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Home Badi Khabar Chaturmas Food Restrictions: हेल्थ लिहाज से खास होता है चातुमार्स, कई चिजों के सेवन की होती है मनाही

Chaturmas Food Restrictions: हेल्थ लिहाज से खास होता है चातुमार्स, कई चिजों के सेवन की होती है मनाही

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Chaturmas Food Restrictions: हेल्थ लिहाज से खास होता है चातुमार्स, कई चिजों के सेवन की होती है मनाही

Chaturmas Food Restrictions, Start Date, Health News: हिंदू मान्यताओं के अनुसार हर वर्ष चातुमार्स आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से शुरू होता है जो पूरे चार महीने चलता है. इस बार यह तिथि 20 जुलाई को पड़ रही है. जिस दिन देवशयनी एकादशी भी पड़ेगा. कहा जाता है कि इस दौरान भगवान विष्णु समेत सभी देवतागण निद्रा में चले जाते है और सृष्टी का संचालन शिव जी के हाथो में होता है. हालांकि, इसके कुछ वैज्ञानिक कारण भी है. कहते है कि हेल्थ के लिहाज से भी चातुमार्स में कई नियम बदल जाते है.

अंग्रेजी वेबसाइट टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक चातुमार्स का आरंभ तब होता है जब वर्षा ऋतु या मॉनसून देशभर में थमता है और शरद ऋतु के आगमन की शुरूआत होती है.

स्वास्थ्य के लिहाज से क्यों सचेत रहना चाहिए चातुमार्स में

  • हिंदू धर्म में इस दौरान मांस, मछली व कुछ प्रकार के सब्जी और व्यंजन के खाने की मनाही होती है.

  • कहा जाता है कि इस दौरान हमारे पूर्वज मनन-चिंतन, योग-प्रणायाम करते थे.

  • दरअसल, इस दौरान वाटर बोन डिजीज या मौसम से जुड़ी कई बीमारियां पनपती है.

  • कहा जाता है कि इस दौरान कफ संबंधी समस्याएं गहरा जाती है.

  • दरअसल, इस दौरान खेत-खलिहान समेत अन्य जगहों पर जल-जमाव हो जाता है. ऐसे में लोगों को खीजा हुआ भोजन न खाने की सलाह दी जाती है.

  • इस दौरान पाचन क्रिया प्रभावित करने वाले किसी भी फूड का सेवन नहीं करना चाहिए. जैसे मीट, तला हुआ भोजन. दरअसल, इस दौरान हमारी पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है.

  • श्रावण महीने में हरे पत्तेदार सब्जियां, बैंगन जैसे खाद्य पदार्थ नहीं खाने चाहिए

  • भाद्रपद महीने में दूध के आइटम जैसे दही व अन्य खाद्य पदार्थ जिन्हें सड़ा-गला कर बनाया जाता है उन्हें सेवन नहीं करना चाहिए.

  • अश्विन माह में प्याज, लहसुन से भरपूर फूड का सेवन नहीं करने की सलाह दी जाती है.

  • वहीं, कार्तिक माह में हाई कैलोरी वाले उरद, मसूर दाल आदि का सेवन नहीं करना चाहिए.

  • दरअसल, मॉनसून के महीने में खेत में लगे हरे पत्तेदार फसल के आसपास कई सांप, बिच्छु के रहने की संभावना होती है. साथ ही साथ इस दौरान खेत में पेस्टीसाइड किड़े-मकौड़े मारने की दवा भी नहीं छिड़की जाती. ऐसे में कीड़े-मकौड़े फसल को खराब या जहरीले भी कर देते है.

Posted By: Sumit Kumar Verma

Disclaimer: हमारी खबरें जनसामान्य के लिए हितकारी हैं. लेकिन दवा या किसी मेडिकल सलाह को डॉक्टर से परामर्श के बाद ही लें.

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