे मधुमेह की बीमारी शुरू हो जाती है.

इंटरनेशल जर्नल ऑफ़ ओबेसिटी के आंकड़े बताते हैं कि जब कम कैलोरी के कोल्ड ड्रिंक्स पीने वाले लोगों को अधिक कैलोरी के ड्रिेंक्स पीने को दिया गया तो उनका वज़न पहले से कम हो गया.

देखा गया है कि कम कैलोरी के ड्रिंक्स से शरीर में ऊर्जा कम हो जाती है, वजन कम हो जाता है.

यह भी पाया गया कि कम कैलोरी ड्रिंक्स पीने वाले लोग कुल मिला कर दूसरों से अधिक खा जाते हैं.

तो, अब सावधान हो जाएं और अगली बार ड्रिंक्स के चक्कर में न ही पड़े तो अच्छा.

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