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Home Business बच गई जान! सरकार ने पीपीएफ समेत स्मॉल सेविंग स्कीम की ब्याज दरों में नहीं की कटौती

बच गई जान! सरकार ने पीपीएफ समेत स्मॉल सेविंग स्कीम की ब्याज दरों में नहीं की कटौती

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बच गई जान! सरकार ने पीपीएफ समेत स्मॉल सेविंग स्कीम की ब्याज दरों में नहीं की कटौती
Small Savings Schemes

Small Savings Schemes: छोटी बचत योजनाओं में पैसा जमा करने वालों की जान बच गई. सरकार ने आम आदमी को बड़ी राहत देते हुए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में किसी प्रकार की कटौती नहीं की है. हालांकि, आशंका यह जाहिर की जा रही थी कि इस बार सरकार इन बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कटौती कर सकती है.

ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं

समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 की जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए पीपीएफ और एनएससी सहित विभिन्न लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. यह लगातार छठी तिमाही है, जब लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों को यथावत रखा गया है.

सितंबर तक मिली मोहलत

वित्त मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी की गई अधिसूचना में कहा गया है, ‘‘एक जुलाई, 2025 से शुरू होकर 30 सितंबर, 2025 को समाप्त होने वाली तिमाही में विभिन्न छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें अपरिवर्तित रहेंगी. इन योजनाओं पर वही ब्याज दर मिलती रहेगी, जो वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-जून तिमाही के लिए अधिसूचित की गयी थी.’’

किन योजनाओं पर कितना ब्याज

  • सुकन्या समृद्धि योजना: 8.2%
  • तीन साल की फिक्स्ड डिपॉजिट: 7.1%
  • सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ): 7.1%
  • डाकघर बचत जमा योजना: 4.0%
  • किसान विकास पत्र: 7.5% (115 महीने मैच्योरिटी)
  • राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी): 7.7%
  • मासिक आय योजना: 7.4%

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लगातार छठी बार ब्याज में कोई बदलाव नहीं

इसके साथ ही, डाकघरों और बैंकों की ओर से संचालित छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में लगातार छठी तिमाही में कोई बदलाव नहीं किया गया है. सरकार ने ब्याज दरों में पिछली बार बदलाव 2023-24 की चौथी तिमाही में कुछ योजनाओं में किया था. सरकार प्रत्येक तिमाही में छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों को अधिसूचित करती है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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