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Home Election Lok Sabha Election 2024 Omar Abdullah Baramulla Seat Result 2024: बारामूला सीट नहीं बचा पाए उमर अब्दुल्ला, निर्दलीय प्रत्याशी से हारे

Omar Abdullah Baramulla Seat Result 2024: बारामूला सीट नहीं बचा पाए उमर अब्दुल्ला, निर्दलीय प्रत्याशी से हारे

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Omar Abdullah Baramulla Seat Result 2024: बारामूला सीट नहीं बचा पाए उमर अब्दुल्ला, निर्दलीय प्रत्याशी से हारे

Omar Abdullah Baramulla Seat Result 2024: नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपनी परंपरागत सीट बारामूला को नहीं बचा पाए. वे निर्दलीय उम्मीदवार अब्दुल रशीद शेख के हाथों चुनाव हार गए हैं. निर्वाचन आयोग की वेबसाइट के अनुसार, उमर अब्दुल्ला को 1,56,905 वोट से ही संतोष करना पड़ा, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी अब्दुल रशीद शेख को 2,91,610 वोट मिले. इस सीट से नोटा को 3,036 वोट मिले.

बताते चलें कि जम्मू-कश्मीर के बारामूला से लोकसभा चुनाव लड़ने वाले उमर अब्दुल्ला डॉ फारूख अब्दुल्ला के बेटे हैं. उन्होंने सबसे कम उम्र में केंद्रीय मंत्री बनने का दर्जा हासिल किया. इसके बाद वे जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष भी बने. 4 जून को मतगणना के शुरुआती रुझान में उमर अब्दुल्ला आगे चल रहे हैं.

उमर अब्दुल्ला का परिचय

उमर अब्दुल्ला भारत के राजनीतिज्ञ हैं, जिन्होंने 2009 से पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया. 5 जनवरी 2009 को कांग्रेस के साथ गठबंधन में सरकार बनाने के बाद वह जम्मू-कश्मीर राज्य के 11वें और सबसे युवा मुख्यमंत्री और सबसे कम उम्र के लोकसभा सदस्य बने. वह पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बडगाम जिले के बीरवाह निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा के सदस्य के तौर पर विपक्ष के अंतिम नेता थे. 6 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटा दिए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर राज्य का अस्तित्व समाप्त हो गया. 6 फरवरी 2020 को भारत सरकार ने उन पर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत मामला दर्ज किया, जिसे 24 मार्च 2020 को रद्द कर दिया गया.

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में विदेश राज्य मंत्री बने

उमर अब्दुल्ला 14वीं लोकसभा के सदस्य थे, जो भारत के जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे. वह 23 जुलाई 2001 से 23 दिसंबर 2002 तक अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री थे. उन्होंने पार्टी के काम पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अक्टूबर 2002 में एनडीए सरकार से इस्तीफा दे दिया. उमर अब्दुल्ला 1998 में लोकसभा सदस्य के रूप में राजनीति में शामिल हुए. यह उपलब्धि उन्होंने बाद के तीन चुनावों में दोहराई और केंद्रीय मंत्री भी बने रहे. उन्होंने 2002 में अपने पिता से नेशनल कॉन्फ्रेंस की कमान संभाली. हालांकि, 2002 के राज्य विधानसभा चुनावों के दौरान गांदरबल की अपनी सीट से चुनाव हार गए और इसी तरह उनकी पार्टी को भी राजनीतिक जनादेश मिला. चार साल बाद उन्होंने एक बार फिर उसी सीट से चुनाव लड़ा और 2008 के कश्मीर राज्य चुनाव में जीत हासिल की.

उमर अब्दुल्ला का परिचय

उमर अब्दुल्ला का जन्म 10 मार्च 1970 को ब्रिटेन के रोचफोर्ड में हुआ था. वह शेख अब्दुल्ला के पोते और चिकित्सक फारूख अब्दुल्ला के इकलौते बेटे हैं. उमर अब्दुल्ला के दादा और पिता भी जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे. उनकी मां मोली एक अंग्रेज महिला थीं और पेशे से एक नर्स हैं. वह राजनीति में शामिल होने के पक्ष में नहीं थीं. उन्होंने श्रीनगर के सोनवार बाग स्थित बर्न हॉल स्कूल और फिर लॉरेंस स्कूल, सनावर में पढ़ाई की. सिडेनहैम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स से बी. कॉम स्नातक की पढ़ाई पूरी की. राजनीति में प्रवेश करने से पहले वह 29 वर्ष की उम्र तक आईटीसी लिमिटेड और द ओबेरॉय ग्रुप में कार्यरत थे. उन्होंने स्ट्रेथक्लाइड विश्वविद्यालय से एमबीए की पढ़ाई शुरू की. हालांकि, लोकसभा के लिए चुने जाने के कारण उन्होंने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी. उन्होंने दिल्ली की पायल नाथ से शादी की. वह एक सेवानिवृत्त सेना अधिकारी राम नाथ की बेटी हैं. सितंबर 2011 में उमर ने पत्नी अलग हो गए. उनकी छोटी बहन सारा की शादी राजेश पायलट के बेटे सचिन पायलट से हुई थी.

राजनीतिक कैरियर

1998 में 28 साल की उम्र में उमर अब्दुल्ला 12वीं लोकसभा के लिए चुने गए और सबसे कम उम्र के सदस्य बने. 1998-99 में वह परिवहन और पर्यटन समिति और पर्यटन मंत्रालय की सलाहकार समिति दोनों के सदस्य थे. 1999 में, वह 13वीं लोकसभा के लिए दोबारा चुने गए. 13 अक्टूबर 1999 को उन्होंने केंद्रीय राज्य, वाणिज्य और उद्योग मंत्री के रूप में शपथ ली. 22 जुलाई 2001 को वह सबसे कम उम्र के केंद्रीय मंत्री बने, जब उन्हें केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री बनाया गया. पार्टी के काम पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उन्होंने 23 दिसंबर 2002 को पद से इस्तीफा दे दिया.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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