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Home Entertainment Bollywood भूकंप के झटकों में ढही राज कपूर की हवेली, 100 साल पुरानी यादों का टूटा आशियाना

भूकंप के झटकों में ढही राज कपूर की हवेली, 100 साल पुरानी यादों का टूटा आशियाना

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भूकंप के झटकों में ढही राज कपूर की हवेली, 100 साल पुरानी यादों का टूटा आशियाना
दिग्गज एक्टर राज कपूर (File Photo)

Raj Kapoor Haveli : पाकिस्तान के पेशावर में राज कपूर की सदी पुरानी हवेली (100 साल पुरानी हवेली) का एक हिस्सा भारी बारिश और शुक्रवार (3 अप्रैल) रात आए भूकंप के कारण गिर गया. अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने इसकी पुष्टि की. खैबर पख्तूनख्वा में स्थित इस हवेली को 2016 में पाकिस्तान सरकार ने राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया था, इसलिए इसका ऐतिहासिक महत्व काफी ज्यादा है.

हवेली की एक दीवार गिर गई

खैबर पख्तूनख्वा हेरिटेज काउंसिल के सचिव शकील वहीदुल्लाह ने बताया कि भूकंप के झटकों के बाद हवेली की एक दीवार गिर गई, जिससे बाकी इमारत की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. उन्होंने ये भी कहा कि इस घटना में किसी के घायल या हताहत होने की कोई खबर नहीं है. वहीदुल्लाह ने पुरातत्व विभाग और प्रांतीय सरकार से तुरंत कदम उठाने की अपील की. उन्होंने कहा कि अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो इस ऐतिहासिक इमारत को भारी नुकसान हो सकता है.

क्यों खास है पेशावर की यह हवेली

पेशावर के किस्सा ख्वानी बाजार के बीचों-बीच स्थित कपूर हवेली पाकिस्तान के अहम ऐतिहासिक स्मारकों में गिनी जाती है, लेकिन लंबे समय से इसकी हालत काफी खराब है. यह मशहूर अभिनेता पृथ्वीराज कपूर का पैतृक घर है, जिन्हें कपूर परिवार में फिल्मों की शुरुआत करने वाला पहला सदस्य माना जाता है. इस हवेली को उनके पिता दीवान बशेश्वरनाथ कपूर ने 1918 से 1922 के बीच बनवाया था. यहीं पर राज कपूर और त्रिलोक कपूर का जन्म भी हुआ था.

शानदार वास्तुकला का बेहतरीन नमूना थी हवेली

अपने समय में ये हवेली शानदार वास्तुकला (Architecture) का बेहतरीन नमूना मानी जाती थी, जिसमें करीब 40 कमरे थे. बाहर की दीवारों पर खूबसूरत फूलों की डिजाइन और झरोखे बने थे. अब ये इमारत काफी जर्जर हो चुकी है, लेकिन आज भी इसकी पुरानी खूबसूरती झलकती है. इसी हवेली में राज कपूर के दो छोटे भाई-बहनों का जन्म हुआ था, जिनका 1931 में निधन हो गया था.

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राज कपूर के भाई शम्मी कपूर और शशि कपूर का जन्म भारत में हुआ था. इस इमारत में कपूर परिवार की शुरुआती पीढ़ियों का जीवन बीता, लेकिन विभाजन के बाद परिवार ने 1947 में इस इमारत को छोड़ दिया. कई अन्य परिवारों की तरह, राज कपूर भी विभाजन के बाद भारत आ गए. उनके बेटे ऋषि कपूर और रणधीर कपूर ने 1990 के दशक में इस जगह का दौरा किया था.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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