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Home Life and Style वर्ल्ड ऑटिज्म डे: बिहार में हर 65 में से एक बच्चा प्रभावित

वर्ल्ड ऑटिज्म डे: बिहार में हर 65 में से एक बच्चा प्रभावित

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वर्ल्ड ऑटिज्म डे: बिहार में हर 65 में से एक बच्चा प्रभावित
विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस पर सांकेतिक फोटो, PHOTO AI

World Autism Awareness Day: क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और पटना यूनिवर्सिटी में विजिटिंग फैकल्टी ईशा सिंह ने ऑटिज्म को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि ऑटिज्म डिसऑर्डर स्पेक्ट्रम बच्चों में होने वाला एक न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जिसमें उनके व्यवहार, संवाद क्षमता और सामाजिक विकास पर असर पड़ता है. बिहार में लगभग हर 65 बच्चों में से एक बच्चा इस डिसऑर्डर से प्रभावित पाया जा रहा है.

लड़कों में ऑटिज्म की समस्या लड़कियों की तुलना में अधिक

ईशा सिंह के अनुसार लड़कों में ऑटिज्म की समस्या लड़कियों की तुलना में अधिक डायग्नोज होती है. इसका अनुपात करीब 3:1 है. हालांकि, इसके पीछे एक सामाजिक कारण भी है. अधिकतर अभिभावक बेटों को जांच के लिए डॉक्टर के पास लाते हैं, जबकि बेटियों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है.

ऑटिज्म के लक्षण

ईशा सिंह ने कहा कि ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों में शुरुआती उम्र से ही विकास संबंधी देरी, बोलने में कठिनाई, और सामाजिक संपर्क में कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. समय रहते पहचान और सही उपचार बेहद जरूरी है, ताकि बच्चे को बेहतर जीवन जीने का अवसर मिल सके.

स्क्रीन टाइम बच्चों में समस्या को और बढ़ा सकता है

ईशा सिंह ने यह भी बताया कि बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों में व्यवहारिक समस्याओं को बढ़ा सकता है. ऐसे मामलों में थेरेपी और जरूरत पड़ने पर दवाओं की मदद ली जाती है. उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों के व्यवहार में बदलाव को नजरअंदाज न करें और समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लें.

Disclaimer: हमारी खबरें जनसामान्य के लिए हितकारी हैं. लेकिन दवा या किसी मेडिकल सलाह को डॉक्टर से परामर्श के बाद ही लें.

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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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