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Home Business सुप्रीम कोर्ट के काउंसिल ने एक्सबीआईएस मशीन की खरीद प्रक्रिया पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट के काउंसिल ने एक्सबीआईएस मशीन की खरीद प्रक्रिया पर उठाए सवाल

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सुप्रीम कोर्ट के काउंसिल ने एक्सबीआईएस मशीन की खरीद प्रक्रिया पर उठाए सवाल
नई दिल्ली में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते सुप्रीम कोर्ट के काउंसिल सवेन्द्र सिंह. फोटो: सोशल मीडिया

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के काउंसिल सवेंद्र सिंह ने सोमवार को देश के हवाई अड्डों पर सुरक्षा जांच में इस्तेमाल होने वाली एक्स-रे बैगेज इंस्पेक्शन सिस्टम मशीन (एक्सबीआईएस मशीन) की खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने एक प्रेसवार्ता के दौरान मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार सबका साथ-सबका विकास के नारे के साथ सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही है. लेकिन, कुछ सरकारी विभाग नियमों को नजरअंदाज कर मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं. उन्होंने देश के हवाई अड्डों के विकास और रखरखाव के तरीकों और इसके लिए इस्तेमाल की जाने वाली मशीनों पर भी सवाल उठाए हैं.

पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ चलाई मुहिम

नई दिल्ली स्थित हिमाचल भवन में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान सुप्रीम कोर्ट के काउंसिल सवेंद्र सिंह ने कहा कि हमें गर्व है कि हम और आप उस समय हैं, जब देश का कुशल नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी कर रहे हैं. उनके बताए गए रास्तों पर हम और आप चल रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस प्रकार से आतंकवाद और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है, उसका ही फल है कि हम आज एक भ्रष्टाचार से जुड़े मसले पर बात करने आए हैं.

भारत में कैसे आएगा विदेशी निवेश

सुप्रीम कोर्ट में काउंसिल सवेंद्र सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकसित भारत की परिकल्पना से इतर कुछ चंद अधिकारी मनमाने तरीके से इस प्रकार के कार्यों में जुटे हैं कि वे विदेशी कंपनियों को भारत से बाहर दिखने का कार्य कर रहे हैं. कुछ कंपनी भारत में निवेश भी करना चाहती है, लेकिन अपने स्वार्थ के कारण कुछ अधिकारी ऐसा होने नहीं दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर सरकारी अधिकारी ही इस प्रकार का भेदभाव करेंगे, तो भारत में विदेशी निवेश कैसे आएगा?

एक्सबीआईएस मशीन के खरी प्रक्रिया में अनियमितता

उन्होंने मीडियाकर्मियों को बताया कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने हाल में ही एक एक्सबीआईएस (एक्स-रे बैगेज इंस्पेक्शन सिस्टम) मशीन के टेंडर की प्रक्रिया में एक ऐसी कंपनी के साथ आगे जाने का फैसला किया है, जिनकी मशीन में आग लगने का इतिहास है. उन्होंने कहा कि इंदौर एयरपोर्ट पर जुलाई 2023 में एक्सबीआईएस मशीन में आग लगी थी. जिस कंपनी की मशीन में आग लगी थी, कुछ अधिकारी उसी कंपनी को दोबारा कॉन्ट्रैक्ट देने के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं.

सुरक्षा में चूक की सूचना पर जांच नहीं

एक सवाल के जवाब में सवेन्द्र सिंह ने कहा कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के सुपरवाइजर ने इस कंपनी की मशीन के अच्छे से काम न करने की शिकायत ईमेल के द्वारा की थी, लेकिन संबंधित अधिकारियों की ओर से किसी प्रकार की जांच नहीं की गई. उन्होंने कहा कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण इंदौर के सुपरवाइजर की ओर से 6 मार्च, 11 मार्च और 21 मार्च, 2024 को इस ओर ध्यान आकृष्ट कराया गया था, जिसमें सुरक्षा जांच में चूक की बात कही गई थी, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने आशंका जाहिर की कि इस प्रकार की मशीनों के इस्तेमाल से इंदौर जैसी घटना की पुनरावृत्ति हो सकती है.

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नागरिक उड्डयन मंत्रालय से संज्ञान लेने की मांग

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी निवेश के बई रास्ते खोले हैं. टेक्नोलॉजी और निवेश के लिए कई विदेशी कंपनियों को आमंत्रित किया है, लेकिन उन विदेशी कंपनियों को टेंडर प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि देश में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आने से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और सप्लाई की कीमतों में गिरावट आती है. उन्होंने कहा कि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की ओर से 102 हवाईअड्डों के लिए 700 से अधिक एक्सबीआईएस मशीन की खरीद की जानी है, लेकिन इस प्रक्रिया में अनियमितता बरती जा रही है. उन्होंने इस मामले में नागरिक उड्डयन मंत्रालय से संज्ञान लेने की मांग की है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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