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कोरोना वायरस के लिए ई-मार्केटप्लेस पर अलग पेज बनाया गया

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कोरोना वायरस के लिए ई-मार्केटप्लेस पर अलग पेज बनाया गया

नयी दिल्ली : सरकारी खरीद पोर्टल गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने कोरोना वायरस से लड़ाई में सरकार की मदद करने के लिए थर्मल स्कैनर, बायोहजार्ड बैग और विषाणुनाशक जैसी सामग्रियों की खरीद के लिए अलग पन्ना तैयार किया है. एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी.

जीईएम ने कोविड-19 नमूना संग्रह किट, दोबारा इस्तेमाल योग्य विनाइल/रबर दस्ताने, चश्मे, इस्तेमाल के बाद नष्ट किये जाने वाले थर्मोमीटर, एक बार इस्तेमाल वाले तौलिये, थर्मल स्कैनर, हृदय गति की निगरानी वाले उपकरण, आईसीयू के बिस्तर, एंबुलेंस, स्ट्रेचर, व्हील चेयर, पोर्टेबल एक्स-रे मशीन आदि जैसी कई श्रेणियां तैयार की है. जीईएम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तल्लीन कुमार ने बताया, ‘‘सभी मूल उपकरण विनिर्माताओं, रीसेलर्स और आपूर्तिकर्ताओं की जीईएम पोर्टल पर पहचान की गयी है.

अभी तक हमने जीईएम पर 95 श्रेणियां तैयार की है.” उन्होंने कहा कि कुछ विशिष्ट श्रेणियों के लिए बोली लगाने तथा डिलिवरी के लिए छोटे अंतराल रखे गये हैं. उन्होंने कहा कि कोविड-19 से जुड़ी श्रेणियों के लिए बोली लगाने की समयावधि को 10 दिन से घटाकर तीन दिन कर दिया गया है. कोविड-19 की श्रेणियों तथा विक्रेताओं की संख्या की जानकारी देने वाला नया पन्ना शनिवार से दिखने लगेगा.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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