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Home Business Vande Bharat Sleeper : वंदे भारत स्लीपर का ट्राॅयल मई महीने से, यात्रियों को मिलेगी ये सुविधा

Vande Bharat Sleeper : वंदे भारत स्लीपर का ट्राॅयल मई महीने से, यात्रियों को मिलेगी ये सुविधा

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Vande Bharat Sleeper : वंदे भारत स्लीपर का ट्राॅयल मई महीने से, यात्रियों को मिलेगी ये सुविधा
Vande Bharat Train

Vande Bharat Sleeper : वंदे भारत में स्लीपर बर्थ की सुविधा भारतीय रेल जल्दी ही शुरू करने वाला है. जानकारी के अनुसार मई से वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस का ट्राॅयल शुरू जाएगा. साथ ही भारतीय रेल कम दूरी के लिए वंदे भारत मेट्रो की शुरुआत भी करने वाला है. टाइम्स आॅफ इंडिया ने रेलवे के अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी है कि वंदे भारत मेट्रो का ट्राॅयल जुलाई महीने से शुरू होगा.

वंदे भारत मेट्रो को 100 से 250 किमी की दूरी के लिए चलाया जाएगा

रेलवे के अधिकारियों के अनुसार वंदे भारत मेट्रो को 100 से 250 किलीमीटर की दूरी के शहरों के बीच चलाया जाएगा, जबकि वंदे भारत स्लीपर को एक हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए शुरू किया जाएगा. वंदे मेट्रो को 124 से अधिक शहरों के बीच चलाया जाएगा, जिसमें से कुछ स्थानों को चिह्नित कर लिया गया है. वंदे मेट्रो को लखनऊ-कानपुर, आगरा-मथुरा, दिल्ली-रेवाड़ी, भुवनेश्वर-बालासोर और तिरुपति-चेन्नई के बीच चलाने की योजना है.

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अपर बर्थ के यात्रियों के लिए खास इंतजाम


वंदे मेट्रो ट्रेन का उद्देश्य यात्रियों को अधिक से अधिक एसी ट्रेन की सुविधा उपलब्ध कराना है. फिलहाल यह ट्रेन अभी जो ट्रैक मौजूद हैं, उनपर ही चलेगी. वंदे स्लीपर ट्रेन में यात्रियों की सुविधा का खास ध्यान रखा गया है.खासकर अपर बर्थ के यात्रियों को ऊपर चढ़ने में असुविधा ना हो, इसके लिए उसमें सीढ़ी की सुविधा दी गई है. सीट की क्वालिटी बेहतर होगी ताकि यात्रियों को आराम महसूस हो, इसमें कुशनिंग बेहतर होगा. ट्रेन की रफ्तार 160 किलोमीटर प्रतिघंटा की होगी. वंदे भारत स्लीपर में 823 यात्री सफर कर सकेंगे. एसी3 में 611, एसी2 में 188 औरर एसी1 में 241 बर्थ की सुविधा दी जाएगी. साथ ही वंद भारत स्लीपर के बर्थ राजधानी एक्सप्रेस से बेहतर होंगे. इस ट्रेन में 16 कोच होंगे, जिनमेें से 11 एसी3, 4 एसी2 और एक एसी1 का कोच होगा.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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