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Home Education General Knowledge SPG और NSG में क्या है अंतर? जानिए किसका काम है सबसे ज्यादा टफ 

SPG और NSG में क्या है अंतर? जानिए किसका काम है सबसे ज्यादा टफ 

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SPG और NSG में क्या है अंतर? जानिए किसका काम है सबसे ज्यादा टफ 
सांकेतिक तस्वीर

SPG VS NSG: जब भी देश की सुरक्षा व्यवस्था की बात आती है तो कई तरह के सुरक्षा बल की बात आती है. सबसे हाई-प्रोफाइल सुरक्षा बल में SPG और NSG का नाम आता है. आम लोगों को नहीं पता होता है कि ये सुरक्षा बल किस लिए हैं और इनमें क्या अंतर है. आइए, जानते हैं SPG और NSG के बीच का फर्क.

SPG और NSG का फुलफॉर्म

SPG का फुलफॉर्म Special Protection Group है और NSG का फुलफॉर्म National Security Guard है. दोनों ही फोर्स बहुत सी ट्रेनिंग से होकर गुजरती है. इनके ऊपर विशेष जिम्मेदारियां होती हैं. हालांकि, इनके काम, सेलेक्शन प्रोसेस और ट्रेनिंग में काफी अंतर होता है.

SPG और NSG का क्या है काम?

SPG का गठन वर्ष 1985 में किया गया था. इसका मुख्य काम भारत के प्रधानमंत्री और उनके साथ रहने वाले करीबी परिवार की सुरक्षा करना है. SPG को देश की सबसे विशेष सुरक्षा इकाइयों में गिना जाता है.

वहीं NSG का गठन 1984 में किया गया था. इसे आमतौर पर “ब्लैक कैट कमांडो” के नाम से जाना जाता है. इसका मुख्य काम आतंकवाद-रोधी अभियान (Anti-terrorist operation) चलाना, बंधक बचाव ऑपरेशन करना और विशेष परिस्थितियों में VVIP सुरक्षा प्रदान करना है.

कैसे होती है भर्ती?

SPG में सीधी भर्ती नहीं होती. इसमें CRPF, CISF, BSF, SSB जैसे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और IPS अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर लिया जाता है. चयन के दौरान सर्विस रिकॉर्ड, फिजिकल और मेंटल फिटनेस देखी जाती है. साथ ही सुरक्षा जांच जैसे कई चरणों से गुजरना पड़ता है.

NSG में भी सीधी भर्ती नहीं होती. यहां भारतीय सेना और विभिन्न केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से चयन किया जाता है. उम्मीदवारों को कठिन फिजिकल टेस्ट, दौड़, मेंटल फिटनेस टेस्ट जैसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.

ट्रेनिंग कितनी कठिन होती है?

SPG कर्मियों को क्लोज प्रोटेक्शन, मार्शल आर्ट्स, एडवांस सेफ्टी टेक्निक और विशेष ऑपरेशन की ट्रेनिंग दी जाती है. इनका फोकस VIP सुरक्षा पर होता है.

दूसरी ओर NSG की ट्रेनिंग दुनिया की सबसे कठिन सुरक्षा ट्रेनिंग में मानी जाती है. इसमें Anti Terrorist ऑपरेशन, शहरी युद्ध, बंधक बचाव और संकट प्रबंधन जैसी विशेष ट्रेनिंग शामिल होती है. रिपोर्ट्स के अनुसार शुरुआती ट्रेनिंग में बड़ी संख्या में उम्मीदवार बाहर हो जाते हैं.

कितनी मिलती है सैलरी?

SPG कर्मियों को बेसिक वेतन के साथ जोखिम भत्ता, विशेष ड्यूटी भत्ता, मेडिकल सुविधा और अन्य सरकारी लाभ दिए जाते हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार उनकी महीने की सैलरी लगभग 84 हजार रुपये से 2.4 रुपये लाख तक हो सकती है.

NSG में सैलरी रैंक और जिम्मेदारी के अनुसार तय होती है. कमांडो लेवल से लेकर सीनियर ऑफिसर तक अलग-अलग वेतनमान और भत्ते दिए जाते हैं.

कौन है ज्यादा खास?

SPG और NSG दोनों के रोल्स अलग-अलग होते हैं. इसलिए किसी एक को दूसरे से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं कहा जा सकता. SPG प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है, जबकि NSG देश के बड़े आतंकवाद-रोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाती है. 26/11 मुंबई हमले जैसे ऑपरेशन में NSG की भूमिका काफी चर्चित रही है.

SPG और NSG में से कौन सा है टफ?

SPG के जवान हर समय VVIP सुरक्षा में लगे रहते हैं, वहीं NSG कमांडो को शहरी युद्ध, आतंकियों से मुकाबला और संकट की स्थिति में कार्रवाई जैसे बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य करने पड़ते हैं. इसी वजह से NSG की ट्रेनिंग और ऑपरेशन को अधिक कठिन माना जाता है, जबकि SPG पर देश के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है.

यह भी पढ़ें- BSF और CRPF क्या है अंतर? जानिए किसे मिलती है कितनी सैलरी 

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शाम्भवी शिवानी डिजिटल मीडिया में पिछले 3 सालों से सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शिक्षा और रोजगार से जुड़ी खबरों की समझ रखने वाली शाम्भवी एग्जाम, सरकारी नौकरी, रिजल्ट, करियर, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी जैसे विषयों पर रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग करती हैं. सरल भाषा और जानकारी को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है. डिजिटल मीडिया में अपने करियर के दौरान शाम्भवी ने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है. यहां उन्होंने एजुकेशन, युवा मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर कंटेंट तैयार किया. वर्तमान में प्रभात खबर के साथ जुड़कर वे खास तौर पर बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, सरकारी नौकरी, करियर ऑप्शंस और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज पर काम कर रही हैं. शाम्भवी की रुचि सिर्फ पत्रकारिता तक सीमित नहीं है. उन्हें सिनेमा और साहित्य में भी गहरी दिलचस्पी है, जिसका असर उनकी लेखन शैली में भी देखने को मिलता है. वे तथ्यों के साथ भावनात्मक जुड़ाव और मानवीय पहलुओं को भी अपनी स्टोरीज में जगह देने की कोशिश करती हैं. पटना में जन्मीं शाम्भवी ने Patna University से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद Indira Gandhi National Open University (IGNOU) से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. पत्रकारिता और जनसंचार की पढ़ाई ने उन्हें न्यूज राइटिंग, डिजिटल कंटेंट और ऑडियंस बिहेवियर की बेहतर समझ दी है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शाम्भवी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों तक सही, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.
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