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Home Entertainment कैलाश खेर के सुर से सुगंधित हुआ जमशेदपुर का साकची गुरुद्वारा- मैं तो तेरे प्यार में दीवाना हो गया…

कैलाश खेर के सुर से सुगंधित हुआ जमशेदपुर का साकची गुरुद्वारा- मैं तो तेरे प्यार में दीवाना हो गया…

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कैलाश खेर के सुर से सुगंधित हुआ जमशेदपुर का साकची गुरुद्वारा- मैं तो तेरे प्यार में दीवाना हो गया…

कन्हैया लाल सिंह

जमशेदपुर : मंच से कैलाश खेर के सुर साकची गुरुद्वारा और कालीमाटी रोड में चारों तरफ खुशबू फैला रहे थे. पंडाल के अंदर और बाहर भी वही खुशबू. सामने बाबा बर्फानी का साक्षात दर्शन हो रहा था. मौका था हर हर महादेव संघ के अठारहवें वार्षिक भजन संध्या का. सावन की अंतिम सोमवारी पर भोलेनाथ जैसे सभी पर कृपा कर रहे थे. दिनभर रिमझिम बारिश होती रही, लेकिन शाम में बारिश पूरी तरह से थम गयी. इस कारण श्रोताओं ने कैलाश खेर के एक-एक सुर का आनंद उठाया. पंडाल अंदर भी और पंडाल के बाहर भी.
देर आये, दुरुस्त आये
श्रोताओं का शुक्रिया कि उन्होंने कैलाश का काफी देर तक इंतजार किया. कैलाश खेर रात्रि करीब साढ़े दस बजे मंच से श्रोताओं से रू-ब-रू हो सके. वे देर से जरूर आये, लेकिन दुरुस्त आये. आते ही महफिल में जान फूंक दी. भोले बाबा की तरह गूंथे लंबे बाल, पीला कुर्ते, काली बंडी और गले में काला साफा. कुछ इस अंदाज में वे आये. और पंजाबी सूफी, जाना जोगी के नाल दी … से संगीत का सफर शुरू हुआ.
नटराज अंदाज में नाच रहे थे
मंच पर कैलाश कभी गोल-गोल घूम रहे थे तो कभी एक टांग पर नटराज के अंदाज में नाच रहे थे. ताली के जरिये श्रोताओं का भी उन्हें खूब साथ मिला. दूसरा गीता शुरू हुआ, मैं तो तेरे प्यार में दीवाना हो गया. सचमुच श्रोताओं से मिलने के लिए वे दीवाना हो गये थे. तभी तो पौने ग्यारह बजे के बाद श्रोता जब सीट छोड़ने लगे तो उन्हें बिहारी स्टाइल में रोका, अाप सभी पसीने में डूबे जा रहे हैं. अभी कार्यक्रम शुरू नहीं हुआ है. यह तो ट्रेलर था. भला उनकी बात पर श्रोता कैसे नहीं रुकते. आमंत्रण के अंदाज में शुरू हो गया गीत, आवो जी आवो जी आवो जी/ अजी चतुर सुजान, काहे भरमाये जी.
कैलाश के आते ही उठने लगी सेल्फी
जब तक कैलाश नहीं आ रहे थे श्रोता अधीर हुए जा रहे थे. मंच के सामने से कोई अतिथि आता तो कैलाश-कैलाश की शाेर उठने लगता. कहते हैं कि अधीर होने का भी अपना मजा है. कई श्रोता इसे भी एंज्वॉय कर रहे थे. अतिथि के आने के लिए बनी गैलरी की दोनों तरफ सेल्फी के लिए फोन उठने लगते थे. मानो कैलाश आये कि सेल्फी चली. हुआ भी ऐसा ही. जैसे ही श्रोताओं के प्यारे कलाकार आये, सेल्फ चलने लगी. जिसके भाग्य में लिखा था, कैलाश सेल्फी में कैद होते चले गये.
फुटपाथ से शुरू हुआ था संघ
