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Mental Health tips for students: छात्रों के लिए जरूरी है मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना

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Mental Health tips for students: छात्रों के लिए जरूरी है मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना
Mental Health tips for students

Mental Health tips for students: समय पर अपनी पढ़ाई पूरी न कर पाने, अभिभावक समेत अपने आस-पास मौजूद लोगों के लिए शिकायत से भरे होने, किसी काम में मन न लगने और एक अजीब की बेचैनी से जूझने, जैसी समस्याएं कई से छात्रों में आम हैं. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक वैश्विक स्तर पर, 10-19 वर्ष आयु वर्ग के प्रत्येक सात में से एक व्यक्ति मानसिक विकार से पीड़ित है. 15-29 वर्ष की आयु के लोगों में आत्महत्या मृत्यु का तीसरा प्रमुख कारण है. अवसाद, चिंता और व्यवहार संबंधी विकार किशोरों को प्रभावित कर रहे हैं.  

गौर करें मानसिक सेहत पर

मनुष्य के मन-शरीर के बीच एक गहरा संबंध होता है. मानसिक सेहत का बेहतर होना हर किसी आयु वर्ग के लिए जरूरी है और छात्रों को खासतौर पर अपनी मानसिक सेहत पर गौर करना चाहिए. अभिभावकों को भी अपने बच्चों की मनोदशा, व्यवहार पर गौर करना चाहिए और उनसे मित्रवत होकर उनकी समस्याओं से बात करनी चाहिए.  छात्रों के लिए, मानसिक स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनके सीखने और स्कूल या कॉलेज में भाग लेने के तरीके को प्रभावित करता है. मानसिक स्वास्थ्य छात्रों की स्कूल में सीखने की क्षमता, शैक्षणिक उपलब्धि, सकारात्मक संबंध बनाने की क्षमता, शारीरिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन को प्रभावित करता है. इसलिए अपनी सेहत पर गौर करें.

अच्छी मानसिक सेहत के लाभ  

मानसिक स्वास्थ्य में व्यक्ति की भावनात्मक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक भलाई शामिल होती है. यह इस बात को प्रभावित करता है कि हम कैसे सोचते हैं और कार्य करते हैं और हम दूसरों के साथ कैसे बातचीत करते हैं.
– छात्र अधिक उत्पादक होंगे और शैक्षणिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित होंगे.
– छात्र अपने बारे में और अपनी क्षमताओं के बारे में बेहतर महसूस करते हैं.
– छात्र नयी चीजें सीखने और कक्षा में होनेवाली पढ़ाई में रुचि लेते हैं.
– साथियों के साथ सहयोग करते हैं एवं शिक्षकों से सहजता से बात करते हैं और अपने प्रश्न सामने रखते हैं.
– छात्र अपनी उपलब्धियों पर गर्व करते हैं और अपनी रुचियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित होते हैं.

मेंटल हेल्थ की बेहतरी के लिए क्या करें छात्र

-छात्र रोजमर्रा के तनाव को पहचानने की कोशिश करें और  स्वस्थ तरीके से उसका सामना करें.
– विश्वसनीय लोगों, जैसे अपने माता-पिता, भाई-बहन, दोस्त या शिक्षक से अपने मन की बात करें.
– छात्रों को स्वस्थ नींद, पोषण, व्यायाम और जीवनशैली की अच्छी आदतों को अपनाने पर काम करना चाहिए.
– अपनी हॉबी पर फोकस करें और उसे पर्याप्त समय दें.
– आपको जो चीज गलत लगती है, वो काम कभी भी किसी के दबाव में न करें, चाहे वो आपके दोस्त ही क्यों हो.
– आप अगर अपने रिजल्ट या कम अंकों को लेकर परेशान हैं, तो ध्यान रखें कि जिंदगी इस रिजल्ट से बहुत लंबी और महत्वपूर्ण है.

प्लेटफॉर्म, जहां से ले सकते हैं मदद

सरकार की ओर से भी मानसिक सेहत की मदद के कुछ प्लेफॉर्म संचालित किये जाते हैं. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की पहल टेली मानस हेल्पलाइन नंबर 14416 और 1-800-891-4416 के माध्यम से 24/7 मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रदान करती है.
शिक्षा मंत्रालय मनोदर्पण प्लेटफॉर्म के माध्यम से छात्रों, शिक्षकों और परिवारों को मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करता है. यह टेली-काउंसलिंग सेवाओं के लिए एक राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन (8448440632) प्रदान करता है.
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से 2020 में शुरू की गयी किरण 24/7 मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन (1800-599-0019) है.
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) पूरे भारत में लगभग 270 परामर्शदाताओं के माध्यम से छात्रों को परामर्श सेवाएं प्रदान करती है.
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) एक निश्चित अवधि के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन (1800-11-8004) के माध्यम से परीक्षा पूर्व और परीक्षा पश्चात परामर्श प्रदान करता है. 

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