[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Entertainment Movie Review Bharat Bhhagya Viddhaata Review :कंगना के दमदार अभिनय से सजी यह प्रेरणादायी कहानी सिनेमैटिक तौर पर यादगार नहीं बन पायी

Bharat Bhhagya Viddhaata Review :कंगना के दमदार अभिनय से सजी यह प्रेरणादायी कहानी सिनेमैटिक तौर पर यादगार नहीं बन पायी

0
Bharat Bhhagya Viddhaata Review :कंगना के दमदार अभिनय से सजी यह प्रेरणादायी कहानी सिनेमैटिक तौर पर यादगार नहीं बन पायी
भारत भाग्य विधाता रिव्यू, फोटो- इंस्टाग्राम

फिल्म – भारत भाग्य विधाता
निर्माता -कंगना रनौत
निर्देशक -मनोज तापड़िया
कलाकार -कंगना रनौत , गिरिजा ओक,ईशा दे,रशिका अगाशे ,प्रसाद ओक और अन्य
प्लेटफार्म -सिनेमाघर
रेटिंग -ढाई

bharat bhhagya viddhaata review:भारतीय इतिहास की सबसे घातक आतंकी घटना में से एक 26 /11 की दिल दहला देने वाली घटना थी. उसी घटना पर कंगना रनौत की फिल्म भारत भाग्य विधाता की कहानी है. आतंक के बैकड्रॉप पर आधारित यह सच्ची कहानी बताती है कि हर कर्मचारी की अहमियत होती है. हर बार हीरोज हाथ में गन लिए नहीं आते हैं.फिल्म का मूल सन्देश प्रभावशाली है.कहानी रियल है लेकिन सिनेमैटिक तौर पर उतनी एंगेजिंग नहीं बन पायी है. जितनी जरुरत थी लेकिन प्रेणादायक कहानी और कंगना के परफॉरमेंस की वजह से यह फिल्म एक बार देखनी बनती है.

ये है कहानी

फिल्म में एक संवाद है , जब एक नर्स कहती है कि सभी न्यूज़ चैनल ताज, ट्राइडेंट और नरीमन हाउस पर हुए हमले की बात कर रहे हैं. कोई कामा अस्पताल पर हुए आतंकी हमले की बात नहीं कर रहा है.यह फिल्म उसी कामा अस्पताल में हुए आतंकी हमले की कहानी है.26 /11 पर अब तक कई फिल्में और वेब सीरीज बन चुकी हैं लेकिन कहानी की अहम धुरी मुंबई का पांच सितारा होटल ही रहा है.एक वेब सीरीज कामा के डॉक्टर्स के नज़रिये से कही गयी थी लेकिन यह फिल्म कामा अस्पताल में काम करने वाली नर्सेज के नज़रिये से कही गयी है.जिनका जिक्र लगभग ना के बराबर रहा लेकिन उन्होंने 26 नवंबर की रात में कामा में 300 से अधिक लोगों की जान बचाई थी.जब पूरे शहर में आतंकियों की वजह से भय और अराजकता का माहौल था.

फिल्म की खूबियां और खामियां

यह फिल्म उनलोगों को सैल्यूट करती है.जो लोग इम्पोर्टेन्ट नहीं होते हैं लेकिन उनका काम हमारे लिए बहुत इम्पोर्टेन्ट होता है.यह फिल्म सशक्त तरीके से रेखांकित करती है कि कई बार विपरीत परिस्थितयों में अपने काम पर डटे रहना ही असली हिम्मत और देशभक्ति होती है. फिल्म की कहानी और उससे जुड़ा इंटेंशन अच्छा है लेकिन परदे पर वह उस तरह से परिभाषित नहीं हो पायी है. पहला पार्ट धीमी रफ़्तार से आगे बढ़ता है, जिसमें अस्पताल और नर्सेज की रोज़मर्रा की गतिविधियों, उनके काम की अनदेखी, नर्सों के आपसी मेल-जोल और स्टाफ़ की निजी ज़िंदगी पर फ़ोकस किया गया है.जिससे कई बार कहानी खींची हुई जान पड़ती है और कई दृश्यों में दोहराव भी है.खासकर हर नर्स का परिवार जिस तरह से उनके काम की अनदेखी करता है.सेकेंड हाफ में एक्शन बढ़ता है और फिल्म से जुड़ाव भी बढ़ता है लेकिन परदे पर सिनेमैटिक तौर पर उतनी एंगेजिंग नहीं बन पायी है. जितनी जरुरत थी.फिल्म नर्सेज की कहानी है तो क्या डॉक्टर्स की अनदेखी जायज है. यह सवाल भी फिल्म देखते हुए आता है, जब सिर्फ मरीजों को बचाने की जद्दोजहद में नर्सेज ही नज़र आती हैं. तकनीकी तौर पर भी यह फिल्म अच्छी है.खासकर सिनेमेटोग्राफी की तारीफ करनी होगी. जिस तरह से अस्पताल के वार्ड ,अँधेरे गलियारों को कहानी में बखूबी जोड़ा गया है.वह फिल्म को रियलिटी के करीब ले जाता है. फिल्म के संवाद अच्छे बन पड़े हैं. गीत संगीत यादगार नहीं बन पाया है लेकिन बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के साथ न्याय करता है.

कंगना का अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत

अभिनय की बात करें तो कंगना रनौत का अभिनय इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है. पिछले कुछ समय से वह परदे पर लार्जर देन लाइफ किरदारों में नजर आयी हैं लेकिन इस फिल्म में वह एक आम महिला की तरह दिखी हैं. जिसमें अपने कर्तव्य को निभाने के लिए अदम्य साहस तो है लेकिन वह मुश्किल हालात में दर्द, बेचैनी के साथ आंसू भी बहाना नहीं भूलती है. छोटी छोटी बातों में मुस्कुराती भी है. कंगना को छोड़कर इस फिल्म की कास्टिंग में ज्यादातर मराठी अभिनेत्रियां हैं. गिरिजा ओक,ईशा दे,रशिका अगाशे और स्मिता ताम्बे ये अभिनेत्रियां अपने अभिनय से फिल्म को मजबूती देती हैं. इनके बीच की बॉन्डिंग भी खास बन पड़ी है. बाकी के किरदारों ने भी अपनी -अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है.


ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel