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यूपीआई ने रचा नया कीर्तिमान, जुलाई में हुए रिकॉर्ड 19.47 अरब ट्रांजेक्शन

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यूपीआई ने रचा नया कीर्तिमान, जुलाई में हुए रिकॉर्ड 19.47 अरब ट्रांजेक्शन
upi transaction in India

UPI Transaction in India: यूपीआई ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है. जुलाई में हुए रिकॉर्ड 19. 47 अरब ट्रांजेक्शन ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. यह आंकड़ा देश में डिजिटल लेनदेन की बढ़ती रफ्तार और लोगों द्वारा यूपीआई को तेजी से अपनाने का स्पष्ट प्रमाण है. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, यह जबरदस्त वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था में डिजिटल भुगतान की बढ़ती भूमिका को उजागर करती है. इस शानदार प्रदर्शन से यह भी साफ होता है कि यूपीआई अब शहरी ही नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी आम जनता के रोजमर्रा के लेनदेन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है, जो भारत को कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहा है.

UPI Transaction in India: रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2025 में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने लेनदेन की संख्या में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. इस महीने कुल 19. 47 अरब लेनदेन दर्ज किए गए हैं, जो भारत में डिजिटल भुगतान के बढ़ते दायरे को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं. यह आंकड़ा यूपीआई के लिए अब तक का सबसे अधिक मासिक लेनदेन वॉल्यूम है. मूल्य के संदर्भ में, जुलाई में यूपीआई लेनदेन का कुल मूल्य 25. 08 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. हालांकि यह मई 2025 में दर्ज किए गए 25. 14 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड मूल्य से थोड़ा कम है, फिर भी यह दूसरा सबसे अधिक मासिक मूल्य दर्ज किया गया है. यह उपलब्धि पिछले महीनों के प्रदर्शन की तुलना में एक महत्वपूर्ण उछाल दिखाती है. मई 2025 में, यूपीआई ने 18. 67 अरब लेनदेन दर्ज किए थे, जबकि जून 2025 में यह संख्या घटकर 18. 39 अरब लेनदेन पर आ गई थी. जून में लेनदेन का मूल्य 24. 03 लाख करोड़ रुपये था. इस प्रकार, जुलाई में लेनदेन की संख्या में जून की तुलना में 5. 8 प्रतिशत की मासिक वृद्धि देखी गई. मूल्य के संदर्भ में, मासिक वृद्धि 4. 3 प्रतिशत रही. सालाना आधार पर देखें तो जुलाई 2024 की तुलना में जुलाई 2025 में लेनदेन की संख्या में 35 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि हुई है. लेनदेन के मूल्य में भी सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जुलाई में औसत दैनिक लेनदेन वॉल्यूम 628 मिलियन रहा, जबकि दैनिक औसत मूल्य 80,919 करोड़ रुपये था. यह आंकड़े भारत में डिजिटल भुगतान के तेजी से हो रहे विस्तार और लोगों द्वारा यूपीआई को अपनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाते हैं.

डिजिटल भुगतान में बढ़ती भागीदारी (UPI Transaction in India)

यूपीआई का यह रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में आ रहे बड़े बदलाव का संकेत देता है. यह न केवल शहरी क्षेत्रों में, बल्कि छोटे व्यवसायों, खुदरा विक्रेताओं और ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिजिटल भुगतान को तेजी से अपनाए जाने का प्रमाण है. लोग अब नकदी पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं और औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जुड़ रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई जैसे प्लेटफॉर्म समावेशी अर्थव्यवस्था की डिजिटल रीढ़ बन रहे हैं. यूपीआई की सहजता और उपयोग में आसानी ने इसे आम लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है, जिससे दैनिक जीवन के छोटे-मोटे खर्चों से लेकर बड़े लेनदेन तक में इसका उपयोग बढ़ गया है. गूगल पे और फोनपे जैसे प्रमुख यूपीआई ऐप्स का इस इकोसिस्टम में 80 प्रतिशत से अधिक का योगदान है. यह दर्शाता है कि डिजिटल भुगतान सिर्फ सुविधा का साधन नहीं, बल्कि भारत में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण उपकरण बन गया है.

