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Home Life and Style बिना डांटे भी बच्चे बन सकते हैं डिसिप्लिन्ड, अपनाएं ये आसान पैरेंटिंग टिप्स

बिना डांटे भी बच्चे बन सकते हैं डिसिप्लिन्ड, अपनाएं ये आसान पैरेंटिंग टिप्स

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बिना डांटे भी बच्चे बन सकते हैं डिसिप्लिन्ड, अपनाएं ये आसान पैरेंटिंग टिप्स
बिना डांटे बच्चे को डिसिप्लिन कैसे सिखाएं AI image

हर पैरेंट की यह चाहत होती है कि उनका बच्चा जीवन में आगे चलकर डिसिप्लिन में रहे और साथ ही जिम्मेदार और समझदार भी बने. लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि डिसिप्लिन सिखाने के नाम पर पैरेंट्स बच्चों को डांटने लग जाते हैं और उनके साथ काफी सख्ती से पेश आने लगते हैं. जब आप ऐसा करते हैं तो बच्चे कुछ समय तक डरकर आपकी हर बात मान लेते हैं, लेकिन एक समय के बाद आपकी इस आदत की वजह से उनके दिन में डर, झिझक या फिर गुस्से की भावना भी पैदा हो जाती है. अगर आपके घर पर भी छोटे बच्चे हैं और आप उन्हें डिसिप्लिन सिखाना चाहते हैं तो आज की यह आर्टिकल खास आपके लिए ही है. आज हम आपको कुछ ऐसे स्मार्ट पैरेंटिंग टिप्स बताने जा रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप अपने बच्चे को बिना डांट-फटकार लगाए डिसिप्लिन में रहना सिखा सकते हैं. तो चलिए जानते हैं कैसे.

नियम बनाएं, लेकिन अच्छे से समझाकर

जब आप बच्चों पर अचानक रोक-टोक लगाते हैं तो वे घबरा जाते हैं या फिर परेशान हो जाते हैं. ऐसा न हो इसलिए घर के हर छोटे-छोटे नियम तय करना पहले से शुरू करें. अपने बच्चे को समय पर सोना, समय पर उठना, पढ़ाई करना और अपनी सभी चीजों को अच्छे से समेटना सिखाएं. जो स्मार्ट पैरेंट्स होते हैं वे अपने बच्चों को समझाते हैं कि आखिर जीवन में नियम और डिसिप्लिन जरूरी क्यों है. जब बच्चे को इसके पीछे का कारण समझ में आ जाता है, तो वे खुद इन्हें अपनाने की कोशिश में लग जाते हैं.

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हर दिन की रूटीन तय करें

डिसिप्लिन की शुरुआत हमेशा से ही एक अच्छे डेली रूटीन के साथ होती है. अगर आपके बच्चे के सोने, जागने, पढ़ने और खेलने का समय तय है, तो वह बिना आपके ज्यादा मेहनत के ही खुद जिम्मेदार बन जाता है. हर दिन एक जैसा रूटीन अपनाने से बच्चे को पता होता है कि उसे कब और क्या करना है. जब ऐसा होता है तो आपको बार-बार उसे रोकने-टोकने की जरूरत नहीं पड़ती है.

अच्छे व्यवहार की तारीफ करें

अक्सर ऐसा होता है कि पैरेंट्स का ध्यान सिर्फ बच्चों की गलतियों पर ही होता है. वे अच्छे कामों को नजरअंदाज करने लग जाते हैं. अगर आपका बच्चा अपने सभी कामों को समय पर पूरा कर ले या फिर अपनी जिम्मेदारियों को खुद निभाए, तो आपको उसकी तारीफ जरूर करनी चाहिए. जब आप इस तरह का पॉजिटिव तरीका अपनाते हैं तो वह आगे चलकर भी अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए प्रेरित होता है. आपकी यह छोटी सी आदत उसके अंदर डिसिप्लिन को बढ़ाने का काम करती है.

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खुद बनें उनके रोल मॉडल

जो छोटे बच्चे होते हैं वे कोई भी चीज सुनकर नहीं बल्कि देखकर सीखते हैं. अगर पैरेंट्स खुद समय का पालन करें, शांति से बात करें और अपनी सभी जिम्मेदारियों को सही से निभाए, तो बच्चा भी ऐसा ही करना शुरू कर देता है. अगर आप अपने बच्चे को डिसिप्लिन सिखाना चाहते हैं तो खुद भी जीवन में डिसिप्लिन से रहना शुरू कर दें.

गलती को सीखने का मौका बनाएं

छोटे बच्चों से गलतियां होना एक आम बात है. ऐसे में उन्हें हर बात पर डांटने से बेहतर है कि आप उन्हें शांत दिमाग से समझाएं कि, अगली बार वे किस तरह से बेहतर कर सकते हैं. अगर आपका बच्चा अपनी चीजों को इधर-उधर फेंककर छोड़ दे, तो उसे खुद उस चीज को सही जगह पर रखने को कहें। इस उपाय को अपनाकर आप उसे एक जिम्मेदार और आत्मनिर्भर इंसान बनाते हैं.

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सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन विषयों पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की भाषा में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और एसईओ फ्रेंडली होते हैं.
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