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Home Business डॉलर की तंगी होगी दूर! विदेशी पैसा खींचने के लिए RBI ने बनाया ‘फाइव-पॉइंट प्लान’

डॉलर की तंगी होगी दूर! विदेशी पैसा खींचने के लिए RBI ने बनाया ‘फाइव-पॉइंट प्लान’

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डॉलर की तंगी होगी दूर! विदेशी पैसा खींचने के लिए RBI ने बनाया ‘फाइव-पॉइंट प्लान’
RBI 5 Point Plan (Photo: ANI)

RBI 5 Point Plan: ग्लोबल मार्केट में जारी उठापटक और वेस्ट एशिया के तनाव के बीच भारतीय इकॉनमी को मजबूत रखने के लिए रिजर्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार ने मिलकर एक प्लान तैयार किया है. इस फाइनेंशियल ईयर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारत से करीब 13.7 अरब डॉलर बाहर निकाले हैं, जिससे रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है.

क्रूड ऑयल भी अप्रैल-मई में औसतन 110 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच चुका है, जिसने भारत की चिंता बढ़ा दी है. हालांकि, देश के पास अभी 29 मई 2026 तक 682.3 अरब डॉलर का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) मौजूद है, जो 11 महीने के इम्पोर्ट (आयात) के लिए काफी है. लेकिन भविष्य के खतरों को देखते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखते हुए देश में डॉलर के इनफ्लो (Inflow) को बढ़ाना के लिए इस ‘5-पॉइंट प्लान’ का ऐलान किया है, जिसे सरकार के टैक्स रिफॉर्म का भी पूरा साथ मिला है.

विदेशी निवेशकों के लिए खुले सरकारी बॉन्ड के दरवाजे 

आरबीआई और सरकार का सबसे बड़ा दांव भारत के Sovereign Yield Curve (संप्रभु प्रतिफल वक्र) पर है. सरकार ने इसके लिए बकायदा ‘इन्कम-टैक्स (संशोधन) ऑर्डिनेंस’ जारी किया है, जिससे सरकारी सिक्योरिटीज (G-Secs) में निवेश पर लगने वाले टैक्स को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है.

  • टैक्स से पूरी आजादी: लिस्टेड सरकारी बॉन्ड्स पर लगने वाला 12.5% का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस टैक्स (LTCG) और ब्याज पर लगने वाला 20% विदहोल्डिंग टैक्स अब पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. यह फायदा बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) को भी मिलेगा.
  • FAR और नियमों में ढील: सरकार के नए 15, 30 और 40 साल वाले लॉन्ग-टर्म बॉन्ड्स को ‘फुल्ली एक्सेसिबल रूट’ (FAR) में डाल दिया गया है, यानी विदेशी निवेशक अब बिना किसी सीमा के जितना चाहें पैसा लगा सकते हैं. साथ ही, जनरल रूट के तहत शॉर्ट-टर्म और कंसंट्रेशन से जुड़ी सभी पुरानी पाबंदियां हटा दी गई हैं.

सरकारी कंपनियों (PSUs) के लिए विदेशी कर्ज हुआ सस्ता

देश में डॉलर खींचने के लिए आरबीआई ने सरकारी कंपनियों को विदेश से कमर्शियल लोन (ECBs) जुटाने के लिए हरी झंडी दी है. इसके लिए आरबीआई 30 सितंबर 2026 तक एक स्पेशल रियायती फॉरेक्स स्वैप (Forex Swap) सुविधा दे रहा है. इससे कंपनियों की हेजिंग कॉस्ट (विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव का जोखिम खर्च) बेहद कम हो जाएगी और उनके लिए विदेशों से मीडियम-टर्म फंड जुटाना काफी किफायती हो जाएगा.

FCNR(B) डिपॉजिट पर बैंकों की हेजिंग का पूरा खर्च उठाएगा RBI

विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक खाता यानी FCNR(B) डिपॉजिट को आकर्षक बनाने के लिए आरबीआई ने बैंकों को बड़ी राहत दी है. अगर अधिकृत डीलर बैंक 3 से 5 साल की मैच्योरिटी वाले नए FCNR(B) डिपॉजिट जुटाते हैं, तो उनकी हेजिंग का पूरा का पूरा खर्च खुद आरबीआई भुगतेगा. यह स्कीम भी 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेगी, जिससे बैंकों के लिए विदेशी फंड जुटाना बेहद आसान हो जाएगा.

विदेशी नागरिकों के लिए शेयर बाजार में निवेश हुआ आसान

आरबीआई सिर्फ बड़े संस्थागत निवेशकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने आम विदेशी नागरिकों को भी मौका दिया है. एनआरआई (NRI), ओसीआई (OCI) और दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले व्यक्तिगत निवेशकों (PROI) के लिए बिना सेबी (SEBI) रजिस्ट्रेशन के भारतीय शेयर बाजार में निवेश की लिमिट को बढ़ा दिया गया है. अब सभी व्यक्तिगत विदेशी निवेशकों को एनआरआई के बराबर लाकर खड़ा कर दिया गया है.

एक्सपोर्टर्स के लिए कमाई वापस लाने की समय सीमा बढ़ाई

ग्लोबल क्राइसिस के इस दौर में भारतीय एक्सपोर्टर्स महंगे मालभाड़े (Freight) और इंश्योरेंस के खर्च से दबे हुए हैं. उन्हें नकदी के संकट से बचाने और राहत देने के लिए आरबीआई ने एक्सपोर्ट से होने वाली डॉलर की कमाई को वापस भारत लाने की समय सीमा को बढ़ाकर फिर से पूरे 9 महीने कर दिया है.

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