Governor Movie Review :भारत को आर्थिक बदहाली से बचाने की असाधारण कहानी पर बनी साधारण फिल्म

मनोज बाजपेयी स्टारर रियल घटना पर आधारित फिल्म गवर्नर - द साइलेंट सेवियर को देखने की प्लानिंग है तो इससे पहले पढ़ लें यह रिव्यु

By Urmila Kori | June 12, 2026 10:45 AM

फिल्म – गवर्नर – द साइलेंट सेवियर
निर्माता – सनशाइन पिक्चर्स
निर्देशक -चिन्मय डी मांडलेकर
कलाकार -मनोज बाजपेयी ,मधु शाह, अदा शर्मा कृशा,परितोष,देवांग,जया,जयवंत और अन्य
प्लेटफार्म -सिनेमाघर
रेटिंग -ढाई

governor movie review :रुपहले परदे पर अनसंग हीरोज की कहानी में फिल्म गवर्नर द साइलेंट सेवियर से एक नया नाम जुड़ गया है. यह फिल्म पूर्व आरबीआई गवर्नर एस. वेंकिटारमनन के जीवन से प्रेरित है। जिन्होंने दिवालिया होने के कगार पर पहुँच चुके भारत को ना सिर्फ संभाला था बल्कि आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की उदारीकरण की नींव को भी रखा था.उनके उसी हिम्मती लेकिन रिस्की फैसले की यह कहानी है. फिल्म रियल घटना पर आधारित है और फिल्म का विषय मौजूदा दौर में समायिक भी हो गया है लेकिन इसका औसत स्क्रीनप्ले और पूर्वाग्रही ट्रीटमेंट इसे गहरे में उतरने नहीं देता है.जिस वजह से यह जरुरी फिल्म बनते बनते रह गयी.

ये है फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी की शुरुआत 2022 में पडोसी मुल्क श्रीलंका के दीवालिया घोषित होने की खबरों के टीवी पर चलने से होती है. एक युवक खुद को लकी बताता है कि वह दुनिया की चौथी लार्जेस्ट इकोनॉमी भारत से है. इसी बीच कमरे में मौजूद एक अधेड़ महिला (अदा शर्मा )1990 के उस आर्थिक संकट का जिक्र करती है.जिसने भारत को दिवालिया होने की कगार पर पहुंचा दिया था और कहानी 1991 के दशक में पहुंच जाती है.खाड़ी युद्ध की वजह से ईंधन की कीमतें हर दिन बढ़ रही थी. जिससे महंगाई आसमान छू रही थी.देश का विदेशी मुद्रा भंडार खत्म हो गया था और देश पर दिवालिया होने का खतरा मंडरा रहा था.इस मुश्किल समय में ए. रमन (मनोज बाजपेयी) को राष्ट्रीय बैंक ऑफ़ इंडिया का नया गवर्नर बनाया जाता है. देश को इस महा संकट से बचाने के लिए नए गवर्नर और उनकी टीम क्या सहासिक फैसले लेती है. यह फिल्म उसी की कहानी है.

फिल्म की खूबियां और खामियां

फिल्म की कहानी भारत के आर्थिक इतिहास के काले लेकिन अहम पन्ने की ओर झांकती है. इस सच्ची घटना को परदे पर उकेरने के लिए मेकर्स बधाई के पात्र हैं लेकिन जिस सच्चाई के साथ उसे परदे पर उतारना चाहिए था.वह मिसिंग सा लगता है.यह फिल्म ब्यूरोक्रेट्स की कहानी को बयान कर रही है. जो अक्सर नीतियां बनाते हैं लेकिन उन्हें लागू सरकार करती है.ये बात किसी से छिपी नहीं है लेकिन फिल्म से यह पहलू मिसिंग है.पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की सरकार में देश इस आर्थिक संकट से गुजरा था. बस इसी का फिल्म जिक्र करती है.देश उस आर्थिक संकट में कैसे पहुंचा था.क्या सिर्फ खाड़ी युद्ध और इलेक्शन करवाने की वजह से यह संभव है. फिल्म इस बारे में बात ही नहीं करती है. उस वक़्त की सबसे मजबूत पार्टी कांग्रेस और उसका अहम चेहरा रहे राजीव गांधी को भी कहानी से दूर ही रखा गया है.शायद किसी सरकार या किसी चेहरे पर महिमामंडन या राजनीति फिल्म नहीं करना चाहती हो लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी को फिल्म एक सीन में ही सही विपक्ष नेता के तौर पर सशक्त तरीके से दिखाती है.यह बात थोड़ी अखरती है. खास बात यह है कि मनोज बाजपेयी का किरदार पूर्व आरबीआई गवर्नर एस. वेंकिटारमनन के जीवन से प्रेरित है. जो राजीव गांधी के कार्यकाल 1985 से 1989 से फाइनेंस सेक्रेटरी थे. राजीव गांधी ने ही वेंकिटारमनन के नाम की गवर्नर के तौर पर सिफारिश की थी.कुलमिलाकर स्क्रीनप्ले में निष्पक्षता की कमी रह गयी है. जो इस फिल्म को कमजोर बना गया है.स्क्रीनप्ले प्रेडिक्टेबल भी है. ए रमन इतने बड़े अर्थशास्त्री है, लेकिन उन्हें यूरेका आईडिया उनकी पत्नी और प्यून से मिलता है. ऐसा अब तक कई फिल्मों में नज़र आ चुका है. फिल्म के ट्रीटमेंट पर आये तो पहला भाग स्लो रह गया है. सेकेंड हाफ में फिल्म रफ़्तार पकड़ती है. सोने को देश के बाहर भेजने वाला प्रसंग दिलचस्प बना है. फिल्म के सपोर्टिंग किरदारों पर थोड़ा और काम करने की जरुरत थी. जिस वजह से कहानी के सब प्लॉट्स यादगार नहीं बन पाए हैं. संवाद कहानी और किरदार को मजबूती देने के साथ साथ कई मौकों पर देशभक्ति का रंग भी भरते हैं. संगीत विषय के साथ न्याय करता है. सिनेमेटोग्राफी में 90 के दशक को बखूबी उकेरने की कोशिश हुई है.

मनोज बाजपेयी सहित सभी कलाकारों ने अपनी चमक बिखेरी

अभिनेता मनोज बाजपेयी इस फिल्म का चेहरा हैं। किरदारों में रच बस जाना उनकी खासियत रही है.इस फिल्म में भी उन्होंने अपने किरदार को अपने बॉडी लैंग्वेज , भाषा और एक्सप्रेशन के साथ बहुत ही मजूबती से निभाया है.अभिनेत्री मधु शाह को एक अरसे बाद स्क्रीन पर देखना सुखद है तो अदा शर्मा ने भी अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है.नौशाद, राजीव गौर सिंह सहित बाकी के कलाकारों ने भी अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है.