यूपीआई की वैश्विक पहुंच (UPI Transaction in India & World)

यूपीआई की बढ़ती लोकप्रियता और सफलता अब भारत की सीमाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है. आज, भारत में होने वाले कुल डिजिटल लेनदेन में यूपीआई का योगदान लगभग 85 प्रतिशत है. इसके अलावा, यह वैश्विक रियल-टाइम डिजिटल भुगतानों के लगभग 50 प्रतिशत को संचालित करता है. वर्तमान में, यूपीआई सात देशों में लाइव है, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस और मॉरीशस शामिल हैं. फ्रांस में यूपीआई की शुरुआत एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है, क्योंकि यह यूरोप में यूपीआई का पहला कदम है. यह कदम उन भारतीयों को सुविधा प्रदान करता है जो इन देशों की यात्रा करते हैं या वहां रहते हैं, जिससे उन्हें विदेशी लेनदेन की सामान्य परेशानियों के बिना आसानी से भुगतान करने में मदद मिलती है. यह वैश्विक स्तर पर भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल की स्वीकार्यता और प्रभाव को दर्शाता है.

एनपीसीआई की नई पहलें और सुरक्षा उपाय (NPCI New Initiatives & Security Features)

यूपीआई प्रणाली की विश्वसनीयता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) लगातार नए उपाय और नीतियां लागू कर रहा है. इन पहलों का उद्देश्य सिस्टम पर पड़ने वाले बोझ को कम करना, असफल लेनदेन को कम करना और समग्र विश्वसनीयता में सुधार लाना है, खासकर व्यस्त समय के दौरान. हाल ही में लागू किए गए कुछ प्रमुख नियमों में शामिल हैं:

  • बैलेंस चेक पर सीमा: उपयोगकर्ता अब किसी भी यूपीआई ऐप के माध्यम से प्रतिदिन अधिकतम 50 बार अपने खाते का बैलेंस चेक कर सकते हैं. पहले इसकी कोई सीमा नहीं थी. विशेषज्ञों के अनुसार, यह सीमा नेटवर्क पर दबाव कम करने और प्रणाली को सुचारु रूप से चलाने के लिए आवश्यक है.
  • ‘लिस्ट अकाउंट’ एपीआई की सीमा: ‘लिस्ट अकाउंट’ एपीआई के तहत लिंक किए गए बैंक खातों को देखने की सुविधा को प्रति उपयोगकर्ता, प्रति ऐप, प्रति दिन 25 अनुरोधों तक सीमित किया गया है.
  • निष्क्रिय यूपीआई आईडी का निष्क्रियकरण: सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए, 12 महीने से निष्क्रिय यूपीआई आईडी को स्वचालित रूप से निष्क्रिय कर दिया जाएगा.
  • उन्नत सत्यापन प्रक्रिया: नए बैंक खातों को यूपीआई से जोड़ने के लिए उन्नत सत्यापन प्रक्रिया लागू की गई है.

ये उपाय यूपीआई इकोसिस्टम को अधिक सुरक्षित और कार्यकुशल बनाने की दिशा में एनपीसीआई की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं.

आगे की राह और चुनौतियां (Plans & Challenges)

यूपीआई की लगातार वृद्धि के बावजूद, इसके संचालन की लागत और वित्तीय स्थिरता को लेकर महत्वपूर्ण चर्चाएं जारी हैं. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा सहित कई हितधारकों ने यूपीआई भुगतान को वित्तीय रूप से व्यवहार्य बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है. इसका अर्थ यह है कि इस प्रणाली को चलाने की लागत या तो सरकार या अंतिम उपयोगकर्ताओं को वहन करनी होगी. बैंकों ने छोटे मूल्य के यूपीआई-आधारित भुगतानों के लिए सरकारी प्रोत्साहन में कटौती के कारण कुछ यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाना शुरू कर दिया है. सरकार ने छोटे व्यापारी आउटलेट पर छोटे टिकट वाले यूपीआई लेनदेन को संसाधित करने के लिए प्रोत्साहन को पिछले साल के 0. 25 प्रतिशत से घटाकर 0. 15 प्रतिशत प्रति लेनदेन कर दिया है. इन चुनौतियों के बावजूद, यूपीआई भारत के डिजिटल भुगतान परिदृश्य का एक अभिन्न अंग बना हुआ है और भविष्य में भी इसके विकास की उम्मीद है, क्योंकि यह देश में नकदी रहित लेनदेन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

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राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर
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