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अंडे और गर्भाशय के बिना वैज्ञानिकों ने बनाया दुनिया का पहला मानव भ्रूण

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अंडे और गर्भाशय के बिना वैज्ञानिकों ने बनाया दुनिया का पहला मानव भ्रूण

गर्भपात और जन्म दोषों पर शोध की आशा प्रदान करते हुए, वैज्ञानिकों ने स्पर्म, अंडे या गर्भ का उपयोग किए बिना मानव भ्रूण जैसी संरचना विकसित की है. वीज़मैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में प्रोफेसर जैकब हना की अध्यक्षता में एक शोध दल का दावा है कि “प्रयोगशाला में संवर्धित स्टेम कोशिकाओं से मानव भ्रूण के पूर्ण मॉडल बनाए गए हैं और उन्हें 14 दिन तक गर्भ के बाहर विकसित करने में कामयाब रहे हैं. हालांकि लैब में बना यह भ्रूण आधुनिक भ्रूणों जितना उन्नत नहीं है बल्कि, यह मानव विकास की शुरुआत से मेल खाता है. इसमें लगभग दो सप्ताह पुराने सामान्य भ्रूण में पाई जाने वाली सभी ज्ञात विशेषताएं शामिल हैं.

शोध में क्या है अलग

इस शोध से ये दावा किया जा रहा है कि इससे गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास को समझने, गर्भपात रोकने, जन्मजात कमियों को समझने और उन्हें दूर करने और बच्चे की चाह रखने वाले असमर्थ जोड़ों की ज्यादा मदद की जा सकेगी, लेकिन इसके लिए मानव ब्लास्टॉइड बनाने की प्रक्रिया को बड़े स्तर पर दोहराने के रास्ते खोजने होंगे. जो बात इस शोध को दूसरों से अलग करती है, वह है आनुवंशिक रूप से संशोधित भ्रूण स्टेम कोशिकाओं के बजाय रासायनिक रूप से संशोधित इसका उपयोग, जिसके परिणामस्वरूप ऐसे मॉडल तैयार होते हैं जो जर्दी थैली और एमनियोटिक कैविटी के साथ वास्तविक मानव भ्रूण से अधिक मिलते जुलते हैं.

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मॉडलों को मानव भ्रूण नहीं माना जाना चाहिए

ब्रिटेन के फ्रांसिस क्रिक इंस्टीट्यूट के जेम्स ब्रिस्को के अनुसार, ये समानताएं इन मॉडलों को गर्भपात, जन्म दोष और बांझपन जैसी स्थितियों का अध्ययन करने के लिए विशेष रूप से मूल्यवान बना सकती हैं. बायोमेडिकल रिसर्च चैरिटी के एक प्रमुख समूह लीडर और सहयोगी अनुसंधान निदेशक ब्रिस्को ने कहा कि मॉडल सभी विभिन्न प्रकार की कोशिकाएं उत्पन्न करता है जो प्रारंभिक चरण के ऊतक विकास में योगदान करती हैं. हालांकि, अध्ययन में शामिल नहीं होने वाले शोधकर्ता और वैज्ञानिक दोनों इस बात पर ज़ोर देते हैं कि इन मॉडलों को मानव भ्रूण नहीं माना जाना चाहिए. शोध स्वीकार करता है कि संरचना काफी हद तक गर्भाशय की स्थिति से मिलती-जुलती है, लेकिन उसके समान नहीं है.

नहीं की गई शोध की समीक्षा

इस शोध कार्य की अभी तक समीक्षा नहीं की गई है. फिर भी, शोध और अन्य हालिया कार्यों से पता चलता है कि यूके के यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग में स्टेम सेल बायोलॉजी के विशेषज्ञ डेरियस विडेरा ने बताया कि “मानव भ्रूण के मॉडल अधिक परिष्कृत हो रहे हैं और सामान्य विकास के दौरान होने वाली घटनाओं के करीब हो रहे हैं.” उन्होंने आगे कहा, “यह कार्य इस बात पर प्रकाश डालता है कि एक मजबूत नियामक ढांचे की पहले से कहीं अधिक आवश्यकता है.” यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि वीज़मैन इंस्टीट्यूट के शोध में मॉडलों को मानव या पशु के गर्भ में प्रत्यारोपित करना या 14 दिन की सीमा से परे उनके विकास की अनुमति देना शामिल नहीं है.

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Disclaimer: हमारी खबरें जनसामान्य के लिए हितकारी हैं. लेकिन दवा या किसी मेडिकल सलाह को डॉक्टर से परामर्श के बाद ही लें.

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