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Home Entertainment Maharani 4 Review:राजनीति का ये खेल एंगेजिंग लेकिन ड्रामा और सस्पेंस की कमी है खलती

Maharani 4 Review:राजनीति का ये खेल एंगेजिंग लेकिन ड्रामा और सस्पेंस की कमी है खलती

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Maharani 4 Review:राजनीति का ये खेल एंगेजिंग लेकिन ड्रामा और सस्पेंस की कमी है खलती
maharani 4 review

वेब सीरीज – महारानी 4
क्रिएटर – सुभाष कपूर
निर्देशक – पुनीत प्रकाश
कलाकार – हुमा कुरैशी,कनी कुश्रुति ,शार्दूल भारद्वाज,श्वेता बसु प्रसाद ,प्रमोद यादव,विनीत कुमार,विपिन शर्मा और अन्य
प्लेटफार्म -सोनी लिव
रेटिंग -ढाई

maharani 4 review :वेब सीरीज महारानी की चौथे सीजन के साथ वापसी हो गयी है.सियासी कहानियों के षड्यंत्र को पसंद करने वाले लोगों के लिए महारानी का यह नया सीजन एंगेजिंग है लेकिन यादगार नहीं बन पाया है. इस बार इस पॉलिटिकल थ्रिलर में उस तरह से ट्विस्ट एंड टर्न नहीं जोड़े गए हैं, जो आपको चौंका दें. मामला प्रेडिक्टबल रह गया है. हां कलाकारों का मजबूत साथ सीरीज को इस बार भी मिला है. जिससे यह सीरीज एक बार देखी जा सकती है.

राजनीतिक प्रतिद्वंदिता से प्रतिशोध तक पहुंचेगी कहानी

इस बार की कहानी बिहार के सत्ता पर आधारित ना रहकर दिल्ली पहुंच गयी है.प्रधानमंत्री सुधाकर जोशी (विपिन शर्मा ) अपनी गठबंधन की सत्ता बचाने के लिए रानी भारती(हुमा कुरैशी ) के सामने समर्थन का प्रस्ताव भेजते हैं,लेकिन बात कुछ ऐसे बिगड़ती है कि दोनों में जबरदस्त टकराव शुरू हो जाता है.रानी भारती को एक आयोग की रिपोर्ट में हत्या का दोषी बता दिया जाता है. सीबीआई की इन्क्वारी शुरू हो जाती है. रानी भारती ने अपने दुश्मनों से कभी भी हार नहीं मानी है तो क्या हुआ अगर इस बार उनके सामने प्रधानमंत्री है. रानी भारती ,सुधाकर जोशी को चुनौती देती हैं कि अब वह उनकी जगह लेगी. दिल्ली की सत्ता की बागडोर उनके हाथों में होंगी ,क्या रानी भारती प्रधानमंत्री बनेंगी या उन्हें टकराव की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. इन सवालों के जवाब आठ एपिसोड में दिखेंगे.

सीरीज की खूबियां और खामियां


महारानी का पहला सीजन साल 2021 में आया था. इन चार सालों में तीन सीजन दस्तक दे चुके हैं.महारानी एक पॉलिटिकल थ्रिलर है,जिसके बारे में यह बात कही जाती रही है कि देश की सियासत के ऐसे तमाम पहलू आज की पीढ़ी समझ सकती है,जिससे वह अनजान हैं. इस सीजन भी कुछ प्रसंग भारतीय राजनीति और राजनेताओं से प्रेरित है. इस नए सीजन में गठबंधन की उस राजनीति को दर्शाया गया है,जहां वफादारी कभी भी मौकापरस्ती में बदल सकती है. इसके साथ ही भारतीय राजनीति के गठबंधन में मोलभाव है. सत्तारूढ़ सरकार सीबीआई और आयकर विभाग का किस तरह से दुरूपयोग करती है और केंद्र सरकार और राज्य सरकार में तनातनी है, तो केंद्र से दिए जानेवाले वेलफेयर फंड्स भी रोक लिए जाते हैं.गठबंधन का जो चेहरा होता है.वह कभी प्राइम मिनिस्टर नहीं बनता है. इन सबको सीरीज में जोड़ा गया है.जो आपको एंगेज करके रखता है.गठबंधन की राजनीति पर फोकस है तो इस बार कहानी बिहार से निकलकर कश्मीर से कन्याकुमारी तक गयी है.पिछले सीजन की तरह उमाशंकर सिंह के लिखे संवाद एक बार फिर सीरीज की मजबूत कड़ी बनकर उभरे हैं. गीत संगीत पक्ष में इस बार भी बिहार की लोक परम्परा से निकले गीत इस सीरीज का हिस्सा बने हैं.जो सीरीज और किरदार को विश्वसनीय बनाते हैं.खामियों की बात करें तो सीरीज के शुरूआती चार एपिसोड एंगेजिंग है लेकिन पांचवें एपिसोड से सीरीज स्लो हो गयी है।सातवें एपिसोड से ट्रैक पर सीरीज आती है और आठवें एपिसोड में इस सीजन का फिनाले होने के साथ -साथ अगले सीजन के लिए प्रतिशोध का एक महामंच भी तैयार कर जाती है, जो दर्शकों में अगले सीजन के लिए उत्सुकता बढ़ाता है,लेकिन यह सीजन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है.इस सीजन राजनीतिक प्रतिद्वंदिता में उस तरह के ट्विस्ट एंड टर्न नहीं है, जो आपको चौंका दें. कहीं ना कहीं मामला दोहराव वाला हो गया है.मेकर्स को अगली बार सशक्त कहानी और स्क्रीनप्ले के साथ वापसी करनी होगी तभी वह इस पॉपुलर फ्रेंचाइजी के साथ पूरी तरह से न्याय कर पाएंगे

श्वेता और शार्दुल का अभिनय इस सीजन का बड़ा आकर्षण

रानी भारती के किरदार में एक बार फिर हुमा पूरी तरह से रची बसी नजर आयी है.नए चेहरे इस सीजन का आकर्षण रहे. शार्दुल भारद्वाज ने जय प्रकाश की भूमिका में अपने अभिनय से छाप छोड़ी है.श्वेता बासु प्रसाद की भी तारीफ बनती है. विपिन शर्मा भी पीएम की भूमिका में इम्प्रेस कर गए हैं. कनी ,प्रमोद पाठक, विनीत कुमार, मनु ऋषि राजेश्वरी सचदेव भी अपनी भूमिका में प्रभावी रहे है. इस सीजन अमित सियाल और दर्शील सफारी के किरदार को करने के लिए कुछ खास नहीं था. दर्शील की भूमिका अगले सीजन में अहम होने वाली है. यह तय है.

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