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Home Life and Style बच्चे का पहला दिन नए स्कूल में कैसे बनाएं आसान? हर पैरेंट को जाननी चाहिए ये बातें

बच्चे का पहला दिन नए स्कूल में कैसे बनाएं आसान? हर पैरेंट को जाननी चाहिए ये बातें

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बच्चे का पहला दिन नए स्कूल में कैसे बनाएं आसान? हर पैरेंट को जाननी चाहिए ये बातें
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Parenting Tips: अगर आपका बच्चा पहली बार एक नए स्कूल में कदम रखने जा रहा है, तो यह सिर्फ एक एडमिशन नहीं है, यह उसके जीवन का एक बिलकुल ही नया और जरूरी मुकाम है. जल्द ही उसे नए दोस्त, नयी क्लास और नए टीचर्स मिलने वाले हैं. ये सभी चीजें बच्चे के लिए जितनी एक्साइटिंग होती है उतनी ही कई बार उसके लिए डरावनी हो सकती है. ऐसे में यह काफी जरूरी हो जाता है कि माता-पिता छोटी-छोटी समझदारी और बदलावों को अपनाना शुरू कर दे ताकि बच्चे के लिए उसका नया स्कूल आसान और खुशहाल बन सके. आज की यह आर्टिकल उन सभी पैरेंट्स के लिए हैं जिनके बच्चे जल्द एक नए स्कूल में एडमिशन लेने जा रहे हैं. आज हम आपको कुछ ऐसे तरीके बताने जा रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप अपने बच्चे को नए माहौल में आसानी से घुलने-मिलने और कॉन्फिडेंस के साथ आगे बढ़ने में मदद कर पाएंगे. तो चलिए इन टिप्स के बारे में जानते हैं विस्तार से.

सही स्कूल चुनना जरूरी

पैरेंट्स को सबसे पहले अपने बच्चे के लिए एक सही स्कूल चुनना चाहिए. सिर्फ स्कूल की पढ़ाई ही नहीं वहां का माहौल, टीचर्स का व्यवहार और बच्चों के लिए दी जाने वाली फैसिलिटीज भी काफी मायने रखती हैं. स्कूल चुनते समय आपको इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि वह घर से ज्यादा दूर न हो. अगर घर ज्यादा दूर होगा तो बच्चे को सफर में ही थकावट का एहसास होने लगेगा.

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बच्चे को पहले से तैयार करें

जब आपका बच्चे एक नए स्कूल में जा रहा हो, तो आपको उसे मेंटली तैयार करना भी शुरू कर देना चाहिए. अपने बच्चे को बताएं कि उसका नया स्कूल कैसे होने वाला है, वहां उसे नए दोस्त मिलने वाले हैं और साथ ही वह नयी चीजें भी वहां पर सीख सकेगा. जब आप इस तरह की बातें अपने बच्चे को बताते हैं, तो उसके दिल में छिपा डर कम होने लगता है और वह आने वाले बदलावों को आसानी से स्वीकार भी कर पाता है.

एडमिशन से पहले स्कूल का माहौल दिखाना जरूरी

अगर आपके लिए पॉसिबल हो तो अपने बच्चे को नए स्कूल में एडमिशन दिलवाने से पहले एक बार उसे स्कूल जरूर घुमा दें. उसे क्लासरूम, ग्राउंड, लाइब्रेरी और इस तरह की सभी जगहों का एक टूर दिलाना काफी फायदेमंद हो सकता है. जब आप ऐसा करेंगे तो आपका बच्चा पहले से ही अपने स्कूल को जान लेगा और पहले दिन उसे डर भी कम लगेगा.

बच्चे के इमोशंस को समझें

नए माहौल में कदम रखना किसी भी बच्चे के लिए डरावना हो सकता है. इस डर की वजह से कई बार बच्चा उदास या फिर घबराया हुआ रहने लगता है. अगर आपके बच्चा भी ऐसा बर्ताव करे तो उसे डांटें नहीं. उसकी बातों को ध्यान से सुनना शुरू कर दें. अपने बच्चे को यह भरोसा दिलाएं कि आप उसके साथ हैं और समय के साथ सबकुछ ठीक होने लग जाएगा.

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डेली रूटीन सेट करें

जब बच्चे नए स्कूल में एडमिशन लेते हैं तो उनका रूटीन भी बदल जाता है. उसके सोने का समय, उठने का और पढ़ने का समय भी फिक्स करना जरूरी हो जाता है. जब आप एक रूटीन सेट कर लेते हैं, तो बच्चा उसके अनुसार ही खुद को ढालना शुरू कर देता है. जब बच्चे का रूटीन सही होता है तो उसे एक स्टेबिलिटी का एहसास होता है और साथ ही वह ज्यादा कॉन्फिडेंस के साथ नए स्कूल में कदम रखता है.

टीचर्स से कॉन्टैक्ट बनाए रखें

जब आपका बच्चा नए स्कूल में शिफ्ट कर जाए, तो आपके उसके टीचर्स के साथ कुछ दिनों तक कॉन्टैक्ट में जरूर रहना चाहिए. जब आप ऐसा करेंगे तो आपको अपने बच्चे की ग्रोथ और बर्ताव के बारे में रेगुलर अपडेट्स मिलते रहेंगे. अगर आपके बच्चे के साथ कोई प्रॉब्लम होगी तो आप उसे आसानी से सॉल्व भी कर पाएंगे.

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सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन विषयों पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की भाषा में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और एसईओ फ्रेंडली होते हैं.
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