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Home Education Career Guidance JoSAA Round 1 vs Round 5: पहले और आखिरी राउंड के कटऑफ में कितना आता है अंतर? जानें पूरा खेल

JoSAA Round 1 vs Round 5: पहले और आखिरी राउंड के कटऑफ में कितना आता है अंतर? जानें पूरा खेल

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JoSAA Round 1 vs Round 5: पहले और आखिरी राउंड के कटऑफ में कितना आता है अंतर? जानें पूरा खेल
पढ़ते हुए स्टूडेंट की सांकेतिक फोटो (AI Generated)

JoSAA Round 1 vs Round 5: JoSAA काउंसलिंग शुरू होते ही IIT, NIT और IIIT में एडमिशन की रेस शुरू हो जाती है. जब राउंड 1 का रिजल्ट आता है, तो बहुत से स्टूडेंट्स को मनपसंद कॉलेज या ब्रांच नहीं मिलती, जिससे वे निराश हो जाते हैं.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि राउंड 1 और आखिरी राउंड (JoSAA Round 1 vs Round 5) के कटऑफ में जमीन-आसमान का फर्क आ जाता है. अगर आप काउंसलिंग के इस पूरे गणित को समझ लें, तो कम रैंक होने पर भी आपको एक बेहतरीन कॉलेज मिल सकता है. आइए जानते हैं कि जोसा के पहले और अंतिम राउंड में कितना फर्क पड़ता है.

JoSAA Round 1 vs Round 5:

इंजीनियरिंग ब्रांचराउंड 1 की स्थितिआखिरी राउंड (राउंड 5) की स्थितिरैंक में संभावित अंतर
कंप्यूटर साइंस (CSE)कटऑफ बहुत हाई रहता है. सीटें तुरंत ब्लॉक हो जाती हैं.कटऑफ में बहुत मामूली बदलाव होता है.केवल 10 से 100 रैंक का अंतर.
कोर ब्रांचेस (Mechanical/Civil)मध्यम रैंक वाले छात्रों को सीटें मिलती हैं.कटऑफ काफी नीचे गिर जाता है, जिससे बड़ी राहत मिलती है.3,000 से 12,000 रैंक तक का बड़ा अंतर.

JoSAA Round 1 vs Round 5: क्या होता है राउंड 1 और राउंड 5 का पूरा गणित?

  • राउंड 1: यह काउंसलिंग का पहला स्टेज होता है. यहां कटऑफ बहुत हाई जाता है क्योंकि देश के टॉप रैंकर्स अपनी चॉइस के हिसाब से बेस्ट सीटें ब्लॉक कर लेते हैं. इस राउंड में टॉप आईआईटी और एनआईटी की कंप्यूटर साइंस (CSE) जैसी डिमांडिंग ब्रांचेस लगभग फुल होने की कगार पर पहुंच जाती हैं.
  • राउंड 5: यह जोसा काउंसलिंग का अंतिम रेगुलर राउंड होता है. यहां तक आते-आते कटऑफ काफी नीचे गिर जाता है. जो छात्र राउंड 1 में मायूस थे, उन्हें इस अंतिम राउंड तक आते-आते अपनी पसंद का कॉलेज या बेहतर ब्रांच मिलने की उम्मीद सबसे ज्यादा होती है. इसके बाद बची हुई सीटों के लिए एनआईटी और IIIT के लिए CSAB काउंसलिंग होती है.

आखिरी राउंड तक क्यों गिर जाता है JoSAA कटऑफ?

कई स्टूडेंट्स के मन में यह सवाल उठता है कि जब सीटें सीमित हैं, तो आखिरी राउंड तक रैंक में इतना अंतर कैसे आ जाता है. इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं:

  • सीटें छोड़ना (Seat Withdrawal): बहुत से छात्र बैकअप के तौर पर जोसा में सीट ले लेते हैं, लेकिन बाद में वे NEET, स्टेट इंजीनियरिंग कॉलेज, BITS Pilani या अन्य कोर्सेज में चले जाते हैं.
  • IIT बनाम NIT का खेल: जिन छात्रों को राउंड 1 में एनआईटी मिला था, उनमें से कई टॉपर्स को बाद के राउंड में आईआईटी मिल जाता है. ऐसे में एनआईटी की वो सीटें खाली हो जाती हैं और नीचे रैंक वाले छात्रों को मौका मिलता है.
  • फीस और डॉक्यूमेंट्स रिजेक्शन: हर साल सैकड़ों छात्र समय पर सीट एक्सेप्टेंस फीस नहीं भर पाते या उनके डॉक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन में गड़बड़ी निकलती है, जिससे उनकी सीटें कैंसिल हो जाती हैं और वो नीचे वाले रैंकर्स को अलॉट हो जाती हैं.

Top Branches Cutoff: क्या कंप्यूटर साइंस में भी आता है फर्क?

अगर आप IIT बॉम्बे, IIT दिल्ली या NIT त्रिची में CSE लेना चाहते हैं, तो आपको राउंड 1 और आखिरी राउंड (JoSAA Round 1 vs Round 5) में बहुत ज्यादा अंतर देखने को नहीं मिलेगा. टॉप कॉलेजों की सीएसई ब्रांच शुरुआती राउंड्स में ही लगभग लॉक हो जाती है. इनमें रैंक का अंतर 10 से 100 रैंक के बीच ही रहता है. लेकिन असली फर्क कोर और लोअर ब्रांचेस में देखने को मिलता है.

Core Branches Ranking: मैकेनिकल और सिविल में बदल जाती है किस्मत

अगर हम मैकेनिकल, सिविल, केमिकल, मैटेरियल साइंस या माइनिंग जैसी ब्रांचेस की बात करें, तो राउंड 1 और आखिरी राउंड के कटऑफ (JoSAA Round 1 vs Round 5) में हजारों रैंक का अंतर आ जाता है. एनआईटी और IIITs में तो कभी-कभी यह अंतर 5000 से लेकर 15000 रैंक तक चला जाता है. अगर राउंड 1 में किसी NIT की मैकेनिकल ब्रांच 25000 रैंक पर बंद हुई थी, तो आखिरी राउंड तक जाते-जाते वह 35000 या उससे पीछे रैंक वाले छात्र को भी मिल सकती है.

यह भी पढ़ें: JoSAA में सीट अपग्रेड करने का क्या है सही तरीका? समझें पूरा गणित

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