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Home Entertainment Budget 2026: भारत में जंक फूड पर सख्ती की तैयारी, 6 बजे सुबह से 11 रात तक विज्ञापन बैन का प्रस्ताव

Budget 2026: भारत में जंक फूड पर सख्ती की तैयारी, 6 बजे सुबह से 11 रात तक विज्ञापन बैन का प्रस्ताव

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Budget 2026: भारत में जंक फूड पर सख्ती की तैयारी, 6 बजे सुबह से 11 रात तक विज्ञापन बैन का प्रस्ताव
बजट 2026, फोटो- इंस्टाग्राम

Budget 2026: आज केंद्र सरकार बजट पेश करने जा रही है. टैक्स, महंगाई और विकास के साथ-साथ इस बार लोगों की नजर सेहत से जुड़े फैसलों पर भी टिकी है. खासकर जंक फूड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाने को लेकर. बर्गर, पिज्जा, नूडल्स और सॉफ्ट ड्रिंक्स अब आम खाने का हिस्सा बन चुके हैं. इसका असर साफ दिख रहा है-लोगों का वजन बढ़ रहा है और बीमारियां भी. लोकसभा में पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे में सरकार ने साफ कहा है कि जंक फूड अब सिर्फ खाने का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य का संकट बन चुका है. इससे निपटने के लिए सरकार ने बड़ा कदम सुझाया है.

सुबह 6 से रात 11 बजे तक विज्ञापन बैन का प्रस्ताव

सर्वे के मुताबिक, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड यानी जंक फूड के विज्ञापनों पर सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक सभी मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगाई जानी चाहिए. खासतौर पर बच्चों को टारगेट करने वाले विज्ञापनों पर सख्ती होगी.

बच्चों और वयस्कों में मोटापे की चिंताजनक बढ़त

अत्यधिक वजन वाले पांच साल से कम उम्र के बच्चों की संख्या 2015–16 में 2.1% थी, जो 2019–21 में बढ़कर 3.4% हो गई. 2020 में 3.3 करोड़ बच्चे मोटापे से प्रभावित थे और अनुमान है कि 2035 तक यह आंकड़ा 8.3 करोड़ तक बढ़ जाएगा. वयस्कों में भी 24% महिलाएं और 23% पुरुष ओवरवेट हैं.

फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग और स्वास्थ्य चेतावनी का महत्व

सरकार ने यह भी सुझाया है कि उच्च फैट, शुगर और नमक वाले खाद्य पदार्थों परफ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग और स्वास्थ्य चेतावनी लागू की जाए. शिशु और टॉडलर दूध व पेय पदार्थों पर भी मार्केटिंग प्रतिबंध की सिफारिश की गई है.

अन्य देशों के उदाहरण: चिली, नॉर्वे और ब्रिटेन

चिली, नॉर्वे और ब्रिटेन पहले ही ऐसे कानून लागू कर चुके हैं. ब्रिटेन ने टीवी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर रात 9 बजे से पहले जंक फूड विज्ञापन पर रोक लगाई, जिससे बच्चों में मोटापे की समस्या कम हो सके.

भारत में विज्ञापन नियमों की अस्पष्टता और नीति अंतराल

भारत में विज्ञापन नियम अभी भी अस्पष्ट हैं. विज्ञापन कोड भ्रामक या अस्वस्थ विज्ञापनों पर रोक लगाता है, लेकिन भ्रामक की स्पष्ट परिभाषा नहीं है. इसी तरह CCPA के दिशानिर्देशों में स्पष्ट पोषण मानक नहीं हैं, जिससे कंपनियां अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के विज्ञापन में ढीली स्वास्थ्य या ऊर्जा संकेत दिखा सकती हैं.

जंक फूड बिक्री में उछाल और स्वास्थ्य पर असर

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की बिक्री 2009 से 2023 तक 150% बढ़ी. रिटेल बिक्री 2006 में $0.9 बिलियन से बढ़कर 2019 में लगभग $38 बिलियन हो गई. इसी अवधि में पुरुष और महिलाओं में मोटापा लगभग दोगुना हो गया.

उपभोक्ता व्यवहार बदलने के अलावा आवश्यक नीतिगत सुधार

सरकार का कहना है कि सिर्फ उपभोक्ता व्यवहार बदलने से समस्या नहीं सुलझेगी. इसके लिए खाद्य प्रणाली में नीतिगत सुधार, उत्पादन पर नियंत्रण और स्वास्थ्यवर्धक आहार को बढ़ावा देना जरूरी है.

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