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Home Business नुकसान से पहले तैयारी का नियम लागू, बैंकिंग सेक्टर में बदलाव, EMI पर असर संभव

नुकसान से पहले तैयारी का नियम लागू, बैंकिंग सेक्टर में बदलाव, EMI पर असर संभव

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नुकसान से पहले तैयारी का नियम लागू, बैंकिंग सेक्टर में बदलाव, EMI पर असर संभव
RBI

RBI : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बैंकों के लिए कर्ज के बदले पैसे सुरक्षित रखने (Provisioning) के नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रहा है. अब बैंक Incurred Loss (नुकसान होने के बाद) के बजाय Expected Credit Loss (ECL) यानी ‘अपेक्षित नुकसान’ के आधार पर प्रावधान करेंगे. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल का कहना है कि इससे बैंकों के मुनाफे और पूंजी पर असर तो पड़ेगा, लेकिन उनके डूबने का खतरा कम हो जाएगा.

क्या है ECL फ्रेमवर्क और यह क्यों जरूरी है?

अब तक बैंक तब पैसा अलग रखते थे जब कोई लोन डिफॉल्ट हो जाता था. लेकिन नए ECL फ्रेमवर्क के तहत. बैंक को लोन देते समय ही यह अंदाजा लगाना होगा कि भविष्य में कितना नुकसान हो सकता है.
इसे ‘फॉरवर्ड लुकिंग’ मॉडल कहा जाता है, जिससे बैंक किसी भी आर्थिक संकट के लिए पहले से तैयार रहेंगे. यह भारतीय बैंकिंग नियमों को ग्लोबल मानकों (Global Standards) के बराबर लाएगा.

बैंकों की सेहत पर कितना पड़ेगा असर?

क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक, इस बदलाव से बैंकों के CET-1 रेशियो (पूंजी की मजबूती मापने का पैमाना) पर 120 बेसिस पॉइंट्स (1.20%) तक का असर पड़ सकता है. आरबीआई ने इस झटके को सहने के लिए बैंकों को 4 साल का समय दिया है. यानी बैंक इस प्रभाव को धीरे-धीरे अपनी बैलेंस शीट में दिखा सकते हैं. भारतीय बैंकों के पास फिलहाल पर्याप्त पूंजी (करीब 14% CET-1 रेशियो) है, इसलिए वे इस बदलाव को आसानी से झेल लेंगे.

लोन लेने वालों और बैंकों के लिए चुनौतियां

क्रिसिल की डायरेक्टर शुभा श्री नारायणन और एसोसिएट डायरेक्टर वाणी ओजस्वी ने कुछ अहम बातें बताईं.

  • क्रेडिट कॉस्ट बढ़ेगी: बैंकों को अब नए लोन के लिए ज्यादा पैसा रिजर्व में रखना होगा, जिससे उनकी लागत बढ़ सकती है.
  • मुनाफे पर दबाव: बैंकों को अपना मुनाफा बनाए रखने के लिए ऑपरेटिंग खर्चों को कम करना होगा और ब्याज दरों (Net Interest Margins) पर ज्यादा ध्यान देना होगा.
  • ऑफ-बैलेंस शीट पर भी नजर: अब बैंकों को उन क्रेडिट लिमिट्स के लिए भी प्रावधान करना होगा जो अभी तक ग्राहकों ने इस्तेमाल नहीं की हैं.

कब से लागू होंगे नियम?

आरबीआई के ये नए दिशा-निर्देश 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होंगे. बैंकों को तीन चरणों (Stage I, II, III) में अपनी संपत्तियों का वर्गीकरण करना होगा, जो इस आधार पर होगा कि लोन के डूबने की कितनी संभावना है.

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अभिषेक पाण्डेय पिछले 4 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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