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Home Education General Knowledge बिहार का पड़ोसी जिला जिसकी सीमाएं 3 राज्यों और 2 देशों से लगती हैं, जानते ही Google Map में खोजने लगेंगे नाम

बिहार का पड़ोसी जिला जिसकी सीमाएं 3 राज्यों और 2 देशों से लगती हैं, जानते ही Google Map में खोजने लगेंगे नाम

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बिहार का पड़ोसी जिला जिसकी सीमाएं 3 राज्यों और 2 देशों से लगती हैं, जानते ही Google Map में खोजने लगेंगे नाम
General Knowledge: बैकग्राउंड में दार्जिलिंग के नजारे और एक टूरिस्ट की सांकेतिक तस्वीर (Image Freepik)

General Knowledge: प्रतियोगिता परीक्षाओं में करेंट अफेयर्स और जनरल नॉलेज सेक्शन में भूगोल के सवाल जरूर होते हैं. ऐसे में जीके के ट्रिकी सवालों (General Knowledge Tricky Questions) की तैयारी के लिए यहां एक मजेदार टॉपिक के बारे में विस्तार से जानेंगे. भारत में एक अनोखा जिला ऐसा है जिसकी सीमाएं 2 देशों और 3 राज्यों से लगती हैं. खास बात ये है कि यह जिला बिहार का पड़ोसी है और अपने खूबसूरत नजारों के लिए मशहूर है.

General Knowledge on Geography: 3 राज्यों और 2 देशों से लगती हैं सीमाएं

पश्चिम बंगाल में महानंदा नदी के तट पर स्थित दार्जिलिंग जिला अपनी खूबसूरत नजरों के लिए मशहूर है. यह भारत के टॉप टूरिस्ट प्लेस में से एक है. यहां दूर-दूर से लोग छुट्टियां मनाने आते हैं. इस जिले की समाएं बहुत रोचक हैं. आप Google Map में भी इसकी सीमाओं को विस्तार से देख सकते हैं.

दो देशों से लगती हैं सीमाएं

दार्जिलिंग जिला दो देशों से अपनी सीमाएं साझा करता है. दक्षिणी हिस्से में दार्जिलिंग की सीमा बांग्लादेश से लगती है, जबकि उत्तर-पश्चिम दिशा में यह नेपाल के साथ अपनी सीमा साझा करता है. नेपाल से इसकी करीब 100 किलोमीटर लंबी साझा सीमा है, जिससे यह क्षेत्र सामरिक और सांस्कृतिक रूप से भी काफी अहम बन जाता है.

उत्तर में सिक्किम दक्षिण में पश्चिम बंगाल

दार्जिलिंग के उत्तर में सिक्किम राज्य की सीमा लगती है. यहां यह सिक्किम के पश्चिमी और दक्षिणी जिलों से जुड़ा हुआ है. दूसरी ओर, दक्षिण-पूर्व दिशा में दार्जिलिंग की सीमा पश्चिम बंगाल के ही दूसरे हिस्सों से मिलती है, क्योंकि यह जिला खुद भी पश्चिम बंगाल राज्य का एक अहम भाग है.

बिहार का पड़ोसी

दार्जिलिंग जिला बिहार राज्य से भी जुड़ा हुआ है. बिहार का किशनगंज जिला इसके साथ लंबी सीमा साझा करता है. दोनों इलाकों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध भी मजबूत हैं. ऐसे में दार्जिलिंग उन चुनिंदा जिलों में शामिल करती हैं जो दो पड़ोसी देशों और कई राज्यों से जुड़े हुए हैं.

यह भी पढ़ें: भारत का इकलौता राज्य जहां हैं सिर्फ 2 जिले, खूबसूरत नजारों के लिए मशहूर

दार्जिलिंग का दूसरा नाम क्या है?

दार्जिलिंग को पहले “दोर्जे-लिंग” कहा जाता था, जिसका मतलब होता है “वज्र का स्थान”. यह नाम लेप्चा जनजाति के लोगों ने रखा था, जो इस इलाके के मूल निवासी थे. बाद में ब्रिटिश शासन के दौरान इसका नाम दार्जिलिंग रखा गया और यह हिल स्टेशन के रूप में प्रसिद्ध हुआ.

दार्जिलिंग की सबसे फेमस चीज क्या है?

