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Diana Penty:अपनी निजी जिंदगी को प्रोटेक्ट करके रखना चाहती हूं

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Diana Penty:अपनी निजी जिंदगी को प्रोटेक्ट करके रखना चाहती हूं
diana penty

diana penty :फिल्म ‘कॉकटेल’से हिंदी सिनेमा में कदम रखने वाली डायना पेंटी इस साल अपनी दो फिल्मों‘छावा’ व ‘आजाद’के लिए काफी तारीफें बटोर चुकी हैं. इन दिनों वह जी5 की फिल्म ‘डिटेक्टिव शेरदिल’को लेकर सुर्खियों में हैं. उर्मिला कोरी से इस खास बातचीत में उन्होंने अपनी इस नयी फिल्म, अब तक के करियर से जुड़े कई पहलुओं पर खुलकर बात की.

छावा, आजाद और अब डिटेक्टिव शेरदिल, एक के बाद एक फिल्मों की रिलीज को कैसे देखती हैं?

मैं बहुत खुश हूं. अक्सर लोग कहते हैं कि मैं ज्यादा काम नहीं करती हूं. मुझे लगता है कि यह साल सभी की शिकायतें दूर कर देगा. वैसे इस साल के अंत में मेरी एक वेब सीरीज आने वाली है, जिसके लिए मैं बहुत ही उत्साहित हूं. यह मेरा वेब सीरीज में डेब्यू होगा. इस साल मेरी एक फिल्म अमिताभ बच्चन के साथ भी रिलीज होने वाली है.

छावा इस साल की सबसे कामयाब फिल्मों में से है. उस फिल्म से जुड़ी सबसे खास क्या याद रही है?

मैं काफी समय से निर्देशक लक्ष्मण उत्तेकर सर के साथ काम करना चाहती थी. वह निर्देशक ही नहीं, बल्कि बहुत अच्छे इंसान भी हैं. मैंने अपने किरदार से जुड़ी तैयारी भी उनके साथ ही की थी. छावा एक पीरियड फिल्म थी. उसका कॉस्ट्यूम, मुगल प्रिन्सेस बनना, सब मेरे लिए बेहद खास था. मैं कभी इस तरह के कॉस्ट्यूम में पर्दे पर नजर नहीं आयी हूं.

डिटेक्टिव शेरदिल को हां कहने की वजह क्या थी?

कहानी और मेरा किरदार तो आकर्षक थे ही, साथ ही इस फिल्म से जुड़े निर्माता-निर्देशक, सीनियर एक्टर्स और मेरे को-एक्टर्स भी इसकी एक बड़ी वजह थे, जिसकी वजह से मैंने इस फिल्म के लिए हां कहा. मुझे लगता है कि अच्छी कहानी के साथ-साथ अच्छे लोगों के साथ काम करना जरूरी है. वैसे इस फिल्म की शूटिंग को हमने बहुत एन्जॉय किया. दिन का शूट खत्म हो जाने के बाद भी हम साथ में बुडापेस्ट में हैंगऑउट करते थे. 45 दिनों तक इस फिल्म की शूटिंग में हमारा यही शेड्यूल रहता था.

इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ हैं. उनके साथ काम करने का अनुभव कैसा था?

उनसे पहली बार मैं इस फिल्म के सेट पर मिली थी. वह बहुत ही कम बोलते हैं लेकिन उनकी खासियत है कि वह सभी के साथ बहुत तमीज और सम्मान से पेश आते हैं. वह अपने आसपास के सभी लोगों को सहज कर देते हैं.

अपने किरदार के लिए क्या कुछ होमवर्क भी करना पड़ा ?

अपने किरदार नताशा के लिए मुझे साइन लैंग्वेज सीखनी पड़ी. हमने कुछ वर्कशॉप की थी. हमारे टीचर सीतारामजी थे. उन्होंने हमें साइन लैंग्वेज सीखायी. हमने बेसिक लेवल वाला ही सीखा, जो डे टू डे लाइफ में बोला जाता है. इसके अलावा जो भी स्क्रिप्ट में था, हमने वो भी सीखा.

रियल लाइफ में आप में कितना डिटेक्टिव इंस्टिंक्ट हैं ?

सच कहूं तो बहुत है. मुझे शेरलॉक होम्स की डिटेक्टिव स्टोरी बहुत पसंद है. स्पाइ जॉनर वाली फिल्में बहुत पसंद हैं. मैं सवाल बहुत पूछती हूं. चीजों को ऑब्जर्व बहुत करती हूं. मैं हमेशा मजाक में कहती रहती हूं कि मैं पिछले जन्म में जरूर स्पाइ या सीक्रेट एजेंट थी.

इंडस्ट्री में आपने 13 साल पूरे कर लिए हैं. आपके हाइ और लो पॉइंट क्या रहे हैं ?

इस इंडस्ट्री में लो पॉइंट बहुत मिल जाते हैं. यहां काम करना आसान नहीं है. यहां बहुत प्रेशर रहता है. शूटिंग के बहुत लंबे घंटे रहते हैं. इसके अलावा आपका खुद का भी प्रेशर रहता है कि आपको बेस्ट करते रहना है. आपको अच्छे रोल करना है. इतना प्रेशर झेलते हुए कई बार आपको खुद की काबिलियत पर डाउट होने लगता है, तो ये सब लो पॉइंट हैं. हाइ पॉइंट की बात करूं तो सेट पर होना और काम करना मुझे पसंद है. जब लगातार काम करते हैं, फिर अचानक से कुछ महीनों के लिए घर पर बैठना पड़ता है, तो बुरा लगता है.कॉकटेल में काम करना, फिर रिलीज के बाद तारीफ पाना मेरा पहला सुपर हाइ पॉइंट था. मैंने अपनी पहली वेब सीरीज की शूटिंग पूरी कर ली है. मैं उसको भी हाइ पॉइंट कहूंगी.

आप अपनी निजी जिंदगी को हमेशा सीक्रेट रखती हैं. इसकी क्या वजह है ?

मैं बहुत ही प्राइवेट पर्सन हूं. मैं अपनी निजी जिंदगी के बारे में बात करना पसंद नहीं करती हूं. मुझे लगता है जो लोग या बातें मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं, उन्हें मुझे प्रोटेक्ट करके रखना चाहिए

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