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Home Entertainment प्रभात खबर का गुरु सम्मान : बॉलीवुड अभिनेता आशुतोष राणा ने बांधा समां, कहा – अब अशुद्धि के लिए मैं शुद्ध होना चाहता हूं

प्रभात खबर का गुरु सम्मान : बॉलीवुड अभिनेता आशुतोष राणा ने बांधा समां, कहा – अब अशुद्धि के लिए मैं शुद्ध होना चाहता हूं

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प्रभात खबर का गुरु सम्मान : बॉलीवुड अभिनेता आशुतोष राणा ने बांधा समां, कहा – अब अशुद्धि के लिए मैं शुद्ध होना चाहता हूं

रांची : गुरु सम्मान समारोह दो खंडों में बंटा था. पहले खंड में रांची के विशिष्ट शिक्षकों को सम्मानित किया गया. वहीं दूसरे खंड में सम्मानित हुए शिक्षकों के समक्ष कविता पाठ करने साहित्यकार सह अभिनेता आशुतोष राणा पहुंचे. उन्होंने शिक्षकों को परमात्मा का स्वरूप बताते हुए अपने जीवन को गुरु की कृपा बताया.

साथ ही जीवन में गुरु को परम आदरपूर्ण स्थान देने को कहा. उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से न केवल शिक्षकों को प्रेरित किया, बल्कि पूरी सभा को अपनी ख्वाहिश और फरमाइश से सराबोर किया. लोगों को फरमाइश की जगह खुद की ख्वाहिश को साथ लेकर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.
जीवन को चाहिए हाई वोल्टेज
आशुतोष राणा ने जीवन के उतार-चढ़ाव में सशक्त रहने की प्रेरणा दी. उन्होंने जीवन को हाई वोल्टेज युक्त बनाने के लिए विशेष टिप्स दिये. हाई वोल्टेज युक्त जीवन बनाने के लिए कर्म, भाग्य और न्यूट्रल स्वभाव को थ्री पिन जैसा इस्तेमाल करने की बात कही. साथ ही पूरा करने के लिए गुरु, ईश्वर और मित्र को अपने हाई वोल्टेज का हिस्सा बनाने को कहा.
आचार और विचार को साथ लेकर चलें
काव्य पाठ से पूर्व आशुतोष राणा ने सार्थक जीवन के लिए आचार और विचार को समझने की बात कही. कहा कि मीडिया इसी से समाचार बनाती है. जिससे लोग न केवल समाज में अपनी पहचान बना सकते हैं, साथ ही दूसरों को भी प्रेरित कर सकते हैं.
कविता पेश की
अब अशुद्धि के लिए मैं शुद्ध होना चाहता हूं,/ अबुद्धि के लिए बुद्ध होना चाहता हूं. / चाहता हूं इस जगत में शांति चारों ओर हो,/ और इस जगत के भिन्न, पर मैं क्रूद्ध होना चाहता हूं……..
फरमाइश की पूरी
काव्य पाठ के बाद आशुतोष राणा ने लोगों की इच्छा की भी पूर्ति की. उन्होंने सभा के दौरान अपनी चर्चित काव्य रचना – ‘हे भारत के राम जगो’ भी पेश किया…
हे भारत के राम जगो, मैं तुम्हें जगाने आया हूं,
सौ धर्मों का धर्म एक, बलिदान बताने आया हूं.
सुनो हिमालय कैद हुआ है, दुश्मन की जंजीरों में
आज बता दो कितना पानी है भारत के वीरों में,
खड़ी शत्रु की फौज द्वार पर, आज तुम्हें ललकार रही
सोये सिंह जगो भारत के
माता तुम्हें पुकार रही.
रण की भेरी बज रही, उठो मोह निद्रा त्यागो.
पहला शीष चढ़ाने वाले, मां के वीर पुत्र जागो.
बलिदानों के वज्रदंड पर
देशभक्त की ध्वजा जगे
और रण के कंकण पहने हैं
वो राष्ट्रभक्त की भुजा जगे.
कलियुग और महामौन…
आशुतोष राणा ने अपने काव्य संग्रह में से विभिन्न युगों के दानव में से कलियुग को सबसे विकराल बताया. कहा कि यही कारण है कि कली जैसे दानव के नाम पर युग जोड़ा गया है. उन्होंने अपने काव्य पाठ में कलियुग और परम ब्रह्म के बीच हुई वार्ता को मंच से साझा किया. जिसमें कली खुद को परम ब्रह्म के समक्ष बड़ा और बलवान बताने की कोशिश कर रहे हैं.
कली परम ब्रह्म से कह रहे हैं कि उनके बस का कुछ भी नहीं है. समय के साथ परम ब्रह्म को माननेवाले ही उनसे विमुख होकर खड़े हैं. कली की बात सुनने के बात परम ब्रह्म अपने महा मौन का मुखर घोष करते हैं. क्योंकि महा मौन की लाठी में मार है, पर आवाज नहीं. परम ब्रह्म, जिसने कलियुग में कलकी का रूप धारण किया है, लोगों को सही राह दिखायेंगे.
आशुतोष राणा. अभिनेता, वक्ता, संवेदनशील लेखक और कवि. आशुतोष राणा का जन्म मध्यप्रदेश के एक छोटे से गांव गाडरवाडा (सिटी ऑफ ओशो) में हुआ. फिल्म दुश्मन में साइको किलर के रूप अपनी पहचान बनानेवाले आशुतोष ने संघर्ष में लज्जा शंकर पांडेय की भूमिका निभाने के बाद खुद को फिल्म जगत में स्थापित कर लिया.
आशुतोष का यह सफर अपने गांव की रामायण मंडली से होते हुए एनएसडी पहुंचा. फिर वहां से मायानगरी मुंबई. यहीं 1995 में पहली बार टेलीफिल्म स्वाभिमान में अभिनय करने का मौका मिला.
आशुतोष अब तक सात भाषाओं में अभिनय क्षमता दिखा चुके हैं. खलनायक कैटेगरी में दो बार फिल्म फेयर अवार्ड ले चुके आशुतोष की जीवनसंगिनी रेणुका शहाणे भी जानी-मानी अभिनेत्री हैं. आशुतोष राणा शनिवार को प्रभात खबर गुरु सम्मान समारोह में शामिल होने के लिए रांची में थे.
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