दार्जिलिंग अपनी खूबसूरत वादियों, सूर्योदय के मनमोहक नजारों और कंचनजंगा पर्वत के दृश्य के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. खासतौर पर टाइगर हिल का सूर्योदय देखने हजारों पर्यटक हर साल यहां आते हैं. यह जगह अपने प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण के लिए मशहूर है.

दार्जिलिंग का मुख्य व्यवसाय क्या है?

दार्जिलिंग की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से चाय बागानों, खेती, बागवानी और वनों पर निर्भर करती है. यहां की चाय विश्वभर में अपनी खास खुशबू और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है. 1000 से 2000 मीटर की ऊंचाई तक फैले चाय बागान इस इलाके की पहचान बन चुके हैं और स्थानीय लोगों की आजीविका का मुख्य स्रोत हैं.

दार्जिलिंग घूमने में कितना समय लगता है?

दार्जिलिंग की सैर के लिए आमतौर पर 3 से 4 दिन काफी होते हैं, जिनमें आप प्रमुख दर्शनीय स्थल देख सकते हैं. अगर आप आराम से घूमना चाहते हैं या पास के इलाकों जैसे मिरिक या कालिम्पोंग भी देखना चाहते हैं, तो 5 दिन का ट्रिप प्लान करना सबसे अच्छा रहेगा.

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रवि मल्लिक पिछले 7 सालों से एजुकेशन जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं. एजुकेशन, करियर, जॉब, NEET, JEE, बैंकिंग, SSC, UPSC, UPPSC, BPSC और ICAI CA जैसी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है. फिलहाल वो प्रभात खबर डिजिटल की एजुकेशन टीम को लीड कर रहे हैं. इससे पहले उन्होंने TV9 भारतवर्ष डिजिटल, Times Network और अमर उजाला जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है. रवि युवाओं को बेहतर करियर ऑप्शन, करेंट अफेयर्स और नई वैकेंसी के बारे में बताना पसंद करते हैं. बोर्ड परीक्षा हो या UPSC, JEE, CUET और NEET जैसे कॉम्पिटेटिव एग्जाम इनके लिए स्मार्ट टिप्स तैयार करना अच्छा लगता है. एग्जाम टॉपर्स से बात करना और उनकी स्ट्रेटजी के बारे में छात्रों को बताना पसंद है. डिजिटल युग में पत्रकारिता की शुरुआत होने के चलते रवि मल्लिक Digital News को अच्छे से समझते भी हैं और उसे यूजर के अनुसार तराशना भी जानते हैं. यही वजह है कि उनकी रिपोर्ट को IGNOU, JNU, IIT गुवाहाटी और NIT जालंधर जैसे संस्थानों ने भी शेयर किया है. रवि की पढ़ाई वाराणसी से हुई है. यहीं के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय (MGKVP) से उन्होंने ग्रेजुएशन पूरा किया. इसके बाद पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए वो लखनऊ आ गए. स्वामी विवेकानंद सुभारती यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान लखनऊ में रहकर 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और साल 2019 के लोकसभा चुनाव को करीब से देखा और एक लोकल वेबसाइट के साथ काम किया. पॉलिटिक्स, क्राइम और बिग ब्रेकिंग खबरों पर हाथ साफ करने के साथ रवि की रुचि एजुकेशन न्यूज की ओर हुई. साल 2019 में ही अमर उजाला के सफलता प्लेटफॉर्म से उन्होंने एजुकेशन की खबरों पर काम करना शुरू किया. इसके बाद साल 2020 में उन्होंने TV9 भारतवर्ष डिजिटल ज्वाइन किया और यहां Career कैटेगरी की शुरुआत की. एजुकेशन की खबरों को कवर करते हुए JNU, DU, जामिया और IIT दिल्ली के कई इवेंट का हिस्सा रहे. रवि के करियर की गाड़ी आगे बढ़ी और साल 2024 में उन्हें Times Now Hindi में एजुकेशन टीम में सीनियर कंटेंट एडिटर का पोस्ट मिला. जॉब, स्कूली शिक्षा, बोर्ड परीक्षा और रिजल्ट की खबरों पर काम करते हुए एक साल पूरा किया. साल 2025 से रवि प्रभात खबर डिजिटल की एनर्जेटिक टीम के साथ जुड़े हैं.
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