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Home Election Lok Sabha Election 2024 Lok Sabha Election 2024 : सैम पित्रोदा के बयान पर फिर मचा बवाल, पीएम मोदी ने कहा- भारतीयों को चमड़ी के रंग से बांटना चाहती है कांग्रेस

Lok Sabha Election 2024 : सैम पित्रोदा के बयान पर फिर मचा बवाल, पीएम मोदी ने कहा- भारतीयों को चमड़ी के रंग से बांटना चाहती है कांग्रेस

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Lok Sabha Election 2024 : सैम पित्रोदा के बयान पर फिर मचा बवाल, पीएम मोदी ने कहा- भारतीयों को चमड़ी के रंग से बांटना चाहती है कांग्रेस
Sam Pitroda

Lok Sabha Election 2024 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कांग्रेस के ओवरसीज अध्यक्ष सैम पित्रोदा के बयान को लेकर कांग्रेस को निशाने पर लिया. तेलंगाना के वारंगल में एक रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस देशवासियों में चमड़ी के रंग को लेकर भेदभाव करती है, यही वजह है कि वे द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाने का विरोध कर रहे थे. पहले मैं समझ नहीं पाता था कि कांग्रेस ऐसा क्यों कर रही है, फिर आज पता चला कि शहजादे के एक अंकल जो अमेरिका में रहते हैं वे ये कहते हैं कि काली चमड़ी के भारतीय अफ्रीकन जैसे लगते हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सोच देश को बांटने वाली है.

दक्षिण के लोग अफ्रीकन लगते हैं : सैम पित्रोदा

गौरतलब है कि सैम पित्रोदा का एक बयान सामने आया है, जिसने देश में एक बार फिर विवाद खड़ा कर दिया है. दरअसल सैम पित्रोदा ने कहा है कि भारत के दक्षिण के लोग अफ्रीकन लगते हैं, तो नाॅर्थ ईस्ट के लोगों की तुलना उन्होंने चीनियों से की है. सैम पित्रोदा के इस बयान की बीजेपी ने भरपूर आलोचना की है और इसे रंगभेद से जुड़ा बताते हुए इस विभाजनकारी बताया है. दरअसल सैम पित्रोदा ने द स्टेट्समैन के साथ बातचीत में देश की विविधता पर बात की और कहा कि भारत में अलग-अलग संस्कृति और शक्ल-सूरत के लोग रहते हैं, जैसे पूर्व में लोग चीनी की तरह दिखते हैं, पश्चिम के लोग अरब जैसे दिखते हैं, उत्तर में लोग गोरे जैसे दिखते हैं और दक्षिण में लोग अफ्रीकियों जैसे दिखते हैं. सैम पित्रोदा ने कहा था इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है.

हिमंत बिस्वा सरमा ने दी तीखी प्रतिक्रिया

सैम पित्रोदा के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि वह उत्तर पूर्व से हैं लेकिन बिलकुल भारतीय लगते हैं. हिमंत ने एक्स पर पोस्ट लिखा है कि मैं उत्तर पूर्व से हूं लेकिन बिलकुल भारतीय लगता हूं. आप भारत की विविधता से सीखिए. वहीं बीजेपी नेता रविशंकर ने कहा कि सैम पित्रोदा राहुल गांधी के सलाहकार हैं, लेकिन वे देश को समझते ही नहीं है. वे एक असफल सलाहकार है. गौरतलब है कि सैम पित्रोदा ने पिछले दिनों एक बयान दिया था कि भारत में विरासत टैक्स लगाया जाना चाहिए, जिसपर खूब विवाद हुआ था और प्रधानमंत्री ने कहा था कि कांग्रेस आम भारतीयों की संपत्ति छीनकर मुसलमानों के बीच बांटना चाहती है. पीएम मोदी ने अपने कई रैली में कहा कि कांग्रेस माता-पिता से प्राप्त संपत्ति पर भी टैक्स लगाना चाहती है.

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कांग्रेस ने दी सफाई

राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने कहा है कि कांग्रेस को यह विचार करना चाहिए कि चुनाव के इस माहौल में सैम पित्रोदा को बयान देना चाहिए या नहीं. वे अक्सर इस तरह के बयान देते हैं जो मीडिया में सुर्खियां बनती हैं और विवाद खड़ा होता है. पित्रोदा के बयान से चुनाव लड़कर रहे प्रत्याशी को नुकसान होता है. वहीं आप नेता संजय सिंह ने कहा कि सैम पित्रोदा के बयान का इंडिया गठबंधन का कोई भी व्यक्ति समर्थन नहीं करता है. वहीं कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सैम पित्रोदा के बयान पर सफाई देते हुए कहा कि यह बयान दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य है, पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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