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Home Business मिडिल ईस्ट जंग में श्रीलंका बेहाल, 25% बढ़े डीजल-पेट्रोल के दाम

मिडिल ईस्ट जंग में श्रीलंका बेहाल, 25% बढ़े डीजल-पेट्रोल के दाम

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मिडिल ईस्ट जंग में श्रीलंका बेहाल, 25% बढ़े डीजल-पेट्रोल के दाम
श्रीलंका में 25% बढ़े डीजल-पेट्रोल के दाम, प्रतीकात्मक फोटो- पीटीआई

Oil Crisis: मिडिल ईस्ट की जंग में श्रीलंका का हाल बेहाल हो गया है. श्रीलंका की सरकार ने रविवार को ईंधन की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत का इजाफा किया है. अमेरिका-इजराइल और ईरान की जंग के कारण मिडिल ईस्ट से तेल की आपूर्ति बाधित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कीमतें बढ़ रही हैं. यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर श्रीलंका जैसे तेल आयातक देशों के लिए गंभीर चुनौती बन गई है. यह एक सप्ताह में दूसरी बार बढ़ोतरी है.

सरकार ने की अपील- ईंधन और बिजली का समझदारी से करें उपयोग

तेल और गैस संकट के बीच श्रीलंकाई सरकार ने रविवार को जनता से अपील की है कि वे वैश्विक तेल बाजारों में अस्थिरता और संभावित आपूर्ति कमी के बीच ईंधन और बिजली का सीमित और सोच-समझकर उपयोग करें. सरकार ने ऊर्जा बचत के लिए प्रत्येक वाहन के लिए जारी क्यूआर कोड के आधार पर ईंधन की बिक्री निर्धारित मात्रा में शुरू कर दी है. श्रीलंका सरकार के प्रवक्ता और मंत्री नलिंदा जयतिस्सा ने कहा- हम जनता से आग्रह करते हैं कि वे बिजली और ईंधन का समझदारी से उपयोग करें और ऊर्जा खपत को न्यूनतम रखें. उन्होंने ईंधन की जमाखोरी के खिलाफ चेतावनी भी दी.

2022 के आर्थिक संकट के स्तर तक पहुंचने लगी है ईंधन की कीमतें

मंत्री नलिंदा जयतिस्सा ने बताया कि यह फैसला ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण लिया गया है. उन्होंने कहा कि यही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम मार्ग है. वहीं, दो बार कीमतों में बढ़ोतरी के बाद ईंधन की कीमतें 2022 के आर्थिक संकट के स्तर तक पहुंचने लगी हैं, जिससे तत्कालीन राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को नागरिक अशांति के बीच पद छोड़ना पड़ा था.

सब्सिडी देकर हर महीने 20 अरब रुपये खर्च कर रही सरकार

मंत्री जयतिस्सा ने कहा कि हालिया मूल्य वृद्धि के बावजूद सरकार डीजल पर 100 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल पर 20 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी दे रही है. इसके कारण सरकार पर हर महीने 20 अरब रुपये का अतिरिक्त खर्च बढ़ रहा है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईंधन कीमतों में संशोधन नहीं किया गया, तो सरकार पर लगभग 1.5 अरब डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.
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