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एंग्जाइटी डिसऑर्डर: दिमाग में नकारात्मक विचार आपके लिए है नुकसानदायक

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एंग्जाइटी डिसऑर्डर: दिमाग में नकारात्मक विचार आपके लिए है नुकसानदायक

हमारे दिमाग में अक्सर कई बार नकारात्मक विचार चलते रहते हैं. हमेशा अपने साथ कुछ गलत होने की आशंका, छोटी-छोटी बातों को लेकर बेवजह घबराहट, बेचैनी, चिंता होती है, जो एंग्जाइटी डिसऑर्डर के लक्षण हैं. यह एक मनोविकार है, जो आमतौर पर 13 से 35 साल के लोगों में देखने को मिलता है. मगर इसे पागलपन समझना गलत है. अगर इस रोग का सही समय पर इलाज न कराया जाये, तो धीरे-धीरे यह फोबिया में बदल जाता है. इस रोग से मुक्ति में परिवार व करीबी लोगों की भी बड़ी भूमिका है. हमारे विशेषज्ञ दे रहे हैं पूरी जानकारी.

आज की निष्क्रिय जीवनशैली और अनहेल्दी डाइट के बढ़ते क्रेज ने कई विकारों को जन्म दिया है. एंग्जाइटी भी इन्हीं में से एक है, जो अमूमन सभी उम्र के लोगों में देखने को मिलती है. आज काम का अधिक दबाव, एक साथ कई कार्यों को निबटाने की कोशिश, काम अधूरा रह जाने या छूट जाने का डर, भीड़ के बीच अकेलापन, खुद की दूसरों से तुलना मानसिक दबाव बढ़ाता है, जो एंग्जाइटी की मुख्य वजहे हैं.
कई बीमारियों की वजह बन सकता है एंग्जाइटी
एंग्जाइटी हृदय रोग का पहला कदम हो सकता है. अगर एंग्जाइटी काफी समय तक रहती है, तो डिप्रेशन व हाइपरटेंशन की समस्या हो सकती है. ये दोनों समस्याएं हृदय रोग की सबसे प्रमुख वजहें हैं. एंग्जाइटी से मरीज के दिल की धड़कनों की गति और रक्तचाप में लगातार उतार-चढ़ाव आता रहता है. इसकी वजह से उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है. कई बार हार्ट अटैक का खतरा भी रहता है. एंग्जाइटी में कई बार रक्तचाप काफी कम हो जाता है, जो पैनिक अटैक या हार्ट फेल्योर का कारण बन सकता है.

किडनी डिजीज : एंग्जाइटी से किडनी संबंधी रोग भी हो सकते हैं. हॉर्मोन से संबंधित एंडोक्राइन सिस्टम भी लड़खड़ा जाता है. एंग्जाइटी से हमारे सेरोटोनिन और टेस्टोस्टेरॉन हॉर्मोंस भी प्रभावित होते हैं. इनकी वजह से कई अंगों की कार्यक्षमता पर असर पड़ता है. एंग्जाइटी से मस्तिष्क पर भी असर पड़ता है. मस्तिष्क में एन्यूरिज्म, इस्किमिया चेंजेज, स्ट्रेस रिएक्शन, लॉस ऑफ मेमोरी, मस्तिष्क की कार्यक्षमता में कमी आदि पर हो सकती है.

तीन तरह की एंग्जाइटी
एंग्जाइटी तीन तरह के होते हैं. सोशल एंग्जाइटी, बॉडी इमेज एंग्जाइटी व ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिस ऑर्डर.
-सोशल एंग्जाइटी : इसमें व्यक्ति को अजनबी के साथ बात करने में घबराहट होती है. भीड़ वाली जगहों या सामाजिक समारोह में वह जाने से घबराता है. समारोह या पार्टी में अनकंफर्टेबल फील करता है. उसका पसीना छूटने लगता है, खांसी या हिचकी आने लगती है.
-15-20 फीसदी लोग भारत के महानगरों में एंग्जाइटी के शिकार हैं. इनमें से 50 फीसदी लोग अपनी नींद पूरी नहीं कर पाते हैं.

-65-70 फीसदी एंग्जाइटी के मरीज हाउसवाइफ होती हैं. अक्सर अकेलेपन की वजह से उनके दिमाग में नकारात्मक ख्याल आते हैं.

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