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Home Business ATM PIN सिर्फ 4 अंकों का ही क्यों होता है ? जानिए इसके पीछे की दिलचस्प कहानी

ATM PIN सिर्फ 4 अंकों का ही क्यों होता है ? जानिए इसके पीछे की दिलचस्प कहानी

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ATM PIN सिर्फ 4 अंकों का ही क्यों होता है ? जानिए इसके पीछे की दिलचस्प कहानी

ATM PIN : आज लगभग हर व्यक्ति ATM, डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करता है, लेकिन बहुत कम लोग इस बात पर ध्यान देते हैं कि ATM PIN आमतौर पर सिर्फ 4 अंकों का ही क्यों होता है. क्या यह सिर्फ एक परंपरा है या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण भी है? दरअसल, 4 अंकों वाला PIN किसी तकनीकी नियम से नहीं, बल्कि एक साधारण सुझाव से शुरू हुआ था. बाद में वैज्ञानिक शोध ने भी साबित किया कि यह फैसला लोगों की सुविधा और सुरक्षा दोनों के लिहाज से सही था.

ATM PIN की शुरुआत कैसे हुई?

दुनिया का पहला ATM 27 जून 1967 को लंदन के Barclays Bank में लगाया गया था. इसका आविष्कार स्कॉटलैंड के इंजीनियर John Shepherd-Barron ने किया था. शुरुआत में उन्होंने ATM से पैसे निकालने के लिए 6 अंकों का PIN रखने का विचार बनाया था, क्योंकि उन्हें लगता था कि ज्यादा अंक होने से सुरक्षा बढ़ेगी.

लेकिन जब उन्होंने इस सिस्टम को अपनी पत्नी Caroline Shepherd-Barron पर आजमाया, तो उन्होंने साफ कहा कि 6 अंकों का नंबर याद रखना मुश्किल है और वह केवल 4 अंक ही आसानी से याद रख सकती हैं. पत्नी की इस सलाह को John Shepherd-Barron ने गंभीरता से लिया और PIN को 6 अंकों से घटाकर 4 अंकों का कर दिया. यही फैसला आगे चलकर दुनिया के अधिकांश बैंकों का मानक बन गया.

विज्ञान भी 4 अंकों के PIN का समर्थन करता है

ATM PIN को 4 अंकों का रखने के पीछे वैज्ञानिक आधार भी है. मनोवैज्ञानिक George A. Miller के शोध के अनुसार, किसी सामान्य व्यक्ति की Short-Term Memory सीमित मात्रा में जानकारी को आसानी से याद रख सकती है.

4 अंकों का नंबर याद रखना आसान होता है, इसलिए लोगों को इसे कागज, डायरी या मोबाइल में लिखकर रखने की जरूरत नहीं पड़ती. इससे PIN के लीक होने या चोरी होने का खतरा भी कम हो जाता है. यही वजह है कि 4 अंकों का PIN सुविधा और सुरक्षा दोनों के बीच एक संतुलित विकल्प माना गया.

क्या 4 अंकों का PIN सुरक्षित है?

कई लोगों को लगता है कि केवल 4 अंक होने से PIN आसानी से पता लगाया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है. 4 अंकों के PIN में 0000 से 9999 तक कुल 10,000 अलग-अलग संयोजन होते हैं. यानी किसी व्यक्ति का PIN केवल अनुमान लगाकर पता करने की संभावना 10,000 में 1 होती है. इसके अलावा लगभग सभी बैंक लगातार तीन बार गलत PIN डालने पर कार्ड को अस्थायी रूप से ब्लॉक या लॉक कर देते हैं. इस कारण Brute Force Attack जैसी कोशिशें भी सफल नहीं हो पातीं.

फिर कुछ बैंक 6 अंकों का PIN क्यों अपना रहे हैं?

डिजिटल बैंकिंग और साइबर अपराधों के बढ़ने के साथ कुछ अंतरराष्ट्रीय बैंक और वित्तीय संस्थान अब 6 अंकों के PIN का इस्तेमाल कर रहे हैं. 6 अंकों के PIN में संभावित संयोजन 10 लाख तक पहुंच जाते हैं, जिससे सुरक्षा और मजबूत हो जाती है. हालांकि ज्यादा अंक होने से PIN याद रखना कुछ लोगों के लिए कठिन हो सकता है. यही कारण है कि आज भी दुनिया के अधिकांश देशों में 4 अंकों का PIN सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है.

अपना ATM PIN कैसे सुरक्षित रखें?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ATM PIN कभी भी जन्मतिथि, मोबाइल नंबर या 1234 जैसे आसान नंबरों पर आधारित नहीं होना चाहिए. PIN किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए और उसे कागज या मोबाइल नोट्स में भी नहीं लिखना चाहिए. समय-समय पर PIN बदलना और ATM पर PIN डालते समय कीपैड को हाथ से ढकना भी अच्छी सुरक्षा आदत मानी जाती है.

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अभिषेक पाण्डेय पिछले 4 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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