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Home Business सरकारी खजाने में आएंगे ₹34,000 करोड़, RBI ने बॉन्ड नीलामी का रिजल्ट किया घोषित

सरकारी खजाने में आएंगे ₹34,000 करोड़, RBI ने बॉन्ड नीलामी का रिजल्ट किया घोषित

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सरकारी खजाने में आएंगे ₹34,000 करोड़, RBI ने बॉन्ड नीलामी का रिजल्ट किया घोषित
RBI Underwriting Auction 2026 (Photo: ANI)

RBI Underwriting Auction 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार, 8 मई 2026 को सरकारी सिक्योरिटीज (G-Secs) की नीलामी को लेकर एक बड़ा अपडेट साझा किया है. RBI ने ‘New GS 2036’ नाम के नए सरकारी बॉन्ड के लिए ‘अंडरराइटिंग ऑक्शन’ (Underwriting Auction) के नतीजे घोषित कर दिए हैं. इस प्रक्रिया के जरिए सरकार बाजार से कुल 34,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है.

क्या है यह ‘New GS 2036’ और अंडरराइटिंग?

सरल शब्दों में कहें तो जब सरकार को देश के विकास कार्यों या वित्तीय जरूरतों के लिए पैसे की जरूरत होती है, तो वह कर्ज लेती है. इसके लिए वह ‘सरकारी बॉन्ड’ या ‘सिक्योरिटीज’ जारी करती है. ‘New GS 2036’ का मतलब है कि यह बॉन्ड साल 2036 में मैच्योर होगा. अब सवाल आता है कि ‘अंडरराइटिंग’ क्या है? जब सरकार इतने बड़े पैमाने पर बॉन्ड जारी करती है, तो उसे यह पक्का करना होता है कि सारे बॉन्ड बिक जाएं. इसके लिए RBI ‘प्राइमरी डीलर्स’ (Primary Dealers) की मदद लेता है. ये डीलर्स (जो बैंक या बड़ी वित्तीय संस्थाएं होती हैं) गारंटी देते हैं कि अगर बाजार में बॉन्ड नहीं बिके, तो वे उन्हें खरीद लेंगे. इसी गारंटी के बदले RBI उन्हें ‘अंडरराइटिंग कमीशन’ देता है.

डीलर्स को कितना मिलेगा कमीशन?

RBI ने इस नीलामी के लिए कमीशन की दर 0.38 पैसे प्रति 100 रुपये तय की है. इसका मतलब है कि प्राइमरी डीलर्स को हर 100 रुपये की जिम्मेदारी उठाने पर 0.38 पैसे का भुगतान किया जाएगा.

इस नीलामी के मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • कुल राशि (Notified Amount): 34,000 करोड़ रुपये.
  • न्यूनतम प्रतिबद्धता (MUC): 17,010 करोड़ रुपये (यह वह हिस्सा है जिसे डीलर्स को अनिवार्य रूप से संभालना था).
  • अतिरिक्त नीलामी (ACU): 16,990 करोड़ रुपये.

इन सभी को मिलाकर कुल 34,000 करोड़ रुपये की अंडरराइटिंग पूरी हो चुकी है. 

क्यों जरूरी हैं प्राइमरी डीलर्स?

प्राइमरी डीलर्स सरकारी बाजार की रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं. इनका मुख्य काम सरकार के उधार लेने की प्रक्रिया को आसान और सफल बनाना है. अगर ये डीलर्स न हों, तो सरकार के लिए एक साथ हजारों करोड़ रुपये जुटाना मुश्किल हो सकता है. ये न केवल नीलामी में हिस्सा लेते हैं, बल्कि बाजार में इन बॉन्ड्स की खरीद-बिक्री (Liquidity) भी बनाए रखते हैं. 

आम जनता पर इसका क्या असर होगा?

सीधे तौर पर देखें तो यह सरकार की एक रूटीन प्रक्रिया है, लेकिन बड़े नजरिए से यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए अहम है. सरकार इस पैसे का इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में करती है. जब RBI सफलतापूर्वक ऐसी नीलामी करता है, तो इससे बाजार में स्थिरता का संकेत मिलता है और सरकार के पास विकास कार्यों के लिए फंड की कमी नहीं होती. 

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