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Home Life and Style Chhath Puja: हर किसी का सम्मान करना सीखाता है छठ पर्व उगते सूर्य से पहले दी जाती है डूबते सूर्य को अर्घ्य

Chhath Puja: हर किसी का सम्मान करना सीखाता है छठ पर्व उगते सूर्य से पहले दी जाती है डूबते सूर्य को अर्घ्य

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Chhath Puja: हर किसी का सम्मान करना सीखाता है छठ पर्व उगते सूर्य से पहले दी जाती है डूबते सूर्य को अर्घ्य

Chhath Puja: छठ को बहुत ही कठिन पर्व माना जाता है. इसीलिए लोगों की इसमें अधिक आस्था और विश्वास भी है. ऐसा माना जाता है कि छठी मैया का पर्व करने से सारे पाप समाप्त हो जाते हैं, और सच्चे मन से मांगी गई कोई भी इच्छा छठी मैया अवश्य पूरी करती हैं. यह पर्व उत्तर प्रदेश और बिहार में बड़े ही जोश और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. इस पर्व की कुछ खास बातें हर किसी के दिल को छू जाती हैं, और इसलिए इस पर्व को करने वाले और न करने वाले सभी की आस्था इससे जुड़ी रहती है. छठ पर्व में सभी जाति और वर्ग के लोगों को समान रूप से सम्मान दिया जाता है. यहां कोई बड़ा या छोटा नहीं होता; सभी मिलकर एक साथ छठ पूजा करते हैं. चाहे राजा हो या भिखारी, सभी एक साथ नदी में खड़े होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य देते हैं. इस पर्व में इतनी खूबसूरती और भाईचारा है कि हर कोई इसे पूरे मन से मनाता है.

साफ-सफाई का जिम्मा केवल एक ही वर्ग के लोगों पर नहीं होता, बल्कि घाट की सफाई में हर कोई अपनी ओर से योगदान देता है. लोग इस बात का ध्यान भी रखते हैं कि घाट पर आने-जाने वाले और पूजा करने वालों के पैरों में कोई गंदगी न लगे और न ही कोई कंकड़-पत्थर छूट जाए. हर कोई अपनी ओर से पूरी कोशिश करता है कि साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा जाए. यहां तक कि जो लोग आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होते, वे भी छठ पर्व कर सकते हैं. इस पर्व में लोग एक-दूसरे को आर्थिक रूप से भी सहयोग करते हैं. कोई किसी को फल देता है, तो कोई आर्थिक मदद करता है ताकि सबका छठ पर्व अच्छे से बीते और सभी लोग जो छठ करना चाहते हैं, वे इसे पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मना सकें.

वर्तमान और अतीत का महत्व

छठ पर्व हमें यह भी सिखाता है कि जितना हमारे भविष्य का महत्व है, उतना ही हमारे अतीत का भी. हमारे बड़े-बुजुर्ग भी हमारे लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं क्योंकि उन्होंने हमेशा हमारा साथ दिया है. जब हम उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं, तो यह हमारे वर्तमान और भविष्य का प्रतीक होता है. लोग उगते सूर्य को देखकर उससे आशीर्वाद मांगते हैं, क्योंकि वह शक्ति का प्रतीक है. जब व्यक्ति अपने पद पर होता है, तो लोग उसका सम्मान करते हैं और उससे आशा रखते हैं.

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हर जाति, हर व्यक्ति के लिए एक समान पर्व

छठ पूजा भारत का एक ऐसा पर्व है जिसमें हर वर्ग, हर जाति, और हर उम्र के लोग एक समान नजर से देखे जाते हैं. चाहे अमीर हो या गरीब, राजा हो या भिखारी, सभी एक ही नदी के जल में खड़े होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य देते हैं. इस पर्व का संदेश यही है कि इंसान की जाति, धर्म, और आर्थिक स्थिति से परे हर कोई एक ही स्तर पर है. छठ पर्व की यह विशेषता इसे और भी महान बनाती है.

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डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का संदेश

छठ पर्व में डूबते सूर्य को अर्घ्य देना एक अनोखी परंपरा है. यह हमें सिखाता है कि सिर्फ उगता सूरज ही नहीं, बल्कि डूबता सूरज भी हमारे जीवन में महत्वपूर्ण है. डूबता सूर्य उस अतीत का प्रतीक है जिसने हमें बहुत कुछ सिखाया है. यह संदेश देता है कि हमें अपने अतीत का भी सम्मान करना चाहिए, क्योंकि हमारे बुजुर्गों ने हमारे जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. छठ पूजा में पहले डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और फिर उगते सूर्य को. यही इस पर्व की सबसे अनोखी विशेषता है.

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