[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Business सबसे कम काम करने वाले देशों की क्या है स्थिति?कम काम करके कैसे कमाएं ज्यादा पैसे

सबसे कम काम करने वाले देशों की क्या है स्थिति?कम काम करके कैसे कमाएं ज्यादा पैसे

0
सबसे कम काम करने वाले देशों की क्या है स्थिति?कम काम करके कैसे कमाएं ज्यादा पैसे
Working Hours Debate

Working Hours Debate: इंजीनियरिंग सेक्टर की बड़ी कंपनी के सीएमडी (चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर) एसएन सुब्रह्मण्यम की कर्मचारियों को 90 घंटे काम करने की नसीहत का वीडियो सामने आने के बाद यह पूछा जाने लगा है कि क्या बहुत ज्यादा काम करके ही आप ज्यादा कमा सकते हैं. कम काम करने वालों की क्या स्थिति होती है? आमतौर पर सप्ताह में काम के घंटे फिक्स हैं. वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम के मुताबिक, भारत के पड़ोसी देश भूटान में कोई भी कंपनी कर्मचारी से 54.3 घंटे काम लेती है. यह विश्व के किसी भी देश में काम का सर्वाधिक घंटा है. सीरिया में सबसे कम 25.3 घंटे काम लेने का प्रावधान है. कई विकसित देशों में भी काम के घंटे बहुत कम हैं. भारत में एक सप्ताह में किसी भी कर्मचारी के लिए काम के 46 घंटे फिक्स हैं. एसएन सुब्रह्मण्यम इसको बढ़ाकर 90 घंटे यानी कुल काम के घंटों को डबल के करीब ले जाना चाहते हैं.

विकसित देशों में नीदरलैंड में सबसे कम कामकाजी घंटे

आइए, आज आपको बताते हैं कि कम काम करने वालों की क्या स्थिति होती है. साथ ही यह भी बताते हैं कि कम काम करके आप कैसे अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं. इससे पहले आपको यह बताते हैं कि दुनिया के विकसित देशों में लोग कितने घंटे काम करते हैं. नीदरलैंड ऐसा देश है, जहां दुनिया के सबसे कम औसत कामकाजी घंटे होते हैं. यहां के लोग सप्ताह में 29-30 घंटे काम करते हैं. इस देश में वर्क-लाइफ बैलेंस बहुत अच्छा है. यहां के लोग व्यक्तिगत समय को अहमियत देते हैं. नीदरलैंड की सरकार लोगों को इस बात के लिए प्रोत्साहित करती है कि वे ज्यादा से ज्यादा समय अपने परिवार कगे साथ बिताएं.

फ्रांस में 35 घंटे से ज्यादा काम नहीं करते लोग

फ्रांस में कानूनी तौर पर कामकाज के घंटे फिक्स हैं. यहां एक सप्ताह में 35 घंटे से ज्यादा काम नहीं ले सकते. कर्मचारियों को लंबी छुट्टियां और सरकारी छुट्टियां मिलती हैं, जो काम के घंटों को कम कर देती है. यहां लोग परिवार के साथ समय बिताना ज्यादा पसंद करते हैं.

डेनमार्क में 33-34 घंटे ही काम करते हैं कर्मचारी

डेनमार्क में फ्रांस की तुलना में लोग कम काम करते हैं. यहां सप्ताह में 33-34 घंटे ही लोग काम करते हैं. काम खत्म करने के बाद लोग परिवार के साथ समय बिताते हैं. व्यक्तिगत संतुष्टि पर ज्यादा जोर देते हैं.

स्विट्जरलैंड में निजी जिंदगी को देते हैं ज्यादा अहमियत

स्विट्जरलैंड में 35-40 घंटे लोग काम करते हैं. ऊपर के 3 देशों से यह अधिक है, लेकिन कई देशों से कम है. स्विट्जरलैंड के लोग निजी जिंदगी को अहमियत देते हैं. बाहर के कार्यों में ज्यादा समय बिताना पसंद करते हैं.

स्वीडन में 4 दिन के कामकाजी सप्ताह को किया जा रहा प्रोत्साहित

स्वीडन में कामकाजी सप्ताह को 40 घंटे से कम रखने का प्रयास होता है. यहां की कुछ कंपनियों के साथ-साथ सरकारी विभाग 4 दिन के कामकाजी सप्ताह को प्रोत्साहित कर रहे हैं. इसका उद्देश्य कर्मचारियों को ज्यादा छुट्टी देना और कार्य-जीवन संतुलन को बेहतर बनाना है.

भारत में भी कम काम करके कर सकते हैं मोटी कमाई

अगर आप भारत में हैं और कम समय काम करके पैसे कमाना चाहते हैं, तो आप नीदरलैंड, फ्रांस, डेनमार्क और स्विट्जरलैंड के लोगों की तरह किस्मत वाले नहीं हैं. लेकिन, हां, अगर आप कम समय देकर ज्यादा पैसे कमाना चाहते हैं, तो इसके लिए कई विकल्प हैं. आप उसका चयन अपनी सहूलियत और पसंद के हिसाब से कर सकते हैं.

