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Home Education IITian का छलका दर्द! रैंक पूछने वाले बहुत मिले, संघर्ष समझने वाला कोई नहीं

IITian का छलका दर्द! रैंक पूछने वाले बहुत मिले, संघर्ष समझने वाला कोई नहीं

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IITian का छलका दर्द! रैंक पूछने वाले बहुत मिले, संघर्ष समझने वाला कोई नहीं
स्टूडेंट की AI जेनरेटेड तस्वीर

JEE Preparation Struggle: का रिजल्ट जारी हो चुका है. देशभर में टॉप करने वाले और सफल छात्रों के बीच खुशी का माहौल है. हर साल की तरह इस बार भी रैंक, स्कोर और सफलता की कहानियां सुर्खियों में हैं. लेकिन सफलता की इस चमकती दुनिया में रिजल्ट के पीछे का संघर्ष, अकेलापन और मेंटल प्रेशर कौन देखता है? सोशल मीडिया पर एक IITian ने इस बात को रखा. उन्होंने अपनी तैयारी के दिनों को याद करते हुए बताया कि वे दिन कितने कठिन थे और उस दौरान वे कैसा फील करती थीं.

रिजल्ट मैटर करता है, पर मेंटल प्रेशर की कोई बात नहीं करता

सोनल खोलवाल ने अपने एक लिंक्डइन पोस्ट में कहा कि लोग अक्सर JEE की तैयारी, बुक्स और स्ट्रैटजी और रैंक की बात करते हैं. लेकिन उस मेंटल प्रेशर के बारे में बहुत कम बात होती है, जिससे हर अभ्यर्थी गुजरता है. उन्होंने कहा कि परीक्षा तो केवल एक दिन की होती है, लेकिन तैयारी का दौर हर दिन चलता है. कई बार सुबह उठकर यह सवाल मन में आता था कि क्या मैं पूरी मेहनत कर रही हूं.

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सोनल खोलवाल का लिंक्डइन पोस्ट (PC-LinkedIn)

IITian ने बताई अपनी कहानी, तैयारी के दौरान अकेलापन महसूस करती थीं

सोनल ने बताया कि उन्होंने NIT Jalandhar में मिली सीट छोड़कर कोविड काल के दौरान JEE Advanced की तैयारी करने का फैसला किया था. उनके अनुसार, सबसे मुश्किल हिस्सा सिलेबस पूरा करना नहीं था, बल्कि अकेलापन था. सोनल ने कहा कि हर स्टूडेंट को अकेलेपन से गुजरना पड़ता है. तैयारी के इस दौर में स्टूडेंट्स के साथ सिर्फ बुक्स और अपने विचार होते हैं. उन्होंने अपने बारे में बताया कि कई बार उन्हें सेल्फ डाउट होता था, जिसका लेवल इतना हाई होता था कि पढ़ाई से ध्यान भटक जाता था.

परीक्षा से सिर्फ तैयारी का पता चलता है

आगे सोनल कहती हैं कि स्ट्रगल तो था, लेकिन इससे उन्हें एक महत्वपूर्ण सीख मिली. सोनल कहती हैं कि खुद पर डाउट होना असफल होने का संकेत नहीं है. इसका मतलब है कि आप किसी ऐसी चीज के लिए प्रयास कर रहे हैं, जो आपके लिए रियल में बहुत जरूरी है. उनके अनुसार, परीक्षा केवल आपकी तैयारी को परखती है, लेकिन तैयारी के दौरान का समय आपकी पर्सनालिटी की परीक्षा लेता है.

लाखों अभ्यर्थियों को मिली प्रेरणा

सोनल ने IIT Delhi से बीटेक की पढ़ाई की है. JEE Advanced के नतीजों के बीच सोनल की यह कहानी उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो लंबे समय से टफ परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं और कई बार असफल हो चुके हैं. यह याद दिलाता है कि सफलता केवल रैंक हासिल करने का नाम नहीं है, बल्कि उन मुश्किल दिनों से गुजरकर भी अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहने का नाम है.

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शाम्भवी शिवानी डिजिटल मीडिया में पिछले 3 सालों से सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शिक्षा और रोजगार से जुड़ी खबरों की समझ रखने वाली शाम्भवी एग्जाम, सरकारी नौकरी, रिजल्ट, करियर, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी जैसे विषयों पर रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग करती हैं. सरल भाषा और जानकारी को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है. डिजिटल मीडिया में अपने करियर के दौरान शाम्भवी ने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है. यहां उन्होंने एजुकेशन, युवा मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर कंटेंट तैयार किया. वर्तमान में प्रभात खबर के साथ जुड़कर वे खास तौर पर बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, सरकारी नौकरी, करियर ऑप्शंस और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज पर काम कर रही हैं. शाम्भवी की रुचि सिर्फ पत्रकारिता तक सीमित नहीं है. उन्हें सिनेमा और साहित्य में भी गहरी दिलचस्पी है, जिसका असर उनकी लेखन शैली में भी देखने को मिलता है. वे तथ्यों के साथ भावनात्मक जुड़ाव और मानवीय पहलुओं को भी अपनी स्टोरीज में जगह देने की कोशिश करती हैं. पटना में जन्मीं शाम्भवी ने Patna University से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद Indira Gandhi National Open University (IGNOU) से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. पत्रकारिता और जनसंचार की पढ़ाई ने उन्हें न्यूज राइटिंग, डिजिटल कंटेंट और ऑडियंस बिहेवियर की बेहतर समझ दी है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शाम्भवी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों तक सही, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.
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