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Home Business रेहड़ी-पटरी वालों को भी मिलेगी ट्रेनिंग, FSSAI ने बनाया ये Plan

रेहड़ी-पटरी वालों को भी मिलेगी ट्रेनिंग, FSSAI ने बनाया ये Plan

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रेहड़ी-पटरी वालों को भी मिलेगी ट्रेनिंग, FSSAI ने बनाया ये Plan
एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा मुहैया कराने के लिए बनाई रणनीति.

FSSAI Plan: देश भर में सड़कों के किनारे या फिर सार्वजनिक स्थान पर रेहड़ी-पटरी पर खाने-पीने के सामान बेचने वालों को भी ट्रेनिंग दी जाएगी. आम आदमी को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के मकसद से भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने रेहड़ी-पटरी वालों को भी ट्रेनिंग देने का प्लान बनाया है. हालांकि, एफएसएसएआई ने इस प्लान को पहले ही बना दिया था, अब उसने इससे संबंधित प्रोग्राम का विस्तार कर दिया है.

फिलहाल मुंबई में रेहड़ी-पटरी वालों को मिलेगी ट्रेनिंग

एफएसएसएआई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) जी कमला वर्धन राव के अनुसार, सड़क किनारे बने ढाबे में सुरक्षित भोजन मुहैया करने के मकसद से रणनीति बनाने के लिए वृहन मुंबई नगर निगम (एमसीजीएम) के आयुक्त भूषण वर्षा अशोक गगरानी की अध्यक्षता में मुंबई में एक बैठक हुई. उन्होंने कहा कि बैठक में महानगर में स्वस्थ और स्वच्छ खाने वाली सड़कों (एचएचएफएस) का विकास कर मुंबई में सड़क पर बिकने वाले खाने-पीने के सामान के लिए वैश्विक सुरक्षा और स्वच्छता मानक सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जाएगा.

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ट्रेनिंग प्रोग्राम को मिलेगा विस्तार

जी कमला वर्धन राव ने कहा कि एफएसएसएआई का खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण और प्रमाणन (एफओएसटीएसी) कार्यक्रम देश में रेहड़ी-पटरी और ढाबा चलाने वालों को ताजा खाने-पीने के सामानों की सुरक्षा और साफ-सफाई से संबंधित जानकारी मुहैया कराता है. उन्होंने कहा कि एफएसएसएआई देशभर में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा रहा है, जिससे मुंबई में ट्रेंड स्ट्रीट वेंडर की संख्या में भी बड़ी वृद्धि होगी. शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव के एच गोविंदराज और एफएसएसएआई पश्चिम क्षेत्र की क्षेत्रीय निदेशक प्रीति चौधरी ने भी शहर में खाद्य सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की रणनीतियों पर चर्चा की.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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