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Home Business नए साल से बदल जाएंगे किसान क्रेडिट कार्ड के नियम, जानिए आप पर क्या होगा असर

नए साल से बदल जाएंगे किसान क्रेडिट कार्ड के नियम, जानिए आप पर क्या होगा असर

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नए साल से बदल जाएंगे किसान क्रेडिट कार्ड के नियम, जानिए आप पर क्या होगा असर

KCC New Rules : देश के करोड़ों किसानों के लिए बैंकिंग और लोन से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण खबर है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कृषि लोन (Agricultural Lending) को और अधिक पारदर्शी, आसान और सुसंगत बनाने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं. ये नए दिशानिर्देश अगले साल जनवरी से देश भर में प्रभावी हो जाएंगे. इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य बैंकों द्वारा लोन की मंजूरी और उसे वापस चुकाने (Repayment) की प्रक्रिया को एक समान और व्यवस्थित बनाना है.

आरबीआई ने क्यों बदले केसीसी के नियम?

केंद्रीय बैंक के मुताबिक, इस बदलाव का मकसद किसानों को खेती और उससे जुड़ी अन्य गतिविधियों (जैसे पशुपालन और डेयरी) के लिए सही समय पर पर्याप्त पैसा उपलब्ध कराना है.

अब तक अलग-अलग बैंक अपनी मर्जी या स्थानीय समझ के हिसाब से फसल के सीजन और लोन चुकाने की अवधि तय करते थे, जिससे विसंगतियां पैदा होती थीं. अब नए नियमों को बैंकों के मौजूदा इनकम और एसेट वर्गीकरण के नियमों के दायरे में लाया गया है, जिससे पूरे देश के बैंकों में एक जैसी व्यवस्था लागू होगी.

फसलों के सीजन की नई परिभाषा

नए नियमों के तहत सबसे बड़ा बदलाव “क्रॉप सीजन” (फसल के मौसम) को लेकर किया गया है. अब बैंकों को इसी समय-सीमा के आधार पर लोन की अवधि और रीपेमेंट शेड्यूल तय करना होगा:

  • कम समय वाली फसलें (Short-duration crops): ऐसी फसलों के लिए सीजन की अवधि अधिकतम 12 महीने तय की गई है.
  • लंबे समय वाली फसलें (Long-duration crops): ऐसी फसलों के लिए सीजन की अवधि अधिकतम 18 महीने होगी.

क्या होता है फसल सीजन?

आरबीआई ने साफ किया है कि फसल सीजन का मतलब केवल फसल पकने का समय नहीं है, बल्कि इसमें फसल की बुवाई (Sowing) से लेकर, उसकी कटाई (Harvesting) और बाजार में उसकी अंतिम बिक्री (Marketing) तक का पूरा समय शामिल माना जाएगा.

बिना गारंटी वाले लोन की लिमिट पर क्या हुआ?

नियमों को अंतिम रूप देने से पहले आरबीआई ने बैंकों, कृषि विशेषज्ञों और आम जनता से सुझाव मांगे थे. इस दौरान कई लोगों ने केसीसी के तहत बिना गारंटी (Unsecured Loan) मिलने वाले कर्ज की सीमा को बढ़ाने की मांग की थी.

हालांकि, केंद्रीय बैंक ने इस सीमा को और बढ़ाने से इनकार कर दिया है. आरबीआई का कहना है कि बिना गारंटी वाले लोन की लिमिट को पहले ही दिसंबर 2024 में बढ़ाया जा चुका है, इसलिए फिलहाल इसे और बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है.

सोने-चांदी के बदले लोन लेने वालों को बड़ी राहत

नए नियमों में उन किसानों को बड़ी राहत दी गई है जो सोने या चांदी के गहने गिरवी रखकर खेती के लिए कर्ज लेते हैं.

संशोधित नियमों के अनुसार, यदि कोई किसान सोने या चांदी की गारंटी पर ₹2 लाख तक का कृषि लोन लेता है, तो उसे नियमों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा. इसे बिना गारंटी वाले लोन की तय सीमाओं से अलग विशेष श्रेणी में रखा जाएगा, जिससे किसानों को आसानी से फंड मिल सकेगा और बैंकों को भी काम करने में लचीलापन मिलेगा.

क्या है किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना?

यह भारत सरकार की एक बेहद लोकप्रिय योजना है, जिसके जरिए किसानों को बेहद कम ब्याज दरों पर खेती-किसानी के लिए लोन मिलता है. इसके तहत मिलने वाली रकम का इस्तेमाल किसान इन कामों के लिए कर सकते हैं:

  • फसल की बुवाई और खेती के रोजमर्रा के खर्च.
  • खाद, बीज और कीटनाशक जैसी जरूरी चीजें खरीदना.
  • डेयरी फार्मिंग (दूध का काम) और पशुपालन.
  • मछली पालन (मत्स्य पालन) और एक्वाकल्चर.
  • खेती से जुड़े अन्य निवेश और मशीनरी की जरूरतें.

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अभिषेक पाण्डेय पिछले 4 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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