मोबाइल फोन और इंटरनेट वाले कर सकते हैं अच्छी कमाई

भारत एक ऐसा देश है, जहां इंटरनेट बहुत सस्ता है. हर मोबाईल चलाने वाला इंटरनेट डाटा का इस्तेमाल जरूर करता है. अगर वह चाहे, तो बेहद कम समय में अच्छी कमाई कर सकता है. इसके लिए जो काम बेहद मुफीद हो सकते हैं, उसमें फ्रीलांसिंग, कंटेंट क्रिएशन और यूट्यूब वीडियो शामिल हैं.

कंटेंट राइटिंग या ब्लॉगिंग को बनाएं कमाई का जरिया

अगर आपको लिखने-पढ़ने का शौक है. आप किसी विषय के विशेषज्ञ हैं, तो आप कंटेंट राइटिंग या ब्लॉगिंग में किस्मत आजमा सकते हैं. बहुत से ऐसे लोग हैं, जो कंटेंट राइटिंग या ब्लॉगिंग करते हैं और मोटी कमाई करते हैं. उनके काम के घंटे भी फिक्स नहीं हैं. जब चाहें, काम करते हैं और जब चाहें आराम. अगर आपका ब्लॉग लोकप्रिय हो जाता है और आपके कंटेंट पढ़ने वालों की संख्या बढ़ जाती है, तो यह आपकी कमाई का जरिया बन जाता है.

फ्रीलांसिंग में भी समय की बाध्यता नहीं

पत्रकारिता के पेशे से जुड़े लोग फ्रीलांसिंग करके किसी स्थापित मीडिया हाउस में काम करने वालों से ज्यादा कमा लेते हैं. अपने काम में उन्हें मेहनत जरूर करनी होती है, तय समय सीमा के भीतर रिपोर्ट भी फाइल करनी होती है, लेकिन हर दिन ऑफिस में बैठकर 8 घंटे काम करने की उनकी मजबूरी नहीं होती. उन्हें इस बात की छूट रहती है कि वह कितनी देर काम करते हैं. कभी 1-2 घंटे काम करके वह अपनी रिपोर्ट पूरी कर सकते हैं, तो कभी उन्हें इसके लिए 10-12 घंटे भी काम करने पड़ सकते हैं.

यूट्यूब बना है लाखों लोगों की कमाई का जरिया

यूट्यूब अब बहुत लोकप्रिय हो चुका है. बड़ी संख्या में लोग यूट्यूब के जरिए पैसे कूट रहे हैं. शुरुआती दिनों में मेहनत कर लें, तो दिन में 1-2 वीडियो बनाकर यूट्यूबर हजारों रुपए कमा लेते हैं. अगर आपका चैनल लोकप्रिय हो जाता है, तो आप उससे लाखों रुपए भी कमा सकते हैं. केरी मिनाती जैसे लोग हैं, जिनके फॉलोअर मिलियंस में हैं. उनकी कमाई भी लाखों में है.

गरीब देशों में कम काम करने वाले झेलते हैं आर्थिक, मानसिक कष्ट

बहरहाल, कम काम करने वालों की स्थिति अलग-अलग संदर्भों में अलग-अलग होती है. कुछ लोग कम काम करने का फायदा उठाते हैं और व्यक्तिगत संतुष्टि के साथ-साथ पारिवारिक जीवन खुशहाल बनाते हैं. आर्थिक स्वतंत्रता का भी अनुभव कर सकते हैं. वहीं, दूसरा वर्ग ऐसा भी है, जिसे आर्थिक और मानसिक कष्ट झेलना होता है, क्योंकि वह कम काम करके अपनी जरूरतें ही पूरी नहीं कर पाता.

इसे भी पढ़ें

LPG Cylinder Price Today: 10 जनवरी 2025 को आपके यहां कितने में मिल रहा 14.2 किलो का एलपीजी सिलेंडर, यहां देखें कीमत

रांची में कोहरे की मार, कम विजिबिलिटी की वजह से 4 विमानों को करना पड़ा डायवर्ट

Disclaimer: शेयर बाजार से संबंधित किसी भी खरीद-बिक्री के लिए प्रभात खबर कोई सुझाव नहीं देता. हम बाजार से जुड़े विश्लेषण मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकिंग कंपनियों के हवाले से प्रकाशित करते हैं. लेकिन प्रमाणित विशेषज्ञों से परामर्श के बाद ही बाजार से जुड़े निर्णय करें.

Previous article Vastu Tips: महिलाएं भूलकर भी न करें ये काम, नहीं तो बर्बाद हो जाएगी शादीशुदा जिंदगी
Next article रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की पहली सालगिरह कल, मंदिर में होगा भव्य आयोजन
Avatar Of Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel