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CBSE मैथ्स पेपर के बाद क्यों रोए छात्र? टीचर्स ने बताया असली वजह

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CBSE मैथ्स पेपर के बाद क्यों रोए छात्र? टीचर्स ने बताया असली वजह
CBSE Board Exam Maths Paper Analysis (प्रतीकात्मक तस्वीर)

CBSE Board Exam Maths Paper Analysis: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन की क्लास 10वीं की परीक्षाएं 16 फरवरी 2026 से शुरू हो चुकी है. पहले दिन मैथ्स का पेपर था. मैथ्स की परीक्षा एक ही शिफ्ट में सुबह 10:00 बजे से लेकर 01:30 बजे तक हुई. स्टूडेंट्स और टीचर्स के रिएक्शन के अनुसार, पेपर मॉडरेट था. अच्छी तैयारी करने वाले स्टूडेंट के लिए हाई स्कोर करना आसान होगा. 

पेपर बहुत लंबा और टफ था 

आमतौर पर स्टूडेंट्स और टीचर्स ने मैथ्स के पेपर को बैलेंसड बताया. हालांकि, कुछ स्टूडेंट्स को पेपर टफ (Maths Paper Was it Tough or Easy) लगा. कुछ स्टूडेंट्स की शिकायत रही कि पेपर बहुत लंबा और कठिन था. 

स्टूडेंट्स ने बताया कि मैथ्स का पेपर NCERT के इर्द-गिर्द था. ऐसे में जिन्होंने NCERT Books से तैयारी की थी, उन्हें काफी मदद मिली. उनके लिए प्रश्नों को हल करना आसान रहा. वहीं, हाई स्कोर करने की भी संभावना है. 

कई एग्जाम सेंटर पर स्टूडेंट दिखे परेशान

सोशल मीडिया पर दो तरह के मत चल रहे हैं. कोई कह रहा है कि पेपर बहुत टफ और हार्ड था, जिसके कारण कई स्टूडेंट्स एग्जाम हॉल से रोते हुए बाहर निकले. वहीं कइयों का कहना था पेपर बैलेंसड था. वहीं कई लोग कह रहे हैं कि अगर ऐसा पेपर हमारे समय में आया हो तो 90 प्रतिशत तो कंफर्म था. एक X यूजर ने लिखा, CBSE पेपर का कठिनाई का स्तर क्यों कम करे, जब ये स्टूडेंट्स आगे चलकर JEE, NEET जैसी परीक्षा में शामिल होने वाले हैं. 

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क्या है टीचर्स का कहना?

झारखंड की राजधानी रांची के एक निजी कोचिंग संस्थान के टीचर दिलीप रंजन ने CBSE 10वीं के मैथ्स प्रश्नपत्र को लेकर हमसे बातचीत की. दिलीप रंजन गुरुनानक हायर सेकेंडरी स्कूल के पूर्व पीजीटी (गणित) शिक्षक हैं.

रांची के शिक्षक ने बताया क्यों टफ लगा मैथ्स का पेपर?

उनके अनुसार, इस वर्ष का CBSE कक्षा 10 मैथ्स का पेपर बैलेंसड रहा. पेपर न तो ज्यादा कठिन था और न ही बहुत आसान, बल्कि इसका स्तर पिछले वर्ष के समान ही रहा. उन्होंने कहा कि जिन स्टूडेंट्स ने NCERT की पुस्तकों और पिछले पांच वर्षों के प्रश्नपत्रों का अभ्यास किया है, उनके लिए पेपर आसान रहा होगा. हालांकि, कम तैयारी करने वाले छात्रों को प्रश्नपत्र टफ लगा होगा.

दिलीप रंजन ने बताया कि Geometry और Trigonometry जैसे विषयों से कुछ सवाल टफ थे. वहीं, पेपर लंबा होने की बात पर उन्होंने कहा कि प्रश्न पत्र लगभग 5 से 10 मिनट ही लंबा था, बहुत अधिक नहीं. उनके मुताबिक, यदि कोई छात्र किसी एक प्रश्न में अधिक समय ले ले, तो उसे पूरा पेपर लंबा महसूस हो सकता है.

एप्लीकेशन बेस्ड सवाल ज्यादा थे

DPS के पूर्व PGT शिक्षक और दयानंद पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल हेमंत ने बताया कि मैंने तीनों सेट के मैथ्स पेपर के सवाल देखा है. सेट 1 और 3 की तुलना में सेट 2 टफ था. दिक्कत ये थी कि देखे हुए सवाल कम थे और नहीं देखे हुए सवाल ज्यादा. उन्होंने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार का पेपर काफी टफ था. एप्लीकेशन बेस्ड सवाल ज्यादा थे, जिस वजह से स्टूडेंट्स कंफ्यूज हो गए. केस स्टडी के सवाल फभी टफ थे. बच्चे क्वालिफई कर जाएंगे लेकन हाई स्कोर के चांस घट सकते हैं.

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शाम्भवी शिवानी डिजिटल मीडिया में पिछले 3 सालों से सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शिक्षा और रोजगार से जुड़ी खबरों की समझ रखने वाली शाम्भवी एग्जाम, सरकारी नौकरी, रिजल्ट, करियर, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी जैसे विषयों पर रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग करती हैं. सरल भाषा और जानकारी को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है. डिजिटल मीडिया में अपने करियर के दौरान शाम्भवी ने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है. यहां उन्होंने एजुकेशन, युवा मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर कंटेंट तैयार किया. वर्तमान में प्रभात खबर के साथ जुड़कर वे खास तौर पर बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, सरकारी नौकरी, करियर ऑप्शंस और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज पर काम कर रही हैं. शाम्भवी की रुचि सिर्फ पत्रकारिता तक सीमित नहीं है. उन्हें सिनेमा और साहित्य में भी गहरी दिलचस्पी है, जिसका असर उनकी लेखन शैली में भी देखने को मिलता है. वे तथ्यों के साथ भावनात्मक जुड़ाव और मानवीय पहलुओं को भी अपनी स्टोरीज में जगह देने की कोशिश करती हैं. पटना में जन्मीं शाम्भवी ने Patna University से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद Indira Gandhi National Open University (IGNOU) से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. पत्रकारिता और जनसंचार की पढ़ाई ने उन्हें न्यूज राइटिंग, डिजिटल कंटेंट और ऑडियंस बिहेवियर की बेहतर समझ दी है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शाम्भवी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों तक सही, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.
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