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बहक न जायें कदम: अपने टीनेजर बच्चों को जरूर बताएं ये बातें

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बहक न जायें कदम: अपने टीनेजर बच्चों को जरूर बताएं ये बातें

किशोरावस्था उम्र की वह दहलीज होती है, जहां कोई किशोर/किशोरी न तो बच्चा रह जाता है और न ही वह वयस्क होता है. अभिभावक भी अपनी सुविधानुसार कभी उसे बच्चे की तरह, तो कभी बड़ों की तरह ट्रीट करते हैं. इस वजह से वह काफी कंफ्यूज्ड रहते हैं. उसके मन में कई तरह की जिज्ञासाएं होती हैं, जिसका जबाव पाने के लिए वे लालयित रहते हैं. ऐसे में उनसे गलतियां होने की संभावना भी काफी अधिक होती है. अत: उन्हें कुछ प्रमुख बातें बताना बेहद जरूरी है, ताकि वे सही दिशा में आगे बढ़ सकें.

बताएं सोशल-पॉलिटिकल पहलुओं के बारे में : 12 से 17 वर्ष उम्र को किशोरावस्था माना जाता है. इस उम्र की शुरुआत में बच्चों को देश-दुनिया की राजनीतक-सामाजिक स्थिति के बारे में छोटी-छोटी जानकारी से अवगत करवाना जरूरी है. किस राजनीतिक दल की क्या नीतियां हैं, इसके बारे में भी बताएं. तभी तो वे भविष्य में एक जिम्मेदार नागरिक की तरह सही सरकार चुनने में अपनी अहम भूमिका का निर्वाह कर सकेंगे.

रखें कानून की जानकारी : हर देश का अपना एक तय कानून होता है, जिसकी जानकारी देश के सभी नागरिकों को होनी चाहिए. इसके लिए एडवोकेट होने की जरूरत नहीं, बल्कि अपने सामान्य ज्ञान को विकसित करके भी किशोर इन बातों को जान सकते हैं. उन्हें बताना जरूरी है कि किसी दुकान से सामान उठा लेना, किसी की पिटाई कर देना, किसी का सामान तोड़ना, ट्रैफिक नियम तोड़ना आदि को अब बचपन की भूल समझ कर कोई माफ नहीं करेगा, बल्कि इनके लिए उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही हो सकती है.

बनें प्रशासन के मददगार : इन दिनों हर ओर चोरी, डकैती, बलात्कार और आतंकवाद जैसे अपराधों का बोलबाला है. जिसे देखो, वह सरकार और प्रशासन को तो खूब कोसता है, लेकिन खुद कुछ नहीं करता. एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते आप अपने किशोरवय बच्चों को बताएं कि संदेहास्पद गतिविधि, छेड़छाड़ या डकैती जैसी घटनाओं की सूचना पुलिस या प्रशासन तक पहुंचाएं. ऐसा करते हुए वे चाहें तो अपनी पहचान को गुप्त भी रख सकते हैं.

बनें जागरूक नागरिक : बच्चे या किशोर हमारे देश के आगामी भविष्य है. आज के किशोर ही कल के जिम्मेदार नागरिक बनेंगे. इस लिहाज से देश को बेहतर और सुंदर बनाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है. उन्हें बताएं कि सड़क पर फैली गंदी के लिए सरकार को कोसने से काम नहीं चलेगा. सबसे पहले हम खुद कूड़ा-कचरा इधर-उधर फेंकने से तौबा करें. साफ-सफाई के लिए अपने मित्रों, परिजनों, मुहल्लावासियों, सहकर्मियों एवं सहपाठियों को भी प्रेरित करें. किसी सामाजिक कार्यक्रम में श्रमदान दें. जरूरतमंदों की यथासंभव मदद करें.

समझें पैसों का मोल : हमारे देश में 18 वर्ष की उम्र का होते ही किशोरों कई तरह के अधिकार मिल जाते हैं, मसलन- वोट देने, जमीन-जायदाद खरीदने या बेचने, अपना बैंक अकाउंट ऑपरेट करने आदि, लेकिन अधिकार मिलना ही काफी नहीं होता. उन्हें इन अधिकारों का भली-भांति सदुपयोग करना भी आना चाहिए और इसकी नींव किशोरावस्था में ही रखी जानी चाहिए. अपने किशोरवय बच्चों को पैसे का महत्व समझाएं. उन्हें दूरदृष्टा बनने के लिए प्रेरित करें. अपने लाभ नुकसान का आकलन करने की कला सिखाएं. परिवार के बड़े लोगों के अनुभवों का फायदा उठाने तथा उनके सान्निध्य में रह कर उन मामलों की बारीकियां सीखने के लिए प्रोत्साहित करें.

सतर्कता और सावधानी का भी रखें ध्यान
किशोर-किशोरियों पर सबसे ज्यादा प्रभाव उनके पीयर ग्रुप यानी कि दोस्तों का होता है. उम्र ही यह अवस्था कुछ ऐसी होती है कि किशोरों को दुनिया का हर इंसान सही नजर आता है, सिवाय अपने पैरेंट्स के. ऐसी स्थिति में उन्हें सही राह दिखाने के लिए अभिभावकों को बेहद संयम और सूझ बरतने की जरूरत होती है.

सोच-समझकर करें दोस्ती
किशोरों को बताएं कि बुरी संगत से उनकी एकेडेमिक लाइफ और कैरियर चौपट हो सकता है. अत: उन्हें मित्रों का चयन करते वक्त सतर्कता व सावधानी बरतनी चाहिए. वे ऐसे मित्रों की संगत चुनें, जो पढ़ने में होशियार हों, मृदुभाषी हों, मुसीबत में काम आने वाले हों, सही सलाह देते हों और कैरियर के प्रति गंभीर हों.

बहक न जायें कदम
किशोरावस्था भटकाव वाली उम्र है. शरीर में होनेवाले हॉर्मोनल बदलाव के कारण इस उम्र में विपरीत लिंगियों के प्रति आकर्षण बेहद सामान्य है. इसे लेकर उन पर पाबंदी न लगाएं, बल्कि समुचित तरीके से सेक्सुअली एडुकेट करें. उन्हें बताएं कि विपरीत लिंगी से दोस्ती करना बुरा नहीं, किंतु भावनाओं में बहें, वर्ना मुसीबत में फंस सकते हैं.

ड्रग्स और नशे से रखें दूर
किशोर-किशोरियों में टशन दिखाने की ख्वाहिश बड़ी गजब की होती है. बाहरी चमक-दमक से बहुत जल्द प्रभावित हो जाते हैं. अपने दोस्तों के बीच खुद को अधिक ‘मैच्योर’ और ‘ज्ञानी’ साबित करने के लिए वे कई बार सिगरेट, शराब और ड्रग्स का भी सहारा लेने से नहीं हिचकते. यह गलती उन्हें शारीरिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से बर्बाद कर सकती है. अत: एक अभिभावक होने के नाते आप हमेशा उन्हें इन चीजों के दुष्प्रभावों के बारे में बताते रहें.

ड्राइव करने दें, पर सावधानी से : 18 वर्ष की उम्र के बाद ड्राइविंग लाइसेंस मिल जाने का मतलब भी यह नहीं कि सड़क पर दूसरों का चलना मुश्किल कर दें या तेज रफ्तार गाड़ी चलाएं. उन्हें वास्तविकता के धरातल पर रहते हुए ड्राइविंग को एंजॉय करने का हुनर सिखाएं. साथ ही, यातायात नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करें.

शिखर चंद जैन
jainshikhar6@gmail.com

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