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Home Life and Style 25 की उम्र में जिंदगी का रंग फीका लगने लगे तो समझ लें आप भी हैं इस बीमारी के शिकार, जानें लक्षण

25 की उम्र में जिंदगी का रंग फीका लगने लगे तो समझ लें आप भी हैं इस बीमारी के शिकार, जानें लक्षण

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25 की उम्र में जिंदगी का रंग फीका लगने लगे तो समझ लें आप भी हैं इस बीमारी के शिकार, जानें लक्षण
Pic Credit- Meta AI

Emotional Emptiness Symptoms: 25 की उम्र जिसे जिंदगी का सबसे ऊर्जावान पड़ाव कहा जाता है. लेकिन अगर उसी उम्र में लोग खालीपन महसूस करें. उन्हें नहीं पता कि उन्हें करना क्या है? यह सुनकर आपको थोड़ा अजीब लगेगा. लेकिन ये हकीकत यही है. बाहर से देखने पर उनकी जिंदगी सब ठीक लगती है. जॉब, सोशल मीडिया, रिश्ते देखकर ऐसा लगता है मानो वह अपनी नॉर्मल जिंदगी बीता रहे हों. लेकिन जब आप उनके अंदर झांककर देखेंगे तो पाएंगे कि वह भावनात्मक रूप से बेहद अकेले हैं? आज हम इस लेख में इसकी वजह को जानेंगे.

क्या होता है भावनात्मक खालीपन

हावर्ड हेल्थ पब्लिकेशन के अनुसार, भावनात्मक खालीपन एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को खुद से, अपनी भावनाओं से और दुनिया से जुड़ाव महसूस नहीं होता. अमेरिकन साइकलॉजी एसोसिएशन के अनुसार, यह स्थिति डिप्रेशन, एंग्जायटी और क्रॉनिक स्ट्रेस का शुरुआती संकेत भी हो सकती है.

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जेन जी में क्यों तेजी से बढ़ रहा है खालीपन?

डब्ल्यूएचओ के 2023 रिपोर्ट के मुताबिक, 18 से 30 वर्ष की उम्र के 61 फीसदी युवा रोजाना 6 घंटे से अधिक स्क्रीन पर बिताते हैं. लगातार इंस्टाग्राम रील्स, शॉर्ट वीडियो और ऑनलाइन डोपामिन हिट के चलते ब्रेन अब छोटे-छोटे सुखों से भी थक गया है. इसलिए अब असल जीवन बोरिंग लगने लगा है.

रिश्तों में गहराई नहीं, बस मौजूदगी है

साइकॉलोजी टुडे के अनुसार, आज के युवाओं के रिश्तों में “इमोशनल इंटिमेसी की जगह डिजिटल कनेक्शन” ने ले ली है. रिश्ते में अब सपोर्ट नहीं है. उनके अपने ही उनकी तुलना किसी से और से करते हैं. यह सबसे बड़ी वजह है.

कैरियर का भ्रम और अस्तित्व का संकट

25 की उम्र तक आते-आते जब लोग अपने पैशन से समझौता कर चुके होते हैं, तब जॉब सेटिस्फेक्शन के बजाय “जॉब सर्वाइवल मोड” शुरू हो जाता है. यह व्यक्ति के आत्म-सम्मान को धीरे-धीरे खा जाता है.

क्या आप भी इससे गुजर रहे हैं? खुद से पूछिए ये 7 सवाल

अगर इनमें से 4 या अधिक जवाब ‘हां’ में हैं, तो सतर्क हो जाइए.

  • क्या आप सुबह उठते ही थकान महसूस करते हैं?
  • क्या आपको काम में कोई उत्साह नहीं आता?
  • क्या आप हंसते हैं लेकिन अंदर से कुछ भी महसूस नहीं करते?
  • क्या आपको लगता है कि कोई आपको नहीं समझता?
  • क्या आप अकेले में खुद से ज्यादा बात करते हैं?
  • क्या आपको भविष्य बहुत डरावना लगता है?
  • क्या आपने कभी ये सोचा कि ‘काश मैं कहीं और जन्मा होता’?

अब क्या करें? इलाज नहीं, बस जीवनशैली में बदलाव लाइये

इस स्थिति को सुधारने के लिए महंगी थेरेपी नहीं, “बल्कि आपको अपने जीवनशैली में बदलाव की जरूरत है.

  1. सुबह 1 घंटे मोबाइल से दूर रहें.
  2. रोज 15 मिनट सुबह के जरूर वॉक करें. खुद के साथ समय बिताना जरूरी है.
  3. सुबह एक कप चाय पीते हुए 1 अच्छी बात सोचें.
  4. 1 लाइन का ग्रैटिट्यूड जर्नल लिखें. उसमें बताएं आज मुझे किस चीज के लिए इश्वर का धन्यवाद करना चाहिए. हर दिन अलग हो सकता है. कभी कभी ये आपकी मन की बात हो सकती है.

“भावनात्मक शून्यता” कोई बीमारी नहीं, एक चेतावनी है

मेंटल हेल्थ फाउंडेशन यूके के मुताबिक, जब आपका मन यह कहे कि “सब कुछ है लेकिन कुछ भी नहीं है”, तब यह खुद की तरफ लौटने का संकेत है.

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
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