हर हर महादेव संघ के संस्थापक अध्यक्ष अमरप्रीत सिंह काले ने कहा कि संघ का सफर अठारह वर्ष पहले काली माटी रोड फुटपाथ से शुरू हुआ था. ध्येय था विश्व कल्याण. जमशेदपुर वासियों के सहयोग से संघ फुटपाथ से वाटरप्रूफ पंडाल में आ गया. उन्होंने कहा कि सभी कह रहे थे कि कैलाश खेर आ रहे हैं इसलिए गुरुद्वारा मैदान में जगह कम पड़ जायेगी. लोगों ने गोपाल मैदान में आयोजन करने की सलाह दी. लेकिन गुरुद्वारा संघ का प्यार वहां कहां मिलने वाला था. उनके प्यार से बांध लिया और आयोजन गुरुद्वारा में ही करने का फैसला लिया गया.
अभिषेक व रचित का दिखा जलवा
इससे पहले कैलाश खेर के एक बैंड एआर डिवाइन के कलाकारों ने श्रोताओं को खूब झुमाया. बैंड के कलाकार और धनबाद निवासी अभिषेक और रचित अग्रवाल ने संगीत में फ्यूजन डालकर लोगों का मनोरंजन किया. गिटार पर दो, ड्रम पर दो, की बोर्ड पर एक कलाकार और बीच में अभिषेक और रचित. नैना ठग लेंगे गाकर उन्होंने श्रोताओं में जोश भर दिया. दोनों ने कैलाश खेर के लिखे गीत भी गाये. हनुमान चालीसा गाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया. इससे पहले स्थानीय कलाकार कृष्णमूर्ति श्रोताओं के सामाने थे. उन्होंने शंकर दानी के कई भजन गाकर श्रोताओं के दिलों में जगह बनायी. इस बीच टी बाबू राव की बेटी जयश्री और भावना ने पिता को सुरों की श्रद्धांजलि दी.
जो कहूंगा पार्लियामेंट में कहूंगा
केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि जब जो कहूंगा पार्लियामेंट में कहूंगा. सावन की अंतिम सोमवारी सभी के जीवन में खुशियां लाये. 370 धारा खत्म होने के बाद सभी को अमरनाथ यात्रा करने का मौका मिले. सांसद पशुपतिनाथ सिंह ने कहा कि हर हर महादेव संघ की ओर से अठारह वर्षों से आयोजन हो रहा है. हर वर्ष यहां आने का मौका मिलता है. खाद्य अापूर्ति मंत्री सरयू राय ने कहा कि अठारह वर्ष हो गये. यानी संघ अब वयस्क हो गया है. हर साल यहां बड़े कलाकार आये और जमशेदपुर की धरती को कृतार्थ किया. अवार्ड पाने के बाद डॉ अमिताभ बंदोपाध्याय ने कहा कि अवार्ड लेने के बाद जोश भर गया है. कल से और दम लगाकर काम करूंगा.
शॉल ओढ़ाकर किया सम्मानित
मौके पर गुरचरण सिंह, रविंदर सिंह मंटू, इंदरजीत सिंह, सरदार शैलेंद्र सिंह, लक्ष्मण टूडू, राजेश शुक्ला, अजय सिंह, मोहन कर्मकार, चंद्रगुप्त सिंह, आलोक पाठक, महेंद्र, शिवाजी, राधेश्याम अग्रवाल, प्रवीण सिंह, शेखर डे, शंभुनाथ सिंह, गुरुमुख सिंह मुखे, गुरमीत सिंह तोते, बीके सतपति, चंद्रेश्वर खां, विजय खां, शिवशंकर सिंह, राकेश्वर सिंह व अन्य को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम को सफल बनाने में संघ के वर्तमान अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सहित संघ के सभी सदस्यों का योगदान रहा.
दो लोगों को मिला संघ रत्न अवार्ड
इससे पहले अमिताभ बंद्योपाध्याय और टी बाबू राव (मरणोपरांत) को लाइफ अचीवमेंट अवार्ड संघ रत्न सेवा अवार्ड दिया गया. बाबू राव का सम्मान उनकी दोनों बेटियों ने लिया. मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, धनबाद के सांसद पशुपतिनाथ सिंह और मंत्री सरयू राय ने दोनों को स्मृति चिह्न और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया.
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