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Home Business सुपर मॉम की अजब कहानी, बच्चों के लिए रोजाना 700 किमी फ्लाइट से करती है सफर

सुपर मॉम की अजब कहानी, बच्चों के लिए रोजाना 700 किमी फ्लाइट से करती है सफर

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सुपर मॉम की अजब कहानी, बच्चों के लिए रोजाना 700 किमी फ्लाइट से करती है सफर
सुपर मॉम रचेल कौर

Super Mom Story: आपने कई माताओं की कहानियां सुनी होंगी, जो अपने बच्चों के लिए कुछ भी कर गुजरती हैं. खासकर, बंबइया हिंदी सिनेमा जगत में 1980-90 के दशक की कई फिल्में माताओं की ऐसी कहानियों से भरी मिल जाएंगी. उस जमाने में जिन माताओं की कहानियां फिल्मों में दिखाई गई हैं, वे सभी गृहणियां थीं. लेकिन, आज एक ऐसी कामकाजी सुपर मॉम की कहानी सुर्खियां बटोरी रही है. यह कहानी भी कुछ फिल्मी ही दिखाई देती है, लेकिन इसमें कहीं न कहीं सच्चाई नजर आती है. यह सुपर मॉम अपने बच्चों की खातिर फ्लाइट से सफर करके नौकरी करने जाती है और फिर फ्लाइट से ही वापस आती है.

फ्लाइट से सफर करके पैसे बचा लेती है सुपर मॉम

मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार, भारतीय मूल की महिला रचेल कौर मलेशिया में रहती हैं और एयर एशिया के फाइनेंस ऑपरेशन्स में असिस्टेंट मैनेजर हैं. रचेल कौर का दावा है कि वह पांचों कामकाजी दिन में प्लेन से सफर के दो राज्यों को क्रॉस करके ऑफिस पहुंचती हैं और फिर शाम को प्लेन से ही वापस घर लौटती है. रचेल कौर ने खबर टीवी चैनल सीएनए इनसाइडर (चैनल न्यूज एशिया इनसाइडर) को दिए साक्षात्कार के दौरान अपने रोजमर्रा के जीवन के बारे में जानकारियां साझा की हैं. उनका दाववा है कि रोजाना प्लेन से सफर करके वह काफी पैसों की बचत भी कर लेती हैं.

सुपर मॉम को बच्चों से दूर रहना पसंद नहीं

रचेल कौर ने बताया कि उनका ऑफिस मलेशिया के कुलालंपुर में है और उनका परिवार पेनांग राज्य में रहता है. इन दोनों राज्यों के बीच की दूसरी करीब 350 किलोमीटर है. उन्होंने कहा कि इससे पहले वह अपने ऑफिस के पास ही एक किराए के मकान में रहती थीं. इस मकान में रहने के बाद उन्हें हर हफ्ते अपने परिवार से मिलने के लिए पेनांग जाना पड़ता था. मजेदार बात यह है कि बच्चों से दूर रहना उन्हें अच्छा नहीं लगता था. इस कारण उन्हें परिवारिक जीवन और काम में संतुलन बनाने में कठिनाई हो रही थी.

सुबह 5 बजे ऑफिस के लिए निकलती है सुपर मॉम

सीएनए इनसाइडर को दिए साक्षात्कार में रचेल कौर ने कहा कि उनके दो बच्चे हैं. एक की उम्र 11 साल और दूसरे की उम्र 12 साल है. वे अपने बच्चों से दूर रहना नहीं चाहती थीं. इसलिए उन्होंने तय किया कि अब वे रोजाना पेनांग से कुलालंपुर स्थित अपने ऑफिस जाया करेंगी. इसी के साथ ही, उन्होंने अपने घर से ऑफिस जाने के लिए प्लेन से सफर करने की ठानी. इसके लिए वह रोजाना सुबह 4 बजे उठती हैं और तैयार होकर 5 बजे ऑफिस के लिए निकल पड़ती हैं.

रोजाना 3 घंटे कार चलाती है सुपर मॉम

रचेल कौर ने बताया कि घर से ऑफिस के लिए सुबह 5 बजे निकलने के बाद पेनांग एयरपोर्ट तक वह करीब डेढ़ घंटे तक कार चलाती हैं. इसके बाद वह सुबह 6.30 बजे की फ्लाइट पकड़ती हैं और 7.45 बजे तक कुआलालंपुर स्थित अपने ऑफिस पहुंच जाती हैं. इसके बाद दिन भर अपना काम करने के बाद शाम को 8 बजे तक अपना घर पहुंच जाती हैं.

फ्लाइट से सफर करके बचत कर रही सुपर मॉम

गूगल मैप्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रचेल कौर रोजाना अपने घर से ऑफिस आने-जाने में करीब 700 किलोमीटर का सफर तय करती हैं. उनका दावा है कि कुआलालंपुर में किराए वाले मकान में रहने पर उन्हें हर महीने करीब 474 डॉलर (करीब 41,000 रुपये) खर्च करना पड़ता था, लेकिन रुटिन में बदलाव करने के बाद अब उन्हें 316 डॉलर (करीब 27,000 रुपये) का खर्च करना पड़ रहा है. यानी अपने रुटिन में बदलाव करके वह 158 डॉलर (करीब 14,000 रुपये) की बचत कर ले रही हैं.

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सुपर मॉम को ऑफिस में काम करना बेहद पसंद

हालांकि, रचेल कौर वर्क फ्रॉम होम भी काम कर सकती हैं, लेकिन उन्हें ऑफिस में काम करना बेहद पसंद है. उन्हें लगता है कि स्टाफ के साथ काम करने के बाद टारगेट जल्दी पूरा हो जाता है. हालांकि, वह यह भी कहती हैं कि रोजाना सुबह जागने से थकान काफी अधिक हो जाती है, लेकिन घर आने के बाद बच्चों को अपनी आंखों से देखने के बाद सारी थकान दूर हो जाती है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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