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Home Business डॉलर के आगे पस्त हुआ रुपया, ₹94.15 के पार पहुंचा भाव

डॉलर के आगे पस्त हुआ रुपया, ₹94.15 के पार पहुंचा भाव

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डॉलर के आगे पस्त हुआ रुपया, ₹94.15 के पार पहुंचा भाव
सांकेतिक फोटो (Photo: Freepik & AI)

Rupee vs Dollar: आज यानी गुरुवार, 23 अप्रैल की सुबह भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर नजर आया. बाजार खुलते ही रुपया 38 पैसे टूटकर 94.15 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि पिछले दिन यह 93.79 पर बंद हुआ था. सुबह करीब 9:20 बजे तक इसमें 0.37% की गिरावट दर्ज की गई. इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं. जब भी दुनिया में कहीं युद्ध जैसी स्थिति बनती है, इन्वेस्टर्स घबराकर अपना पैसा सुरक्षित जगहों पर लगाने लगते हैं, जिसका सीधा असर विकासशील देशों की करेंसी पर पड़ता है. 

क्या कच्चे तेल ने बढ़ाई भारत की मुश्किलें?

रुपये की कमजोरी का सीधा संबंध कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों से है. इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड 1.48% की बढ़त के साथ 103.38 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते विवाद के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) जैसा महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग ब्लॉक हो गया है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल इंपोर्ट करता है, इसलिए जब तेल महंगा होता है, तो भारत को उसे खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. इसी वजह से डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया नीचे गिरने लगता है.

शेयर बाजार की गिरावट का क्या असर हुआ?

विदेशी इन्वेस्टर्स का रुख भी रुपये के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार के दोनों प्रमुख इंडेक्स, निफ्टी (NIFTY50) और सेंसेक्स (SENSEX) में भारी गिरावट देखी गई. इसकी मुख्य वजह विदेशी संस्थागत इन्वेस्टर्स (FIIs) द्वारा भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालना है. जब विदेशी इन्वेस्टर्स शेयर बेचकर अपना पैसा वापस ले जाते हैं, तो वे भारतीय रुपये को डॉलर में बदलकर ले जाते हैं. बाजार में डॉलर की इस भारी डिमांड और रुपये की सप्लाई बढ़ने से करेंसी की वैल्यू कम हो जाती है. 

डॉलर आखिर इतना ताकतवर क्यों हो रहा है?

ग्लोबल मार्केट में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स एक हफ्ते के उच्चतम स्तर 98.691 पर पहुंच गया है. ईरान और अमेरिका के बीच शांति की उम्मीदें फिलहाल धुंधली नजर आ रही हैं, क्योंकि ईरान द्वारा जहाजों पर हमले की खबरों ने तनाव और बढ़ा दिया है. ऐसी अनिश्चितता के माहौल में इन्वेस्टर्स सोने या डॉलर जैसी ‘सेफ हैवन’ संपत्तियों पर भरोसा करते हैं. राष्ट्रपति ट्रंप के कड़े रुख और युद्ध के बढ़ते खतरों ने इन्वेस्टर्स को उभरते हुए बाजारों से पैसा निकालने पर मजबूर कर दिया है, जिससे डॉलर को मजबूती और रुपये को कमजोरी मिल रही है. 

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