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Home लाइफस्टाइल कहीं आप भी तो नहीं कर रहे हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग, जानें इसके फायदे और नुकसान

कहीं आप भी तो नहीं कर रहे हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग, जानें इसके फायदे और नुकसान

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कहीं आप भी तो नहीं कर रहे हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग, जानें इसके फायदे और नुकसान

इन दिनों स्कूलों में एग्जाम्स चल रहे हैं और बच्चों पर ऊंचे लक्ष्य हासिल करने का तीव्र दबाव है. मौजूदा दौर में अच्छे अंक प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है. हर पैरेंट चाहते हैं कि उनकी संतान ‘सर्वगुण संपन्न’ हो. हम इतने महत्वाकांक्षी हो चले हैं कि अव्वल रहने की अंधी दौड़ में हमें हर वक्त यह चिंता रहती है कि ‘मेरा बच्चा कहीं पीछे न छूट जाये’. इस डर और चिंता में कई पैरेंट हर समय बच्चों पर पैनी निगाह रखते हैं. यहीं से शुरुआत होती है एक खतरनाक तरह के परवरिश की, जिसे ‘हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग’ कहते हैं. इसके फायदे कम और नुकसान ज्यादा हैं.

अंजु राठौर

पिछले साल अक्तूबर में आयी काजोल अभिनीत फिल्म ‘हेलिकॉप्टर इला’ इसी विषय पर आधारित थी. इसमें काजोल ने एक ‘हेलिकॉप्टर मां’ की भूमिका निभायी थी, जो अपने इकलौते बेटे को लेकर ओवर प्रोटेक्टिव व ओवर पजेसिव होती है. वह हर समय उसके इर्द-गिर्द रह कर उसकी गतिविधियों पर निगरानी रखती है. यहां तक कि उसके कॉलेज में एडमिशन भी ले लेती है. उसके सारे डिसीजन खुद लेती है. आखिरकार, जब उसे अपनी गलती का एहसास होता है, तो अपने ममता रूपी पिंजरे को खोल कर बेटे को ऊंची उड़ान भरने के लिए मुक्त कर देती है.

‘हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग’ शब्द का ईजाद

वर्ष 1969 में डॉ हैम जिनॉट ने अपनी बेस्ट सेलिंग बुक ‘बिटविन पैरेंट एंड टीनएजर’ में एक टीनएजर का संदर्भ पेश करते हुए सर्वप्रथम इस अलंकरण का उपयोग किया था, जो कहता है कि ‘मेरी मां मेरे आस-पास ‘हेलिकॉप्टर’ की तरह हर समय मंडराती रहती है…’

वर्ष 1990 में बाल विकास शोधकर्ता फॉस्टन क्लाइन और जिम फे ने इस परिभाषिक शब्द ‘हेलिकॉप्टर पैरेंट’ का ईजाद किया. उन्होंने पहली बार इन शब्दों का प्रयोग अपनी लिखित पुस्तक ‘पैरेंटिंग विद लव एंड मैजिक’ में किया था. यह प्रचलित तब हुआ, जब वर्ष 2000 के दशक के शुरुआती दिनों में अमेरिकी कॉलेज प्रशासन द्वारा ‘हेलिकॉप्टर पैरेंट’ का उपयोग उन भावी छात्रों के अभिभावकों के लिए किया जाने लगा, जो अपने बच्चों के प्रवेश प्रक्रिया में आवश्यकता से अधिक दखलअंदाजी करते थे.

हेलिकॉप्टर पैंरेंट्स के लक्षण

अपने बच्चों के छोटे-छोटे झगड़ों में टांग अड़ाना.

बच्चों के सारे काम (होमवर्क, कपड़े धोने, शू पॉलिश आदि) खुद कर देना.

हर समय बच्चों को अपने आस-पास रखना.

हमेशा बच्चों को कठिन परिस्थितियों से बचाने की कोशिश करना.

बच्चों की गलतियों पर ओवर रिएक्ट करना.

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