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RBI Mobile App से सरकारी प्रतिभूतियों की होगी खरीद-बिक्री

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RBI Mobile App से सरकारी प्रतिभूतियों की होगी खरीद-बिक्री
सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री के लिए आरबीआई ने लॉन्च किया मोबाइल ऐप. फोटो: सोशल मीडिया

RBI Mobile App: सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मोबाइल ऐप को लॉन्च कर दिया है. केंद्रीय बैंक के इस कदम से खुदरा निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री करने में सहूलियत होगी. मोबाइल ऐप के जरिये खुदरा निवेशक अब अपने स्मार्टफोन पर मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करके सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री कर सकते हैं. इसके साथ ही, आरबीआई ने आसान तरीके से ऑनलाइन आवेदन जमा कराने के लिए ‘प्रवाह’ पोर्टल की शुरुआत भी की है.

कहां से डाउनलोड करेंगे मोबाइल ऐप

सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री से जुड़े ‘रिटेल डायरेक्ट’ मोबाइल ऐप के संबंध में आरबीआई के बयान में कहा गया है कि इसके जरिए खुदरा निवेशक अब अपने स्मार्टफोन पर मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करके सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री कर सकते हैं. मोबाइल ऐप को एंड्रॉयड उपयोगकर्ताओं के लिए ‘प्ले स्टोर’ और आईओएस उपयोगकर्ताओं के लिए ‘ऐप स्टोर’ से डाउनलोड किया जा सकता है. फिलहाल, ‘रिटेल डायरेक्ट’ पोर्टल खुदरा निवेशकों को भारतीय रिजर्व बैंक के साथ खुदरा प्रत्यक्ष सरकारी प्रतिभूति खाते खोलने की सुविधा प्रदान करता है. खुदरा प्रत्यक्ष योजना के तहत यह सुविधा दी गई है.

नियामकीय मंजूरी को आसान बनाएगा प्रवाह

आरबीआई की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि ‘प्रवाह’ पोर्टल नियामकीय मंजूरी देने से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं को आसान बनाएगा. इसके अलावा, आरबीआई ने ‘फिनटेक रिपॉजिटरी’ पहल की है. गवर्नर शक्तिकांत दास की ओर से शुरू की गई इस तीसरी पहल का मकसद नियामकीय दृष्टिकोण से क्षेत्र की बेहतर समझ के लिए भारतीय वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) कंपनियों के आंकड़ों को स्टोर करना और विजनरी पॉलिसी तैयार करने में सुविधा प्रदान करना है. पोर्टल नवंबर, 2021 में शुरू किया गया था.

प्रवाह पर जमा कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन

नियामकीय आवेदन, सत्यापन और मंजूरी के लिए शुरू किया गया ‘प्रवाह’ पोर्टल सुरक्षित और सेंटरलाइज वेब-आधारित प्लेटफॉर्म है. यह किसी भी व्यक्ति या इकाई के लिए रिजर्व बैंक से जुड़े मामलों में मंजूरी, लाइसेंस या नियामकीय अनुमोदन प्राप्त करता है. आरबीआई ने बयान में पोर्टल की विशेषताओं को साझा करते हुए कहा कि विभिन्न नियामक और निगरानी विभागों से जुड़े 60 आवेदन पत्र ऑनलाइन जमा किये जा सकते हैं. इसके अलावा इस पोर्टल पर आवेदन के स्टेटस को भी चेक किया जा सकता है. आरबीआई किसी आवेदन से संबंधित निर्णय समयबद्ध तरीके से भेज सकता है. इसमें कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर और आवेदन पत्र उपलब्ध कराए जाएंगे.

क्या है फिनटेक रिपॉजिटरी का लक्ष्य

बयान के अनुसार, फिनटेक रिपॉजिटरी का लक्ष्य नियामकीय दृष्टिकोण और उपयुक्त नीतिगत रुख बनाने के मकसद से वित्तीय प्रौद्योगिकी इकाइयों, उनकी गतिविधियों, प्रौद्योगिकी इस्तेमाल आदि के बारे में आवश्यक जानकारी प्राप्त करना है. नियमन के दायरे में आने और उससे बाहर रहने वाली दोनों तरह की वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों को रिपॉजिटरी में योगदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.

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एमटेक रिपॉजिटरी जारी

इसके साथ ही, ‘एमटेक रिपॉजिटरी’ भी जारी किया गया है. यह केवल आरबीआई के दायरे में आने वाली इकाइयों (बैंकों और एनबीएफसी) के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग आदि) को अपनाने के लिए एक संबंधित रिपॉजिटरी है. फिनटेक और एमटेक रिपॉजिटरी सुरक्षित वेब-आधारित एप्लिकेशन हैं और इन्हें आरबीआई की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी रिजर्व बैंक इनोवेशन हब (आरबीआईएच) प्रबंधित करती है.

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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