डॉलर की दादागिरी और महंगा तेल, जानिए क्यों इस हफ्ते निकला सोने-चांदी का दम?

Gold and Silver Price Drop: ग्लोबल मार्केट में कमजोरी के चलते भारतीय बाजार में सोना और चांदी सस्ते हो गए हैं. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर के दबाव से निवेश पर बुरा असर पड़ा है.

By Soumya Shahdeo | April 26, 2026 10:38 AM

Gold and Silver Price Drop: भारतीय वायदा बाजार (MCX) में शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली. ग्लोबल मार्केट के दबाव और डॉलर की मजबूती ने घरेलू बाजार में भी हलचल पैदा कर दी है. अगर आप इमनें इन्वेस्ट या इनकी खरीदारी करने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. 

कीमतों में कितनी आई गिरावट?

CNBC TV18 की रिपोर्ट के अनुसार, MCX पर जून डिलीवरी वाला सोना 462 रुपये (0.3%) गिरकर 1.51 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया.  वहीं, चांदी में गिरावट और भी ज्यादा रही है. मई डिलीवरी वाली चांदी 2,577 रुपये (1.07%) सस्ती होकर 2.38 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई. इंटरनेशनल मार्केट में भी यही हाल रहा, जहां कॉमेक्स गोल्ड करीब 1% गिरकर 4,690 डॉलर और चांदी 74.55 डॉलर प्रति औंस पर आ गई. 

क्यों टूट रहे हैं दाम?

सोने-चांदी की कीमतों में इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा हाथ अमेरिकी डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों का है. जब डॉलर मजबूत होता है, तो इंटरनेशनल मार्केट में सोना महंगा हो जाता है, जिससे उसकी मांग कम हो जाती है. इसके अलावा, कच्चा तेल 95 डॉलर–100 डॉलर प्रति बैरल के बीच बना हुआ है. तेल महंगा होने से पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे इन्वेस्टर्स का रुख बदल रहा है. 

मिडिल ईस्ट के तनाव का क्या असर?

मिडिल ईस्ट, खासकर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने बाजार को डरा रखा है. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में सप्लाई रुकने की आशंका से तेल की कीमतें काबू से बाहर हो रही हैं. ईरान ने मांग रखी है कि जब तक समुद्री नाकेबंदी नहीं हटाई जाती, तब तक तनाव कम नहीं होगा. इस राजनीतिक खींचतान की वजह से सुरक्षित निवेश के तौर पर लोग सोने के बजाय अमेरिकी डॉलर को ज्यादा पसंद कर रहे हैं. 

क्या ब्याज दरें फिर बढ़ेंगी?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था उम्मीद से ज्यादा मजबूत दिख रही है. हाल ही में आए आर्थिक आंकड़े (PMI डेटा) संकेत दे रहे हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व फिलहाल ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा. बल्कि, अगर महंगाई ऐसे ही बढ़ती रही, तो दरें और बढ़ाई जा सकती हैं. ब्याज दरें ऊंची रहने पर सोने जैसे एसेट (जिस पर कोई ब्याज नहीं मिलता) की चमक कम हो जाती है. 

आगे क्या होने वाला है?

आने वाले दिनों में सोना और चांदी वोलाटाइल (अस्थिर) बने रहेंगे. कोटक सिक्योरिटीज के अनुसार, अब सबकी नजरें अमेरिका के कंज्यूमर सेंटिमेंट डेटा पर हैं. अगर मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं हुआ और डॉलर ऐसे ही चढ़ता रहा, तो सोने की कीमतों पर दबाव बना रहेगा. हालांकि, कोई भी बड़ी जीयो-पोलिटिकल घटना कीमतों को अचानक ऊपर भी ले जा सकती है, इसलिए इन्वेस्टर्स को फूंक-फूंक कर कदम रखने की जरूरत है. 

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