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Home Election Lok Sabha Election 2024 Puri Lok Sabha Election Result 2024: संबित पात्रा बीजेडी के अरुप पटनायक से आगे

Puri Lok Sabha Election Result 2024: संबित पात्रा बीजेडी के अरुप पटनायक से आगे

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Puri Lok Sabha Election Result 2024: संबित पात्रा बीजेडी के अरुप पटनायक से आगे

Puri Lok Sabha Election Result 2024 : पुरी लोकसभा क्षेत्र से शुरुआती रुझानों में बीजेपी के नेता संबित पात्रा आगे चल रहे हैं, इस सीट से उनके सामने पूर्व आईपीएएस अरूप पटनायक चुनावी मैदान में हैं. 2019 के चुनाव में संबित पात्रा को बीजेपी के पिनाकी मिश्रा ने शिकस्त दी थी.

धार्मिक नगरी है पुरी

ओडिशा का पुरी शहर भगवान जगन्नाथ की वजह से लोगों की आस्था का केंद्र है. यही वजह है कि पुरी लोकसभा सीट पर लोगों का ध्यान हमेशा से रहता है. इस बार इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला होता नजर आ रहा है. बीजेपी ने संबित पात्रा को दोबारा इस सीट से चुनावी मैदान में उतारा है, जबकि बीजेडी ने आईपीएस अरूप पटनायक को चुनावी मैदान में उतारा है और कांग्रेस के उम्मीदवार हैं जय नारायण पटनायक. जय नारायण को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार तब घोषित किया है, जब यहां से कांग्रेस प्रत्याशी सुचारिता मोहंती ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया. सुचारिता का कहना था कि उनके पास फंड की कमी है, जिसकी वजह से वे उन पार्टियों का मुकाबला नहीं कर पाएंगी जिनके पास सत्ता हैं. ,

पुरी लोकसभा सीट का इतिहास

पुरी लोकसभा सीट पर 1998 से बीजेडी का कब्जा है, इस लिहाज से इसे उनका गढ़ कहा जा सकता है. पिछले 26 साल से यहां उनका एकछत्र राज्य रहा है. इससे पहले यहां 1996 में पिनाकी मिश्रा सांसद चुने गए थे. 1989 और 1991 के चुनाव में यहां से जनता दल के उम्मीदवार नीलमणि राउतराय और ब्रिज किशोर त्रिपाठी चुनाव जीत चुके थे. 1980 और 1984 में यहां से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार ब्रजमोहन मोहांती चुनाव जीते थे. इसके अलावा 1952, 1962 और 1971 में भी यहां से कांग्रेस के प्रत्याशी चुनाव जीत चुके हैं. गौर करने वाली बात यह है कि 1957 में यहां से कम्युनिस्ट पार्टी के नेता चिंतामणि पाणिग्रही चुनाव जीते थे.

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सात विधानसभाएं हैं

पुरी लोकसभा सीट के अंतर्गत सात विधानसभाएं आती हैं. जिनके नाम हैं-ब्रह्मगिरि, सत्यबादी, पिपिली, चिल्का, राणपुर और नयागढ़. इन सात विधानसभा सीट में से मात्र दो पर बीजेपी के विधायक हैं, बाकी पर बीजेडी का प्रभाव है. पुरी की 83 प्रतिशत आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है, मात्र 17 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्र में है. यहां के बहुसंख्यक वोटर हिंदू हैं और उनमें अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 15 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति की लगभग दो प्रतिशत है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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