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दीपावली की सफाई में मिल रही यादों की पोटली

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दीपावली की सफाई में मिल रही यादों की पोटली

पटना : इन दिनों हर घर में दीपावली की सफाई हो रही है. लेकिन इस सफाई के बीच कुछ खट्टी – मीठी यादें भी आ रही हैं. कई ऐसी यादें जो चेहरे पर मुस्कान ला दे तो कई ऐसी यादें भी हैं जो आंखों में पानी लाती हैं. सफाई के दौरान किसी को पुरानी तस्वीर, तो किसी को पुराना एलबम हाथ लग रहा है. किसी को वैसे पुराने खिलौने मिल जा रहे हैं, जिसमें उनके बचपन की काफी यादें जुड़ी हुई हैं. ऐसी चीजों को लोग अच्छे से साफ कर अपने घर में ही रख ले रहे हैं. लोगों का मानना है कि ऐसी यादें आपको पुराने दिनों में ले जाती है, इसलिए आप चाह कर भी इनको घर से बाहर नहीं कर सकते. इसी इमोशन और प्यार के साथ यादों को संजोया जा रहा है.

मिल रहे दूध की बोतल से लेकर शादी के कार्ड : कई घरों में बचपन की यादों से जुड़े सामान मिल रहे हैं. किसी के बचपन का पहला कपड़ा, दूध की बोतल, मोजे या फिर पुरानी कोई तस्वीर हाथ लग रही है तो कोई शादी का कार्ड व बुजुर्गों की लिखी गयी डायरी जैसी अमानती चीजों को संजो रहे हैं. अचानक से मिलने वाली इन चीजों को देख इससे जुड़ी पुरानी यादें दिमाग में घूमने लगती हैं. इस बारे में कई लोगों ने अपनी यादों को हमसे साझा किया.

पुराने एलबम देख रुक गयी सफाई : दीपावली की सफाई चल ही रही थी कि अलमारी से एक पुराना एलबम मिल गया. इसे देख हम थोड़ी देर रुक गये. एलबम का पन्ना जैसे-जैसे पलटने लगी मेरे आंखें भी नम होने क्योंकि सारी पुरानी यादें उस एलबम में ही थे. यह कहना है एसके पुरी की रूबी देवी का, जिन्होंने कुछ इसी अंदाज में अपनी बातों को साझा किया. उन्होंने कहा कि मैं उस दौरान सफाई छोड़ अपनी देवरानी आरती को एलबम की सभी तस्वीरों को दिखाया. करीब एक घंटे से अधिक समय तक हम लोग एलबम देखते रहे. फिर एलबम को साफ कर संजो कर रख दिया.

शादी के कपड़े जिन्हें सीने से लगा कर रख देती हूं
दीपावली की सफाई में थकावट तो हो जाती है, लेकिन बीत दौर की यादों से जुड़ी चीजें मिल जाये, तो सारी थकावट दूर हो जाती है. यह कहना है खगौल की रहने वाली इशिका का, जो अपनी मां की शादी के कपड़े देख काफी खुश हो गयी. इस बारे में उर्मिला देवी कहती हैं कि इस बार दीवाली की सफाई में मेरी शादी के कपड़े मिल गये, जिसे देख विश्वास नहीं हुआ कि अब हमारे बच्चों की शादी की उम्र हो गयी हैं. मैंने उसे अपने सीने से लगा लिया. फिर बेटी को दिखाते हुए बताया कि यह ड्रेस कब और कैसे लिया था.

कॉलेज वाले लेटर और तस्वीर लग गयी हाथ
पुरानी यादें हर किसी के लिये यादगार होती है. लोग चाह कर भी इन यादों से निकल नहीं पाते हैं. दीपावली की सफाई के दौरान कुछ ऐसी ही यादों में खो गयी बुद्धा कॉलोनी की नीतू शर्मा. वह कहती हैं कि इस साल दीपावली की सफाई में मुझे मेरे पति के कॉलेज वाले लेटर और उनकी पुरानी तस्वीर हाथ लगी. लेटर देख ऐसा लगा जैसे कल की बात हो जब वे लेटर लिखा करते थे. वहीं तस्वीर ने मानों कॉलेज की याद दिला दी हो.

बच्चों के खिलौने देख याद आया उनका बचपन
बच्चे कब बड़े हो जाते हैं यह पता नहीं चलता, लेकिन उनका बचपन हमेशा आंखों के सामने घूमता है. ऐसे में उनकी कुछ यादें पास हो तो पुराने दिन वापस आ जाते हैं. यह कहना है राधिका देवी का, जो दीपावली की सफाई के दौरान भावुक हो गयी. वे कहती हैं सफाई के दौरान बच्चों के खिलौने हाथ लगे. बच्चे बड़े हो गये. एक बेटी अमेरिका और एक बेटा और बेटी दिल्ली में है, लेकिन उनके छोटे-छोटे खिलौने बहुत देर तक रोक लिया. सभी खिलौनों में बच्चों की खिलखिलाहट बसी हुई है. इसलिए इन खिलौनों फिर से साफ कर अलमारी में रख दिया.

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