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Home Education success-story GF ने तोड़ा दिल, सिपाही से अफसर बने आशीष शुक्ला, एक प्रेरणा और बदल गई किस्मत

GF ने तोड़ा दिल, सिपाही से अफसर बने आशीष शुक्ला, एक प्रेरणा और बदल गई किस्मत

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GF ने तोड़ा दिल, सिपाही से अफसर बने आशीष शुक्ला, एक प्रेरणा और बदल गई किस्मत
आशीष शुक्ला

Success Story: कई बार जिंदगी में मिलने वाली असफलताएं ही सफलता की सबसे बड़ी वजह बन जाती हैं. उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के पद पर कार्यरत रहे आशीष शुक्ला की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. प्रेम में असफलता, पिता की बीमारी, आर्थिक तंगी और पुलिस में सिपाही की नौकरी के बीच आशीष ने UPPCS में सफलता हासिल कर ली.

पिता के किताबों से मिली प्रेरणा

आशीष ने एक इंटरव्यू में बताया था कि पिता भी पढ़ना चाहते थे लेकिन आर्थिक तंगी और घर की जिम्मेदारी के कारण वे अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए. लेकिन उन्हें किताब पढ़ने का शौक था. ऐसे में उनकी किताबों ने मुझे ज्ञान हासिल करने के लिए प्रेरित किया.

बचपन से मंच पर बोलने का शौक, लेकिन बन गए सिपाही

आशीष बताते हैं कि स्कूल के दिनों में वे मंच पर बोलने वाले बच्चों में गिने जाते थे. उन्हें हमेशा लगता था कि वे किसी बड़े पद के लिए बने हैं. हालांकि परिस्थितियां ऐसी बनीं कि वे उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही बन गए. वे कहते हैं, “पुलिस की नौकरी मिल गई, लेकिन मन को सुकून नहीं था. नौकरी में सिर्फ ‘Yes Sir’ और ‘No Sir’ तक सीमित होकर रह गया था.”

BHU से ग्रेजुएशन, फिर सिपाही भर्ती का कॉल

सिपाही बनने से पहले एक दोस्त ने उन्हें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में दाखिला लेने की सलाह दी. आशीष ने वहां से ग्रेजुएशन की पढ़ाई शुरू की. तीन साल की पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें सिपाही भर्ती के लिए कॉल लेटर मिला और उन्होंने नौकरी ज्वॉइन कर ली.

नौकरी के बाद एक साल तक घरवालों को कर दिया था ब्लॉक

पुलिस की नौकरी शुरू होने के बाद आशीष काफी डरे हुए रहते थे. उन्हें लगता था कि वे इस जिम्मेदारी को कैसे निभा पाएंगे. नौकरी के शुरुआती दिनों में शर्म और डर के कारण उन्होंने लगभग एक साल तक अपने परिवार को व्हाट्सएप पर ब्लॉक कर रखा था. उन्हें लगता था कि वे जिस मुकाम का सपना देखते थे, वहां तक नहीं पहुंच पाए हैं.

दोस्तों ने दिया साथ, किताबों ने बढ़ाया हौसला

कानपुर में तैनाती के दौरान पुलिस की व्यस्त ड्यूटी के बीच पढ़ाई करना आसान नहीं था. लेकिन वहां मिले दोस्तों ने उन्हें लगातार प्रेरित किया. वे अपनी सैलरी से बचाए हुए पैसे से साहित्य और कविताओं की किताबें खरीदते थे. आशीष मानते हैं कि किताबों ने उनके व्यक्तित्व और सोच को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई.

प्रेम में भी मिले धोखे, फिर भी नहीं छोड़ा सपना

आशीष के जीवन में प्रेम भी आया, लेकिन वह रिश्ता सफल नहीं हो सका. इस असफलता ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था. 2023 की UPPCS Prelims परीक्षा के दौरान उनका परीक्षा केंद्र वाराणसी में था. परीक्षा से पहले वे काशी विश्वनाथ मंदिर गए और भगवान से प्रार्थना की. उन्हें लग रहा था कि वे प्रेम में तो असफल रहे गए कम-से-कम परीक्षा में तो पास हो जाएं.

पिता की बीमारी के बीच जारी रखी तैयारी

2024 में जब प्रीलिम्स परीक्षा का रिजल्ट आया तो मुख्य परीक्षा के लिए बहुत कम समय बचा था. इसी दौरान उनके पिता गंभीर रूप से बीमार पड़ गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. एक तरफ पिता की चिंता थी, दूसरी तरफ मेन्स परीक्षा की तैयारी. लेकिन आशीष ने दोनों जिम्मेदारियों को साथ लेकर चलने की कोशिश की और अपने लक्ष्य से नजर नहीं हटाई.

सात साल के संघर्ष के बाद मिली सफलता

करीब सात वर्षों तक पुलिस की नौकरी और पढ़ाई को साथ लेकर चलने के बाद आखिरकार आशीष शुक्ला ने UPPCS परीक्षा में सफलता हासिल कर ली. उन्होंने UPPCS में 41 रैंक के साथ सफलता हासिल की. लिए यह सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि अपने पिता के सपनों और वर्षों की मेहनत को सम्मान देने का अवसर था.

आगे बढ़ते रहें और सीखते रहें

आशीष ने अन्य सरकारी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं को किताब पढ़ने की सलाह दी. कई लोग साथ छोड़ देंगे, कई बार आप टूटेंगे भी. लेकिन अगर आप सीखते रहेंगे और खुद को प्रेरित करते रहेंगे तो कोई भी मुश्किल आपको मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती.”

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शाम्भवी शिवानी डिजिटल मीडिया में पिछले 3 सालों से सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शिक्षा और रोजगार से जुड़ी खबरों की समझ रखने वाली शाम्भवी एग्जाम, सरकारी नौकरी, रिजल्ट, करियर, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी जैसे विषयों पर रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग करती हैं. सरल भाषा और जानकारी को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है. डिजिटल मीडिया में अपने करियर के दौरान शाम्भवी ने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है. यहां उन्होंने एजुकेशन, युवा मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर कंटेंट तैयार किया. वर्तमान में प्रभात खबर के साथ जुड़कर वे खास तौर पर बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, सरकारी नौकरी, करियर ऑप्शंस और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज पर काम कर रही हैं. शाम्भवी की रुचि सिर्फ पत्रकारिता तक सीमित नहीं है. उन्हें सिनेमा और साहित्य में भी गहरी दिलचस्पी है, जिसका असर उनकी लेखन शैली में भी देखने को मिलता है. वे तथ्यों के साथ भावनात्मक जुड़ाव और मानवीय पहलुओं को भी अपनी स्टोरीज में जगह देने की कोशिश करती हैं. पटना में जन्मीं शाम्भवी ने Patna University से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद Indira Gandhi National Open University (IGNOU) से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. पत्रकारिता और जनसंचार की पढ़ाई ने उन्हें न्यूज राइटिंग, डिजिटल कंटेंट और ऑडियंस बिहेवियर की बेहतर समझ दी है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शाम्भवी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों तक सही, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.
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